टीम इंडिया (Team India) की टेस्ट कप्तानी कई दिग्गज भारतीय क्रिकेटर्स ने की है, लेकिन लीडरशिप के दौरान कुछ ऐसे अनचाहे रिकॉर्ड्स बने हैं जो याद रखने लायक नहीं हैं.
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नई दिल्ली: दुनिया का कोई भी क्रिकेटर किसी भी लेवल पर शून्य के निजी स्कोर पर आउट होना नहीं चाहता. अगर कोई स्टार खिलाड़ी है तो उसके लिए बिना खाता खोले पवेलियन लौटना शर्मिंदगी की बात होती है. सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और एमएस धोनी समेत कई दिग्गज क्रिकेटर के करियर में ऐसे मौके आए हैं जब वो टीम के लिए बल्ले से कोई योगदान नहीं दे पाए हैं.
टीम इंडिया (Team India) को व्हाइट जर्सी में लीड करने वाले ऐसे कई क्रिकेटर्स हैं जो टेस्ट क्रिकेट में कई बार शून्य पर आउट हुए हैं. आइए नजर डालते उन भारतीय टेस्ट कप्तानों पर जो एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा बार डक आउट हुए हैं.
विराट कोहली (Virat Kohli) ने दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में 1-2 से सीरीज हारने के बाद टीम इंडिया (Team India) की टेस्ट कप्तानी से इस्तीफा दे दिया था. वो एक कैलेंडर ईयर में टेस्ट में सबसे ज्यादा बार शून्य पर आउट होने के मामले में टॉप पर हैं, दो बार ऐसा हुआ है जब वो एक साल के भीतर 5 दफा डक आउट हुए हैं. साल 2017 और 2021 में विराट कोहली के खाते में ये अनचाहा रिकॉर्ड जुड़ गया था.
टीम इंडिया (Team India) के पूर्व कप्तान और बेहतरीन ऑलराउंडर्स की लिस्ट में शुमार किए जाने वाले कपिल देव 1983 में टेस्ट क्रिकेट में 5 बार बिना खाता खोले पवेलियन वापस लौट गए थे. दिलचस्प बात ये है कि ये वही साल था जब कपिल की कप्तानी में भारत ने पहली बार वनडे वर्ल्ड जीतकर इतिहास रच दिया था.
बिशन सिंह बेदी (Bishan Singh Bedi) ने साल 1976 से लेकर 1978 के बीच 22 मैचों में टीम इंडिया (Team India) के लिए टेस्ट कप्तानी की है, वो इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर आते हैं. अपनी कप्तानी के पहले साल यानी 1976 में वो 4 बार डक आउट हुए है.
एमएस धोनी (MS Dhoni) ने साल 2008 और 2014 के बीच 60 टेस्ट मैचों में टीम इंडिया (Team India) के लिए कप्तानी की है. वो साल 2011 में 4 बार व्हाइट जर्सी में डक आउट हुए हैं. इत्तेफाक की बात ये है कि धोनी ने इसी साल भारत को वनडे वर्ल्ड कप दिलाया था.