munshi premchand

Premchand Birth Anniversary: यहां पढ़िए प्रेमचंद की वह कहानी जिसे उन्होंने सबसे पहले लिखा और प्रकाशित हुई

 PremChand Birth Anniversary: प्रेमचंद की बातें इसलिए, क्योंकि आज देश और हिंदी साहित्य उनकी जयंती मना रहा है. 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही में जन्में थे प्रेमचंद. बाबू अजायबराय जो कि डाकखाना कर्मी थे, अपने इस लाडले का नाम रखा धनपत. लेकिन नाम के अनुसार ऐसा कभी हुआ नहीं कि प्रेमचंद कभी धनपति बन सके हों, जीवन आर्थिक विपन्नताओं में ही गुजरा.

Jul 31, 2021, 11:18 AM IST

महान रचनाओं को फिर से जीवित करने में जुटा है ये शख्स! 1000 से ज्यादा कहानियों को कर चुके हैं ऑनलाइन

जो पढ़ नहीं सकते या फिर देख नहीं सकते या फिर हिंदी जानते नहीं लेकिन समझते है. वह सभी समाज सुधारक इनकी कहानियों से प्रेरणा ले सकते है.

Jun 18, 2021, 05:47 PM IST

Baikunth: में एक साथ मुंशी प्रेमचंद व भिखारी ठाकुर की कहानियों पर आधारित एक बेहतरीन फिल्म

उल्लेखनीय है कि भारत में हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि तमाम भारतीय भाषाओं में भी उम्दा साहित्यिक कृतियों पर फिल्में बनाने का चलन नहीं है. ऐसे में सराहनीय प्रयास हुआ है फिल्म 'बैकुंठ' (Baikunth) के रूप‌‌ में.

Mar 25, 2021, 09:41 PM IST

जब जामिया को बचाने के लिए भीख मांगने तक को तैयार हो गए थे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

रजवाड़े और पैसे वाले लोग, अंग्रेज़ी हुकूमत के डर से इसकी आर्थिक मदद करने से कतराते थे. इसके चलते 1925 के बाद से ही यह बड़ी आर्थिक तंगी में घिर गई.

Oct 29, 2020, 07:55 AM IST

आखिर किसके कहने पर मुंशी प्रेमचंद ने जामिया में रातभर जागकर लिखी थी 'कफन' कहानी

मुंशी प्रेमचंद अक्सर जामिया में आया करते थे. उनकी इसी लगाव की वजह से साल 2004 में जामिया में 'मुंशी प्रेमचंद अभिलेखागार और साहित्य केंद्र' की स्थापना की गई.

Oct 29, 2020, 07:49 AM IST

100 Years Of Jamia: देखिए जामिया की वो तस्वीरें जो शायद आपने पहले कभी न देखी हों

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वजूद में आई थी और इस यूनिवर्सिटी की स्थापना को अग्रेंजों की एजुकेशन पॉलिसी के खिलाफ बग़ावत माना गया था जो अपना औपनिवेशिक शासन चलाने के लिए सिर्फ 'बाबुओं' को बनाने तक सीमित थी.

Oct 29, 2020, 01:32 AM IST

AF के स्थापना दिवस से लेकर जेपी और मुंशी प्रेमचंद की याद दिलाती आज की तारीख

वर्ष 1932 में आज के दिन वायु सेना की स्थापना हुई थी. इसे ब्रिटिश वायुसेना की सहायक विंग के रूप में तैयार किया गया था. 1945 में दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इसे रॉएल इंडियन एयर फोर्स (Royal Indian Air Force) कहा जाने लगा था

Oct 8, 2020, 11:28 AM IST

DNA ANALYSIS: मुंशी प्रेमचंद के ‘खजाने’ का विश्लेषण

मुंशी प्रेम चंद के साहित्य को समय की सीमा में नहीं बांधा जा सकता. उनका जीवन और साहित्य आज भी उतना ही प्नासंगिक है, जितना पहले था.

Aug 1, 2020, 12:09 AM IST

DNA: मुंशी प्रेमचंद के ‘खजाने’ का विश्लेषण

DNA के इस भाग में हम मुंशी प्रेमचंद के ‘खजाने’ का विश्लेषण करेंगे.

Aug 1, 2020, 12:00 AM IST

साहित्य जगत में इनसे महान कोई नहीं, आज है प्रेमचंद की पुण्यतिथि

'कथा सम्राट' के नाम से प्रसिद्ध मुंशी प्रेमचंद की आज पुण्यतिथि है. आज ही के दिन यानी 8 अक्टूबर को सन् 1936 में यानी आजादी मिलने से 11 साल पहले ही उनका देहांत हो गया था. आईए एक नजर डालते हैं मुंशी प्रेमचंद के जीवन पर, जिनके नाम से हिंदुस्तान का बच्चा बच्चा वाकिफ है.

Oct 8, 2019, 01:53 PM IST

ZEE जानकारी: कालजयी साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के जीवन और लेखन से जुड़ी खास बातें

मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी में हुआ था . मुंशी प्रेमचंद का असली नाम... धनपत राय श्रीवास्तव था . 

Jul 31, 2019, 11:09 PM IST

' उपन्यास सम्राट ' प्रेमचंद का DNA टेस्ट.

'उपन्यास सम्राट ' प्रेमचंद का DNA टेस्ट...ज्यादा जानने के लिए देखें वीडियो..

Jul 31, 2019, 10:45 PM IST

जयंती विशेष : जब मुंशी प्रेमचंद ने अपनी बेटी के लिए 135 रुपए में खरीदी थी हीरे की लौंग

प्रेमचंद की शादी के बाद पिता ने भी दूसरी शादी कर ली. घर में सौतेली मां उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करती थी. एक पिता ही अपने बचे थे, लेकिन जल्द ही वे भी उनका साथ छोड़कर इस दुनिया को अलविदा कह गए. 

Jul 31, 2019, 09:39 AM IST

प्रेमचंद: वे केवल लेखक नहीं एक सांस्कृतिक मशाल थे...

हमें इस बात पर गर्व करना चाहिए कि प्रेमचंद केवल हिंदी और हिंदुस्तान के ही महान लेखक नहीं हैं. उर्दू भाषी पाकिस्तान के भी हैं. आखिर वे कौन-से कारण हैं कि राष्ट्रीय राजनीति में एक-दूसरे से त्रस्त देशों में प्रेमचंद उसी तरह स्वीकृत और मान्य हैं जिस तरह मीर-ग़ालिब और फैज या फिर मंटो.

Jul 31, 2018, 12:56 PM IST

प्रेमचंद जयंती: क्या कहती हैं प्रेमचंद की कहानियां- डर और अपमान भरे जीवन से 'इस्तीफा'

इस्तीफा एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसका जीवन घर से दफ्तर तक सीमित है. लेकिन जब वह बड़े ऑफिसर के हाथों अपमानित होता है तो उसका स्वाभिमान जाग जाता है. 

Jul 31, 2018, 10:50 AM IST

प्रेमचंद जयंती: क्या कहती हैं प्रेमचंद की कहानियां- गांधी जी के आदर्शों को समझाता 'जुलूस'

अपने साहित्यिक महत्व के साथ ही जुलूस कहानी की तासीर यह है कि सिर्फ इस एक कहानी को पढ़कर आज की पीढ़ी महात्मा गांधी के नेतृत्व में लड़े गए आजादी के आंदोलन को संपूर्णता में समझ सकती है.

Jul 31, 2018, 10:49 AM IST

प्रेमचंद जयंती : गुमनामी में निकली अंतिम यात्रा, लोग बोले- कोई मास्टर था, मर गया

प्रेमचंद की आर्थिक स्थिति का जिक्र होते ही हरिशंकर परसाई का लेख 'प्रेमचंद के फटे जूते' याद आता है. ये लेख प्रेमचंद के एक चित्र पर आधारित है, जिसमें उनके जूते फटे हुए हैं.

Jul 31, 2018, 10:42 AM IST

प्रेमचंद जयंती: 'कम्बख्त प्रेमचंद का कोई प्रेम प्रसंग भी था'

शरीर त्यागने से पहले अपनी पत्नी शिवरानी देवी से क्षमायाचना करते हुए प्रेमचंद ने कहा कि वो ईमानदारी के साथ मरना चाहते हैं और उन्होंने अपनी एक प्रेमिका होने की बात स्वीकार की.

Jul 31, 2018, 10:22 AM IST

प्रेमचंद पुण्यतिथि : 'जो गाय के पीछे जान देते हैं, वही अपने मां-बाप को रोटियां नहीं दे सकते'

प्रेमचंद गोरक्षा के लिए हिंसा का समर्थन नहीं करते थे, लेकिन एक मौके पर वह गाय की रक्षा के लिए अपनी जान देने के लिए तैयार हो गए थे. वो गोरक्षा के लिए जान लेने में नहीं, बल्कि जान देने में यकीन रखते थे.

Jul 31, 2018, 10:10 AM IST

प्रेमचंद जयंती: क्या कहती हैं प्रेमचंद की कहानियां- अन्याय और शोषण का 'अंधेर'

यह कहानी 1913 में पहली बार प्रकाशित हुई. इसमें ग्रामीण समाज में फैली अशिक्षा और इस अशिक्षा पर फलने-फूलने वाले सरकारी तंत्र का मार्मिक वर्णन है.

Jul 31, 2018, 08:11 AM IST