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पंकज रामेंदु

पर्यावरण-पर्यावरण रटते तोते और भविष्य कहती कहानी

पर्यावरण को लेकर पिछले तीन चार दशकों से खूब बातें हो रही हैं, कहीं कहीं कुछ स्तर पर काम भी हो रहा है लेकिन बातें लगातार हो रही है. इन बातों के बीच जिस तरह से हम प्रकृति को नुकसान पहुंचाए जा रहे हैं वो हमें इसी कहानी की याद दिलाता है.

Jun 5, 2019, 03:56 PM IST

नदी तुम भी औरत ही तो हो...

फिल्म ही नहीं आपको हकीकत में भी आए दिन औरत को सजा के तौर पर नग्न करके घुमाने की खबरें मिलती ही रहती है. गोया औरत को नग्न करना ही उसकी सबसे बड़ी सजा है.

मई 3, 2019, 03:38 PM IST

World water day 2019: रोटी के दाम चुकाती धरती

ये समझना बेहद ज़रूरी है कि धरती के नीचे मौजूद पानी उस टूथपेस्ट की तरह है जिसे जितनी तेजी से बाहर निकाला जा सकता है उतनी ही तेजी से अंदर नहीं डाला जा सकता है.

Mar 22, 2019, 03:17 PM IST

स्वामी साणंद जैसे समर्पित लोगों का बलिदान ज़ाया नहीं जाना चाहिए

जब स्वामी ज्ञानस्वरूप साणंद की मौत की खबर सुनी तो उनके यही वाक्य मेरे कान में गूंज गए जो उन्होंने उस दौरान हमसे कहे थे कि अब वो चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी बस प्राण निकलें.

Oct 12, 2018, 03:15 PM IST

‘बधाई हो गणेश हुआ है’

कभी किसी घऱ में लड़के के पैदा होने पर ‘बधाई हो गणेश’ हुआ है सुनने का नहीं मिला. वहां बधाई हो लड़का हुआ है ही बोला जाता है. 

Oct 11, 2018, 03:10 PM IST

स्वार्थ के आगे बौनी है पर्यावरण की चिंता

स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद यानि प्रोफेसर जीडी अग्रवाल गंगा एक्ट बनाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसका मूल यही है कि गंगा के उद्गम से 250 किमी के दायरे तक कम से कम उसके किनारे किसी तरह का कोई निर्माण ना किया जाए.

Sep 22, 2018, 10:25 AM IST

खुशियों का पीरियड

दरअसल, ज़रूरत शिक्षा में सहजता की है. जिस देश में गुरू पहले शिक्षक बने और फिर वो संविदा शिक्षक हो गए, वहां पर नौकरी ही की जा रही है. जबकि शिक्षा देना कोई नौकरी नहीं है. 

Aug 23, 2018, 02:13 PM IST

गीत उन्मन है, ग़ज़ल चुप है, रुबाई है दुखी और वो 'नीरज का दौर'

बाबरी मस्जिद विध्वंस को हुए वक्त गुज़र चुका था. दंगों में झुलसे घर, गाड़ियां और लोग अब धीरे-धीरे समय की बारिश से धुल कर अपने धूसर रंग को उतार रहे थे. भोपाल में हर साल लगने वाले उत्सव मेले में पिछले चार पांच साल से फीके पड़े कवि सम्मेलन में इस बार रंग बिखरने की उम्मीद की जा रही थी.

Jul 21, 2018, 03:44 PM IST

पर्यावरण और कौए वाली मानसिकता

आज भारत में 16 करोड़, 30 लाख लोग ऐसे हैं जो साफ पानी के लिए तरस रहे हैं, पिछले साल की तुलना में यह आंकड़ा इस साल बढ़ा है. ऐसा इसलिए क्योंकि वो लोग जिन्हें अपने घर तक पानी लाने में आधे घंटे का आना जाना करना पड़ता है, उन्हें उस श्रेणी में शामिल नहीं किया जाता जिन तक पानी की पहुंच है. 

Jun 5, 2018, 07:57 PM IST

तंबाकू सेवन- डरना ज़रूरी है

अगर आप बनारस जाते हैं तो वहां आपको सामने वाली की बात डीकोड करना आना चाहिए क्योंकि वो अपने मुंह मे भरा हुए तंबाकू से लबरेज पान की कुर्बानी किसी कीमत पर नहीं कर सकते हैं.

मई 31, 2018, 09:43 PM IST

ये गुस्सा है या ‘हीरो’ बनने की जल्दी

आए दिनों भीड़ के द्वारा किसी के मारे जाने की खबर सुनना अब एक आम बात हो गई है जिसे की ‘न्यू नॉर्मल’ भी कहा जाने लगा है. न्यू नॉर्मल इसलिए कि अब इस तरह की घटनाएं इस कदर दिखाई-सुनाई दे रही हैं कि धीरे धीरे लोग इसे रोज़ की बात समझने लगे हैं, यह वारदातें दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है.

मई 23, 2018, 03:47 PM IST

कर्नाटक चुनाव 2018: लिंगायत का वचन ही है कानून

लिंगायत मत ने बारहवीं शताब्दी में ही जाति-भेद, चार आश्रमों और चार वर्णों की व्यवस्था, बहुदेववाद, पुरोहितवाद, पशु-बलि, आत्म-बलि, सती-प्रथा, कर्मों के बंधन, ईश्वर और आत्मा के द्वैत, मंदिर-पूजा, छूत-अछूत, स्वर्ग और नर्क की धारणाओं का खंडन किया.

मई 15, 2018, 03:07 PM IST

मदर्स डे 2018: मां कोई औरत नहीं भाव है

ममत्व एक भाव है जो किसी के अंदर भी हो सकता है. और जिसके अंदर ये भाव है वो ही सही मायने में मां है.

मई 13, 2018, 09:04 AM IST

विश्व काव्य दिवस विशेष: कवि से कविता का होना...

हमारे यहां गौतम से लेकर गांधी तक सब मौजूद है अजी हमारे आगे धरम ईमान, राम-रहीम का क्या वजूद है सच्चाई, नैतिकता तो हमारे सामने डूबता हरसूद हैं संवेदनाएं रोज़ हमारे कदमों में अपना सिर टेकती हैं ईमानदारी खुद की मार्केटिंग की राह देखती हैं.

Mar 21, 2018, 12:32 PM IST

प्रकृति, प्रेम और केदारनाथ सिंह

वहीं कवि केदारनाथ सिंह की कविताओं में प्रकृति का बिंब देखने को मिलता है. जो ताउम्र यह मानते रहे कि टूटा हुआ ट्रक भी पूरी तरह से निराश नहीं है, बिल्कुल मशीनी चीज़ भी टूटने के बाद चल देने को तैयार है, जो क्षुद्र है, नष्टप्राय है.

Mar 20, 2018, 10:43 AM IST

खेत चुप हैं, किसान खामोश..

यह लड़ाई महज़ किसानों के हक की नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व की लड़ाई है. 

Mar 13, 2018, 03:05 PM IST

श्रीदेवी को श्रद्धांजलि: मौत से बढ़कर कोई चालबाज नहीं

हीरोइन के नाम पर फिल्म लाने का चलन नहीं था लेकिन 1989 में पूरी समिति ने जिस फिल्म का चलाने का मन बनाया था, वो हीरोइन के नाम पर आ रही थी. फिल्म का नाम था चांदनी.

Feb 25, 2018, 01:26 PM IST

निर्जल नगरी सूखत जाए

हमने पानी को बरबाद जितनी तेजी से किया उसे सरंक्षित करने के लिए उतने कड़े कदम कभी नहीं उठाए. जो हाल कैपटाउन शहर का हो रहा है वो हाल भारत में भी बन रहे हैं. बैंगलूरू उन शहरों में से है जहां कभी भी डे ज़ीरो की स्थिति पैदा हो सकती है

Feb 24, 2018, 05:49 PM IST

ANALYSIS : राजस्‍थान उपचुनाव में इसलिए कांग्रेस ने बीजेपी को पछाड़ा

कांग्रेस के राजस्थान उपचुनाव में कांग्रेस के जीतने में संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ का एक बड़ा योगदान हो सकता है. 

Feb 1, 2018, 11:59 AM IST

Book Review : सुरों को साथ लिए घूमती बंजारन की गाथा 'सुर बंजारन'

भारत में नौटंकी की दो मुख्य शैली मानी जाती है हाथरस शैली और कानपुर शैली. नौटंकी का जन्मस्थल ही उत्तरप्रदेश माना गया है. हाथरस औऱ कानपुर उसके मुख्य केंद्र रहे थे. पंडित नथाराम गौड़ को स्वांग विधा का जनक भी माना जाता है. 

Jan 3, 2018, 11:30 AM IST