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अमेरिका की कंबोडिया को चेतावनी, विपक्षी दल पर लगाया गया प्रतिबंध वापस लें

व्हाइट हाउस ने चेतावनी दी कि अमेरिका वर्ष 2018 के मतदान कराने को लेकर कंबोडिया की राष्ट्रीय निर्वाचन समिति को ‘‘समर्थन देना बंद’’ कर देगा.

अमेरिका की कंबोडिया को चेतावनी, विपक्षी दल पर लगाया गया प्रतिबंध वापस लें

वॉशिंगटन: अमेरिका ने कंबोडिया से देश की मुख्य विपक्षी पार्टी पर लगाए गए प्रतिबंध को वापस लेने की अपील करते हुए चेताया है कि पार्टी को भंग करने से वर्ष 2018 के चुनावों की वैधता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं. अमेरिका ने शुक्रवार (17 नवंबर) को कहा कि नोम पेन्ह की सुप्रीम कोर्ट द्वारा संकटग्रस्त कंबोडिया नेशनल रेस्क्यू पार्टी (सीएनआरपी) को बड़ा झटका दिए जाने के बाद आगामी चुनाव ‘‘वैध, स्वतंत्र या निष्पक्ष’’ नहीं होंगे. इन चुनावों में तीन दशक से सत्ता पर काबिज कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन लगभग निर्विरोध चुने जाएंगे.

व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा, ‘‘हम कंबोडिया की सरकार से अपील करते हैं कि वह सीएनआरपी के खिलाफ अपनी हालिया कार्रवाई को वापस ले, सीएनआरपी के कैद किए गए नेता केम सोखा को रिहा करे और विपक्षी दलों, नागरिक समाज एवं मीडिया को अपनी वैध गतिविधियां जारी रखने की अनुमति दे.’’ कंबोडिया की अदालत ने गुरुवार (16 नवंबर) को सीएनआरपी को भंग करके उसके 100 से अधिक नेताओं को प्रतिबंधित कर दिया था.

न्यायाधीश ने कहा था कि पार्टी ने सुनवाई का बहिष्कार करके सरकार के इन आरोपों को कबूल लिया है कि उसने एक क्रांति का षड़यंत्र रचने के लिए अमेरिका और अन्य विदेशी तत्वों के साथ मिलकर साजिश किया. हालांकि, वॉशिंगटन ने इन आरोपों को ‘‘आधारहीन और राजनीति से प्रेरित’’ बताया है.

व्हाइट हाउस ने चेतावनी दी कि अमेरिका वर्ष 2018 के मतदान कराने को लेकर कंबोडिया की राष्ट्रीय निर्वाचन समिति को ‘‘समर्थन देना बंद’’ कर देगा. इस बीच ‘एपी’ की खबर के अनुसार कंबोडिया के विपक्षी दल के निर्वासित नेता सैम रैनसी ने कहा कि विपक्षी पार्टी को भंग करने के अदालत के आदेश के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हुन सेन की सरकार के साथ संबंध समाप्त कर लेने चाहिए.

रैनसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने लोकतंत्र की समाप्ति की घोषणा कर दी है और दक्षिणपूर्वी एशियाई देश में 1991 शांति समझौते को प्रायोजित करने वाली विश्व की ताकतों के सामने विश्वसनीयता की परीक्षा खड़ी कर दी है. उन्होंने सरकारों से प्रधानमंत्री की मान्यता समाप्त करने और ‘‘हुन सेन शासन को अवैध करार देने’’ की अपील की.

(इनपुट एजेंसी से भी)