jaun elia urdu poetry

"मैं जो हूं जौन एलिया हूं जनाब, इसका बेहद लिहाज़ कीजिएगा..."

उर्दू शायरी के चमिनस्तान में हज़ारों फूलों ने अपनी ख़ुशबू बिखेरी है. वक़्त तो गुज़रता गया और नए-नए फूल चमन को आबाद करते गए लेकिन कुछ ख़ुशबुओं का एहसास आज भी लोगों के दिलो-दिमाग़ पर छाया हुआ है. उन्हीं गुलों के हुजूम में एक फूल खिला जिसे दुनिया ने जौन एलिया के नाम से जाना और पहचाना. आज जौन एलिया का जन्मदिन है. इस खास मौके पर

Dec 14, 2020, 08:35 PM IST

Birthday Special: "ये है जब्र इत्तेफ़ाक़ नहीं, जौन होना कोई मज़ाक़ नहीं"

उनके कमरे की किताबें इनकार की तालीम देती थीं. इसी कमरे में बैठकर वो बग़ावत के जज़्बात को काग़ज़ पर उतार दिया करते थे.

Dec 14, 2020, 12:46 PM IST