ये हैं दुनिया के 10 सबसे कठिन एग्जाम, जिन्हें पास करना हर किसी के बस की बात नहीं

परीक्षा देना यूं तो हमेशा से ही कठिन रहा है, लेकिन हम आपको कुछ ऐसे एग्जाम के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें पास करना एवरेस्ट चढ़ने जितना मुश्किल काम है.  तो आइये नजर डालते हैं, दुनिया की सबसे कठिन समझी जाने वालीं 10 परीक्षाओं पर:

ये हैं दुनिया के 10 सबसे कठिन एग्जाम, जिन्हें पास करना हर किसी के बस की बात नहीं
फोटो: ज़ी न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली: परीक्षा देना यूं तो हमेशा से ही कठिन रहा है, लेकिन हम आपको कुछ ऐसे एग्जाम के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें पास करना एवरेस्ट चढ़ने जितना मुश्किल काम है. तो आइये नजर डालते हैं, दुनिया की सबसे कठिन समझी जाने वालीं 10 परीक्षाओं पर:

 

1. मास्टर सोमेलियर डिप्लोमा एग्जाम (Master Sommelier Diploma Exam)
इस परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है. यह एग्जाम विशेषज्ञ वाइन निर्माता (Wnemakers) बनने के लिए होता है और इसे तीन भागों में बांटा जाता है. पहला थ्योरी, दूसरा सर्विस और तीसरा है ब्लाइंड टेस्टिंग. ब्लाइंड टेस्टिंग के दौरान छात्रों को यह बताना होता है कि संबंधित वाइन किस वर्ष और कहां बनी थी. अधिकांश छात्र इसी चरण में फेल हो जाते हैं. यह परीक्षा कितनी कठिन है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 40 वर्षों में केवल 229 लोग ही इसे क्रैक कर पाए हैं.

2. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
भारत में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) विभिन्न सरकारी नौकरियों की भर्ती के लिए हर साल इस परीक्षा का आयोजन करता है.यह परीक्षा तीन चरणों में होती पहला चरण प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम), दूसरा चरण मुख्य परीक्षा (मेन) और तीसरे चरण में साक्षात्कार होता है. यूपीएससी में हर साल लाखों लोग भाग लेते हैं, लेकिन पास होने वालों का प्रतिशत बहुत कम है. लाखों उम्मीदवारों में से केवल 0.1 से 0.4 प्रतिशत ही इस एग्जाम को क्रैक कर पाते हैं.

3. गौका (Gaokao)
गौका चीन में एक अनिवार्य परीक्षा है, जिसमें उच्च शिक्षा की चाह रखने वाले प्रत्येक स्टूडेंट को शामिल होना होता है. परीक्षा दो दिनों में 9 घंटे से ज्यादा समय तक आयोजित की जाती है. एग्जाम देने वालों में से केवल 0.2 प्रतिशत ही इतने अंक हासिल कर पाते हैं कि उन्हें देश के शीर्ष कॉलेजों में प्रवेश मिल सके.    

4. जेईई एडवांस
जेईई एडवांस (जिसे पहले IIT-JEE के नाम से जाना जाता था) भारत में आयोजित होने वाली इंजीनियरिंग कॉलेज प्रवेश परीक्षा है. IIT में पढ़ने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए इसे क्रैक करना अनिवार्य है. परीक्षा में तीन-तीन घंटे के दो ऑब्जेक्टिव टाइप के पेपर होते हैं. लाखों की संख्या में छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन मुश्किल से कुछ हजार ही पास हो पाते हैं. 

5. ऑल सोल्स प्राइज फेलोशिप एग्जाम
यह फैलोशिप परीक्षा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित की जाती है. परीक्षा में तीन -तीन घंटे के चार पेपर होते हैं. हर साल केवल दो सदस्यों का चयन किया जाता है। 2010 तक की व्यवस्था के अनुसार, परीक्षा में शामिल होने वालों को दिए गए एक शब्द पर लंबा निबंध लिखना होता था.

# 6 चार्टर्ड अकाउंट (CA)
CA भारत के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान द्वारा आयोजित तीन-स्तरीय परीक्षा है. स्टूडेंट कई बार इस परीक्षा में भाग लेते हैं, क्योंकि एक बार में इसे पास करना बेहद मुश्किल है. हालांकि, बार-बार प्रयास करने के बावजूद केवल 10 प्रतिशत अभ्यर्थी ही उत्तीर्ण होते हैं.

7. चार्टर्ड वित्तीय विश्लेषक (Chartered Financial Analyst)
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, यह दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है. 20 प्रतिशत से कम अभ्यर्थी ही इसे पास कर पाते हैं, वो भी बार-बार प्रयास करने के बाद. एक औसत स्टूडेंट कम से कम चार बार में एग्जाम क्रैक कर पाता है. 

8. मेन्सा (Mensa)
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए कोई आयु सीमा नहीं है. हालांकि, मेन्सा सोसाइटी का सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 98 % अंक हासिल करने होते हैं. यह दुनिया की सबसे पुरानी IQ सोसाइटी है. प्रत्येक देश की अपनी मेन्सा सोसाइटी होती है.

9. भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (Indian Engineering Services)
यह भारत में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित चार-चरण वाली प्रतियोगी परीक्षा है. UPSC  भारत सरकार की प्रबंधकीय और तकनीकी सेवाओं के लिए IES की भर्ती करता है. इसमें छह टेस्ट होते हैं. हर साल, सैकड़ों हजारों इंजीनियर इस परीक्षा में बैठते हैं लेकिन केवल कुछ ही इसे क्रैक कर पाते हैं.

10. सिस्को प्रमाणित इंटर्न नेटवर्किंग विशेषज्ञ (Cisco Certified Internetworking Expert)
नेटवर्किंग चैंपियन सिस्को नेटवर्क इंजीनियरों की भर्ती के लिए इस परीक्षा का आयोजन करती है. इस परीक्षा में उम्मीदवार की विभिन्न क्षमताओं का आकलन किया जाता है. एग्जाम को दो चरणों के तहत छह भागों में विभाजित किया गया है. जिसमें प्रैक्टिकल फेज आठ घंटे का होता है. सिस्को का दावा है कि दुनिया भर में 1 प्रतिशत से कम नेटवर्क इंजीनियर यह सर्टिफिकेशन प्राप्त कर पाते हैं.