बस कुछ ही समय और फिर लुप्त हो जाएंगे बदरीनाथ-केदारनाथ, इस मंदिर में दर्ज है भविष्यवाणी

बदरीनाथ-केदारनाथ से जुड़ा एक आश्चर्यजनक सत्य है कि महादेव शिव और श्रीहरि के यह पवित्र धाम बहुत अधिक दिनों तक दर्शन के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे. यह भविष्यवाणी केदारनाथ से कुछ दूर स्थित भगवान विष्णु के एक अवतारी मंदिर की है.

Written by - Vikas Porwal | Last Updated : May 16, 2021, 09:36 AM IST
  • जोशीमठ में स्थित है भगवान नृसिंह का प्राचीन मंदिर
  • प्रतिमा की पतली हो रही भुजा से जुड़ी भविष्यवाणी
बस कुछ ही समय और फिर लुप्त हो जाएंगे बदरीनाथ-केदारनाथ, इस मंदिर में दर्ज है भविष्यवाणी

नई दिल्लीः Corona संकट के बीच चार धामों के कपाट खुलने लगे हैं. यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुल गए हैं और अब एक-एक करके भगवान बदरी विशाल और केदार धाम के कपाट भी खुलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. हालांकि इस बार श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति नहीं है. चारों धामों की यात्रा सहज होने के बाद हर साल श्रद्धालुओं की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन बहुत से लोग इन पवित्र धामों से जुड़ा एक सच और एक भविष्य वाणी नहीं जानते हैं. 

नहीं होंगे केदारनाथ-बदरीनाथ के दर्शन
दरअसल, बदरीनाथ-केदारनाथ से जुड़ा एक आश्चर्यजनक सत्य है कि महादेव शिव और श्रीहरि के यह पवित्र धाम बहुत अधिक दिनों तक दर्शन के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे. यह भविष्यवाणी केदारनाथ से कुछ दूर स्थित भगवान विष्णु के एक अवतारी मंदिर की है.

यह है भगवान नृसिंह का मंदिर, जो कि श्रीहरि का चौथा अवतार है. अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए श्रीहरि ने सतयुग के अंत में हिरण्यकशिपु के वध के लिए लिया था. 

जोशीमठ में है नृसिंह मंदिर
देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जिले के ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) क्षेत्र में स्थित है यह नृसिंह मंदिर. सप्त बद्री में से एक होने के कारण इस मंदिर को नारसिंघ बद्री या नरसिम्हा बद्री भी कहा जाता है. नरसिंह मंदिर के बारे में यह माना जाता है कि यह मंदिर, संत बद्री नाथ का घर हुआ करता था. मंदिर 1200 वर्षों से भी पुराना है और आदिगुरु शंकराचार्य ने इस स्थान पर नृसिंह की शालिग्राम स्थापना की थी. इस पवित्र स्थल की प्राचीनता 32000 साल पुरानी बताई जाती है. 

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आठवीं शताब्दी में हुआ मंदिर निर्माण
मंदिर में स्थापित भगवान नरसिंह की मूर्ति शालिग्राम पत्थर से बनी है. इस मूर्ति का निर्माण आठवीं शताब्दी में कश्मीर के राजा ललितादित्य युक्का पीड़ा के शासनकाल के दौरान किया गया.  किवदंती है कि राजा ने जब यहां मंदिर निर्माण की इच्छा से खुदाई करानी चाहिए तो मूर्ति स्वयं-प्रकट हो गई. 10 इंच की भगवान की प्रतिमा कमल पर विराजमान है. नृसिंह भगवान के साथ इस मंदिर में बद्रीनारायण, उद्धव और कुबेर के विग्रह भी स्थापित हैं. 

भगवान की प्रतिमा में है भविष्यवाणी
मंदिर में जो सबसे खास बात है वह है प्रतिमा से जुड़ी भविष्यवाणी. दरअसल, भगवान नृसिंह की प्रतिमा हर दिन के साथ सिकुड़ती जा रही है. प्रतिमा की दायीं कलाई बहुत पतली और हर दिन बारीक हो रही है.

जिस दिन नृसिंह स्वामी जी की यह कलाई टूट कर गिर जाएगी, उस दिन नर और नारायण पर्वत लुप्त हो जाएंगें. इसीसे बद्रीनाथ धाम का मार्ग सदा के लिए अवरुद्ध हो जाएगा. केदारनाथ भी दर्शन देना बंद कर देंगें. 

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सनत संहिता में है इसका वर्णन
सनत संहिता में इस पूरे घटनाक्रम और भविष्य वाणी का वर्णन है. इसके अनुसार वर्तमान बद्रीनाथ धाम के लुप्त हो जाने के बाद भगवान के दर्शन भविष्य बद्री में होंगें. अभी भविष्य बद्री जोशीमठ से 25 किमी की दूरी पर स्थित है.

इस मंदिर की भी स्थापना हो चुकी है, बस यहां भगवान बदरी विशाल के आगमन का इंतजार हो रहा है. वहीं केदारनाथ और नर-नारायण पर्वत लुप्त हो जाएंगे. देवी गंगा भी स्वर्ग चली जाएंगीं. ऐसा तय है. 

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