ZEE Jankari: इस बजट में आंकड़ों और योजनाओं के साथ वोट ही वोट भरे हैं...

इस बजट में भारत के 91 करोड़ वोटर्स में से 57 करोड़ वोटर्स को सीधे लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है. यानी इस बजट को तैयार करते वक़्त बहुत सारी राजनीतिक गणनाएं की गई हैं. इस बजट में किसान, गरीब, कामगार, मज़दूर और मध्यम वर्ग सभी का ख्याल रखा गया है.

ZEE Jankari: इस बजट में आंकड़ों और योजनाओं के साथ वोट ही वोट भरे हैं...

आज DNA का बजट विशेषांक है. लोकसभा चुनावों में अब सिर्फ 2 महीने का वक्त बचा है. ऐसे में उम्मीद थी कि आज का बजट लोक लुभावन होगा, जिसमें सरकार, चुनावों को ध्यान में रखते हुए कुछ बड़े ऐलान करेगी और ऐसा ही हुआ. आज का बजट वोटों वाला बजट है और इसमें आंकड़ों और योजनाओं के साथ साथ वोट ही वोट भरे हुए हैं. इस बजट में भारत के 91 करोड़ वोटर्स में से 57 करोड़ वोटर्स को सीधे लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है. यानी इस बजट को तैयार करते वक़्त बहुत सारी राजनीतिक गणनाएं की गई हैं. इस बजट में किसान, गरीब, कामगार, मज़दूर और मध्यम वर्ग सभी का ख्याल रखा गया है.

आप ये भी कह सकते हैं कि चुनाव से पहले सत्ता के आखिरी ओवर में नरेंद्र मोदी ने 6 छक्के मारे हैं. इस गणित से बीजेपी को किस तरह का चुनावी मुनाफा हो सकता है? और इसका राजनीतिक प्रभाव क्या होगा? इसका हम विश्लेषण करेंगे. आज आप अपनी और देश की जेब का पूरा हिसाब-किताब देख पाएंगे, लेकिन सबसे पहले आपको ये समझाते हैं, कि बजट का फोकस क्या था?

किसी बजट के संदेश को समझने का सबसे आसान तरीका ये है...कि बजट के भाषण में इस्तेमाल हुए शब्दों का विश्लेषण किया जाए और ये जानने की कोशिश की जाए कि कौन से शब्द कितनी बार प्रयोग किए गए? आज का बजट अंतरिम बजट था, क्योंकि लोकसभा चुनाव होने वाले हैं. और पूर्ण बजट तभी पेश किया जाएगा जब देश में नई सरकार बनेगी, इसलिए ये बजट, पूर्ण बजट के मुकाबले छोटा था. लेकिन पीयूष गोयल का भाषण 1 घंटा 41 मिनट लंबा था, क्योंकि वो बजट के भाषण को पढ़ने के साथ साथ उसे हिंदी में समझाते भी जा रहे थे.
 
आज के बजट में सबसे ज्यादा Focus किसानों पर था. बजट भाषण में वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कुल 24 बार Farmers यानी किसान शब्द का इस्तेमाल किया.

Poor यानी गरीब शब्द का इस्तेमाल 15 बार किया गया.

Middle Class यानी मध्यम वर्ग का इस्तेमाल 13 बार, Employment शब्द का ज़िक्र 12 बार और
Labour यानी मज़दूर शब्द 7 बार इस्तेमाल किया गया.

यानी सरकार ने अपने बजट में किसानों और गरीबों के साथ साथ Middle Class पर भी Focus किया है. इन तीनों वर्गों को सरकार ने क्या दिया, अब ये जान लीजिए. 5 एकड़ तक की ज़मीन वाले किसान परिवारों को हर साल, सरकार की तरफ से 6 हज़ार रुपये की मदद मिलेगी. पूरे देश में ऐसे 12 करोड़ किसान परिवार हैं.

इसी तरह सरकार, प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना के तहत देश के मज़दूरों और कामगारों को 60 साल की उम्र के बाद 3 हज़ार रुपये प्रति महीने की पेंशन देगी. इस योजना का प्रभाव 42 करोड़ लोगों पर पड़ेगा.

मोदी सरकार ने मध्य वर्ग की नाराज़गी दूर करके.. उसे राहत देने की कोशिश की है. अब 5 लाख रुपये तक की Taxable Income पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. इससे टैक्स देने वाले करीब 7 करोड़ लोगों में से 3 करोड़ लोगों को फायदा होगा. ये वो बड़ी बाते हैं, जो आप दोपहर से देख और सुन रहे हैं. लेकिन अभी तक आपको किसी ने ये नहीं बताया होगा कि इस बजट से बीजेपी को किस तरह का राजनीतिक लाभ हो सकता है. इसे समझना आपके लिए बहुत ज़रूरी है.

भारत में कुल 91 करोड़ Voters हैं और आज सरकार ने इन 91 करोड़ में से सीधे 57 करोड़ लोगों को साध लिया है. सरकार ने 12 करोड़ किसान परिवारों की आर्थिक मदद करने का ऐलान किया है. इसी तरह 42 करोड़ कामगारों और मजदूरों को सरकार ने पेंशन देने का ऐलान किया है और 3 करोड़ टैक्सपेयर्स को भी सरकार ने इनकम टैक्स में छूट दी है.

इस तरह से कुल 57 करोड़ वोटर्स को सरकार ने इस बजट के ज़रिए साधने की कोशिश की है. भारत गांवों का देश है और देश की 68% जनसंख्या गांवों में रहती है. ऐसे में अगर गांवों में रहने वाले इन 68% लोगों के वोट सुरक्षित कर लिए जाएं, तो इससे चुनावों में फायदा हो सकता है.

भारत में लोकसभा की 543 सीटें ऐसी हैं जिन पर चुनाव लड़े जाते हैं. इनमें से 435 सीटें ऐसी हैं, जहां ग्रामीण लोगों की संख्या 50 फीसदी से ज़्यादा है और 290 सीटें ऐसी हैं जहां ग्रामीण लोगों की संख्या 75 फीसदी या उससे ज़्यादा है. इन आंकड़ों से ये पता चलता है कि चुनावों में सफल होने का फॉर्मूला.. शहरों में नहीं.. बल्कि गांवों में है. इन सारी योजनाओं के बारे में हम आपको आगे विस्तार से बताएंगे, लेकिन पहले ये देखिए कि कैसे नरेन्द्र मोदी की सरकार ने इस बजट से चुनावी Sixer मारा है.

भारत के प्रसिद्ध धर्म ग्रंथ भगवत गीता में मनुष्य को ये शिक्षा दी गई है कि वो सुख या दुख... हर परिस्थिति में एक समान रहे, लेकिन आज की राजनीति में ऐसा होना लगभग असंभव है. विपक्ष आज लोकसभा में काफी निराश और मायूस नज़र आ रहा था. खास तौर पर कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के चेहरे पर उदासी छाई हुई थी. एक तरफ केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल बजट भाषण पढ़ रहे थे. सत्ता पक्ष के सांसद, मेज थपथपा कर बजट की घोषणाओं का स्वागत कर रहे थे और दूसरी तरफ विपक्ष में सन्नाटा छाया हुआ था.

आज की इन परिस्थितियों में कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी का एक पुराना भाषण बहुत प्रासंगिक है. वर्ष 2016 में राहुल गांधी ने इसी लोकसभा में सत्ता पक्ष के सांसदों को 'ठोको ताली' वाला Challenge दिया था. राहुल गांधी ने सत्ता पक्ष से कहा था कि 'अगर आपको मेरी बात अच्छी लग रही है तो तालियां बजा दीजिए.'

आज बजट पेश होने के दौरान जब भी पीयूष गोयल जनता को लाभ पहुंचाने वाली कोई घोषणा कर रहे थे. उस वक़्त सत्ता पक्ष की तरफ से तालियां बज रही थीं. लेकिन राहुल गांधी बहुत गुमसुम थे.

आज लोकसभा में एक और दिलचस्प तस्वीर दिखाई दी. जब बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने अंतरिम बजट के दौरान How Is The Josh वाली गूगली फेंक दी. दरअसल वित्त मंत्री पीयूष गोयल अपने भाषण के दौरान फिल्म इंडस्ट्री के लिए किए गए प्रावधानों का ज़िक्र कर रहे थे. ठीक उसी वक्त पीयूष गोयल के बगल में बैठे लालकृष्ण आडवाणी ने उनका हाथ पकड़ लिया और सर्जिकल स्ट्राइक पर आधारित फिल्म उरी की याद दिलाई. जिसके बाद पीयूष गोयल ने ना सिर्फ इस फिल्म का ज़िक्र किया. बल्कि सदन के अंदर How Is The Josh वाली नारेबाज़ी भी होने लगी.

अब हम विस्तार से आपको ये बताते हैं कि नौकरी पेशा मध्यम वर्गीय लोगों को इस बजट से क्या मिला? आज बजट के भाषण के बाद इनकम टैक्स में हुए बदलावों पर बहुत ज्यादा Confusion रहा. इसलिए इस भ्रम को दूर करना ज़रूरी है.

सबसे पहले तो आप ये समझिए कि मौजूदा Income Tax Slab में कोई बदलाव नहीं हुआ है. Income Tax Slab वही है, जो पहले था. 2.5 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है. 2.5 लाख से 5 लाख रुपये की आय पर 5% टैक्स है.

5 लाख से 10 लाख रुपये की आय पर 20% टैक्स
और 10 लाख रुपये से ज़्यादा की आय 30% टैक्स है.

आप सोच रहे होंगे कि फिर बदलाव कहां पर हुआ है? और आपको लाभ कैसे होगा? इसे भी समझिए.
नया बदलाव ये है कि 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक की आय पर, जो 5% टैक्स लगता है. वो टैक्स भी आपको नहीं देना पड़ेगा. ढाई लाख से 5 लाख रुपये की आमदनी का 5% टैक्स... 12 हज़ार 500 रुपये बनता था, लेकिन सरकार ने Income Tax Act की धारा 87-A में बदलाव करके इस 12 हज़ार 500 रुपये पर छूट दे दी है. पहले इस प्रावधान में छूट की सीमा ढाई हज़ार रुपये थी, जिसे आज बढ़ाकर 12500 रुपये कर दिया गया.

यानी 5 लाख रुपये की आमदनी पर कोई टैक्स नहीं होगा, लेकिन इसके ऊपर अगर आप बचत करते हैं, तो आप अपना और ज्यादा टैक्स बचा सकते हैं.

अब ये कैसे होगा, आपको ये उदाहरण के साथ समझाते हैं. 5 लाख रुपये की आय के ऊपर आप इनकम टैक्स की धारा 80-C के तहत डेढ़ लाख रुपये निवेश करके बचा सकते हैं. इसके अलावा आपकी आय पर सरकार ने Standard Deduction 40 हज़ार रुपये से बढ़ाकर 50 हज़ार रुपये कर दिया है. अगर आपने होम लोन लिया हुआ है तो आपको होम लोन के ब्याज पर अधिकतम 2 लाख रुपये तक की छूट मिल सकती है. इसके अलावा आप NPS यानी National Pension Scheme में 50 हज़ार रुपये का निवेश कर सकते हैं. आप इनकम टैक्स की धारा 80-D के तहत अपने परिवार और माता पिता के Medical Insurance के Premium पर अधिकतम 75 हज़ार रुपये तक की छूट ले सकते हैं. और इसके अलावा आपको बैंक में बचत और Fixed Deposit के ब्याज पर 10 हज़ार रुपये की छूट भी मिलेगी.

तो इस तरह से आपको 10 लाख 35 हज़ार रुपये की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा. ये बचत HRA और आपकी कंपनी की तरफ से टैक्स बचाने वाली सुविधाओं के ज़रिए और भी बढ़ सकती है. लेकिन इस बार के बजट में पेंच ये है कि अगर आपकी Taxable Income पांच लाख रुपये से एक रुपये भी ज्यादा हुई तो आपके ऊपर पुराना Tax Slab ही लागू हो जाएगा और Income Tax Act की धारा 87-A में के तहत 12 हज़ार 500 रुपये की छूट नहीं मिलेगी.

सरकार का अनुमान है कि इस फैसले से करीब 3 करोड़ मध्यम वर्गीय करदाताओं को इनकम टैक्स में पूरी तरह से छूट मिल जाएगी, लेकिन इससे सरकार के ऊपर हर साल कम से कम साढ़े 18 हज़ार करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बजट के लिए वित्त मंत्री पीयूष गोयल की तारीफ की है. प्रधानमंत्री ने कहा कि ये बजट चुनाव के बाद भारत को समृद्धि की तरफ लेकर जाने वाले बजट का ट्रेलर है, जबकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अंतरिम बजट को सबकी उम्मीदें पूरी करने वाला बताया है. अमित शाह ने कहा कि सरकार किसानों और मजदूरों के प्रति संवेदनशील है... ये बजट किसानों का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है. हालांकि कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष इसे चुनावी बजट बता रहा है.