वो 8 मिनट जिसने US को किया शर्मसार; लोग देखते रहे, चलती ट्रेन में होता रहा रेप
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वो 8 मिनट जिसने US को किया शर्मसार; लोग देखते रहे, चलती ट्रेन में होता रहा रेप

जो देश खुद को दुनिया की सुपर पॉवर बताते हैं, खुद को महिलाओं के प्रति उदार और चैम्पियन बताते हैं, वो असल में चैम्पियन नहीं हैं. वहां भी कमियां हैं और वहां भी ऐसे लोग हैं जो ऐसी भयानक घटनाओं पर कायर बने रहते हैं.

वो 8 मिनट जिसने US को किया शर्मसार; लोग देखते रहे, चलती ट्रेन में होता रहा रेप

पॉडकास्ट सुनें: 

नई दिल्ली: अमेरिका के फिलाडेल्फिया (Philadelphia US) शहर में ऐसी घटना हुई जो पश्चिमी देशों के समाज, वहां की कानून व्यवस्था और वहां महिलाओं को मिलने वाले अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. फिलाडेल्फिया में 13 अक्टूबर को एक महिला रात करीब 10 बजे अपने घर जाने के लिए एक ट्रेन में सवार हुई थी. इस ट्रेन में और भी बहुत सारे लोग थे लेकिन 35 साल का एक व्यक्ति अचानक से इस महिला के साथ वाली सीट पर आकर बैठ गया. कुछ देर तक उसने इस महिला को परेशान किया लेकिन जब वो बात करने के लिए तैयार नहीं हुई तो इस व्यक्ति ने उसके साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दीं और इसके बाद 8 मिनट तक चलती ट्रेन में इस महिला के साथ रेप की घटना हुई.

मदद की लगाती रही गुहार

इस वारदात के समय ट्रेन में काफी लोग मौजूद थे, जो ये सब होते हुए देख रहे थे लेकिन किसी ने भी उस व्यक्ति को रोकने की कोशिश नहीं की. सोचिए 8 मिनट तक एक महिला चलती ट्रेन में मदद के लिए चीखती चिल्लाती रही, लोगों से ये कहती रही कि वो पुलिस बुलाने में उसकी मदद करें. उसने मदद के लिए लोगों के सामने हाथ भी जोड़े, लेकिन इसके बावजूद इन लोगों ने कुछ नहीं किया. इससे बड़ी कायरता क्या हो सकती है?

सर्वे से हकीकत अलग 

कुछ साल पहले अमेरिका में एक सर्वे हुआ था, जिसमें लोगों से ये पूछा गया था कि अगर उनके सामने किसी महिला के साथ छेड़छाड़ होती है या उसके साथ बलात्कार जैसी कोई भयानक घटना होती है तो उनकी पहली प्रतिक्रिया क्या होगी? अमेरिका के ज्यादातर लोगों का कहना था कि ऐसी स्थिति में अपराध को रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ उनकी होगी. इसलिए वो सबसे पहले उस महिला को बचाएंगे. इस सर्वे का सार ये था कि अमेरिका के लोग दूसरे देशों की तुलना में ज्यादा जागरूक, ज्यादा जिम्मेदार और ज्यादा सजग हैं. हालांकि ये इस तरह का कोई इकलौता सर्वे नहीं था. पश्चिमी देशों में इस तरह के हजारों सर्वे और रिपोर्ट्स आपको मिल जाएंगी, जो ये बताती हैं कि वहां के लोग और वहां का समाज ऐसे सभी मामलों में चैम्पियन है, लेकिन ये सच नहीं है.

क्राइम होते देखने वालों का क्या होगा?

फिलाडेल्फिया की पुलिस ने इस मामले में बलात्कार के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और पुलिस को उसके खिलाफ कुछ गवाह भी मिल गए हैं. इसकी पूरी सम्भावना है कि जल्द इस आरोपी को कड़ी सजा हो जाएगी लेकिन सवाल ये उठता है कि उन लोगों का क्या होगा, जो इस घटना को चुपचाप देखते रहे? आपने मिट्टी की मूर्तियां देखी होंगी. मूर्तियों में इंसानों की परछाई तो दिखती है लेकिन उनमें संवेदनाएं नहीं होती. उनमें खून नहीं होता और वो प्रतिक्रिया नहीं दे सकती और हमें लगता है कि इस ट्रेन में बैठे लोग भी इंसान नहीं मूर्तियों के जैसे ही थे, जो कायरों की तरह अपनी सीटों पर जमे रहे. हालांकि वहां की पुलिस ने कहा है कि वो ऐसे लोगों पर केस दर्ज करने के बारे में विचार कर रही है, जिन्होंने पीड़ित की मदद नहीं की.

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पश्चिमी देशों की छवि और असलियत में अंतर

हैरानी की बात ये है कि अगर इनमें से एक भी व्यक्ति हेल्प लाइन नंबर 911 पर डायल कर देता तो इस महिला के साथ ये घटना होती ही नहीं. यानी इन लोगों को अपने मोबाइल फोन से सिर्फ 3 नम्बर डायल करने थे लेकिन किसी ने भी ऐसा नहीं किया. बल्कि कुछ लोग तो अपने मोबाइल फोन से पीड़ित की तस्वीरें और वीडियो बना रहे थे. भारत में जब महिलाओं के साथ कोई अपराध होता है तो अक्सर लोग कहते हैं कि अमेरिका को देखो, या ब्रिटेन को देखो. आप ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि आपको लगता है कि पश्चिमी देशों में महिलाओं के पास ज्यादा अधिकार हैं, उनके खिलाफ अपराध नहीं होते और वो पूरी तरह आजाद हैं, जबकि ऐसा नहीं है.

स्वीडन की अमेरिका से भी हालत खराब

अमेरिका की कुल आबादी लगभग 33 करोड़ है, लेकिन वर्ष 2019 में वहां बलात्कार की 1 लाख 43 हजार घटनाएं हुई थीं. यानी प्रति एक लाख लोगों पर लगभग 43 रेप की घटनाएं दर्ज हुईं. एक और पश्चिमी देश है स्वीडन, जो ये कहता है कि वो दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जिसने पुरुषों और महिलाओं के बीच भेदभाव को पूरी तरह खत्म कर दिया है लेकिन सच्चाई ये है कि स्वीडन में अमेरिका से भी ज्यादा प्रति एक लाख लोगों पर बलात्कार के 85 मामले दर्ज होते हैं. जबकि 135 करोड़ की आबादी वाले भारत में वर्ष 2019 में बलात्कार की 32 हजार घटनाएं हुई थीं, यानी प्रति एक लाख लोगों पर रेप के लगभग 2 मामले दर्ज हुए थे.

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