रेखा गर्ग

मुस्कान, परिवार नहीं ये धड़कने सिर्फ वतन के लिए

कहं छुपाकर रखते हैं वो इतना साहस कि हमें हमारी ही जिन्दगी बेमानी सी लगने लगती है. हम अपनी रोजमर्रा की जिन्दगी में असंख्य ऐसी बातों का सामना करते हैं जो निर्रथक होती है. जिनके बिना भी जिया जा सकता है. 

Mar 6, 2019, 02:08 PM IST

शहीदों की शहादत को शत-शत नमन

आतंकी जानवरों ने तमाम उम्मीदों को खत्म कर दिया. असंख्य घरों के चिरागों को बुझा दिया.

Feb 21, 2019, 11:10 AM IST

हमारे लिए देश सर्वोपरि है...

कहते हैं राजनीति का आईना बड़ा धुंधला होता है. वैसे तो राजनीति हमेशा से ही समझ से परे की बात रही है, लेकिन आज तो राजनीति की परिभाषा ही बदल गई है.

Jan 25, 2019, 01:52 PM IST

काश कि खुशियां सबके दामन में हों, वह दिन कब आएगा

हिन्दुस्तान की गरीबी दूर करने के लिए मतगणना, जनगणना व जातिगणना से ज्यादा जरुरी है रोजगार गणना.

Sep 6, 2018, 05:02 PM IST

केवल बेटियां ही नहीं बेटे भी संस्कार लेकर बड़े हों...

घर में प्रथम गुरु माता-पिता छोटी-छोटी बातों के लिए मोह और प्रेम के वशीभूत होकर जब अपनी संतान की गलतियों को नजरअन्दाज करेंगें तो समाज में अवरोध ही पैदा होंगे.

Jul 2, 2018, 03:50 PM IST

मायूसियों में दबी जिन्दगी

मैंने जल्दी से फ्रिज से ठंडी बोतल निकाली, गिलास लेकर आई और कहा सुनो भैया मुझे माफ करना मैंने गलत कह दिया था. भरी दोपहरी में सब्जी मत बेचा करो बिमार पड़ जाओगे.

Jun 4, 2018, 12:55 PM IST

'मायका बेटियों की विरासत है'

बेटियां तो विवाह के बाद भी दिल से जुड़ी होती हैं, एक साथ कई किरदार निभाने में कुशल होती हैं, विपरीत परिस्थिति में भी विचलित नहीं होती.

मई 22, 2018, 02:56 PM IST

आरक्षण का सहारा न लें, स्वावलंबी बनें

कर्म की प्रधानता होनी चाहिए उसी के हिसाब से मूल्यांकन होना चाहिए. जो सम्पन्न हैं जाति से दलित हैं. यदि वह भी आरक्षण चाहते हैं तो वे दलित ही रहेंगे. अपनी सोच से अपने विचारों से. ना जाने क्यों जब-जब आगे बढ़ना चाहते हैं तब-तब कमजोर जातिगत भावनाए भारत को आहत कर देती हैं.

Apr 12, 2018, 03:11 PM IST

महिला... शब्द भी जिसकी महिमा का वर्णन नहीं कर सकते

वाणी जिसकी गरिमा का वर्णन नहीं कर सकती, शब्द जिसकी महिमा को बांध नहीं सकते जिसका व्याख्यान सृष्टि का कण-कण करता है, जो अपने त्याग, बलिदान व्यक्त्तिव से घर-परिवार समाज को आलोकित कर रही है, वह नारी किसी एक दिन की अवधि में सिमट कर अपने अस्तित्व का आभास कराए यह विरोधाभास ही है.

Mar 6, 2018, 05:12 PM IST

माता-पिता के कांपते हाथों को ठुकराएं नहीं, उन्हें थामें

थाम लें उन कोमल, निरीह, कांपते हाथों को जिन्होंने तुम्हारे हौसलों को उड़ानें दी हैं, जिन्होंने तुम्हारी जिंदगी को दिशा दी है. अपने समय को भरपूर जी लेने वाले उन दीन-हीन माता-पिता की संतान कहलाने वाले, वक्त के हाथों मजबूर होते उन कमजोर माता-पिता के भाग्य की लकीरें बन जाओ.

Mar 3, 2018, 02:25 PM IST