हेमंत सोरेन के जीतने की संभावना कितनी?

झारखंड विधानसभा चुनावों ने इस बार अप्रत्याशित राजनीति के सिद्धांत को सत्य सिद्ध किया है और इन चुनावों के समाप्त होते-होते हालात ने बड़ा यूटर्न ले भी लिया है..

हेमंत सोरेन के जीतने की संभावना कितनी?

रांची. हेमंत सोरेन प्रदेश राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा हैं. झारखंड की मिटटी के लोकप्रिय और ऐतिहासिक नेता शिबू सोरेन की राजनीतिक विरासत अब वे ही सम्हाल रहे हैं. ऐसे में प्रदेश चुनावों में उनकी पराजय की आशंका कम ही हो सकती है. लेकिन इस बार शायद ऐसा नहीं है.

हेमंत को है जबरदस्त चुनौती 

हेमंत सोरेन को इस बार भाजपा ने जम कर घेरा है. भाजपा ने लगभग अपनी सारी योजना हेमंत सोरेन को केंद्र में रख कर तैयार की है चाहे वे पार्टी के टिकटों का बंटवारा हो या सोरेन के विरुद्ध प्रत्याशी खड़ा करना हो, सोरेन को शिकस्त देने के लिए बीजेपी सारा ज़ोर लगा रही है.

लड़ रहे हैं दो सीटों पर  

हेमंत सोरेन का चेहरा शिबू सोरेन वाली लोकप्रियता का नहीं है फिर भी उन्होंने अपने भाई दुर्गा सोरेन की तुलना में अपने पिता से कहीं अधिक सीखा है. इसलिए जीत के प्रति आश्वस्त होते हुए भी उन्होंने दो स्थानों से परचा भरा और वे बरहेट और दुमका - दोनों जगहों से चुनाव लड़ रहे हैं. 

दुमका में संभावना कम है

दुमका उप-राजधानी है झारखंड की. यहां की सीट से हेमंत सोरेन को चुनौती दे रहे हैं पूर्व मंत्री लुइस मरांडी. भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर यहां उन्होंने जबरदस्त समर्थन हासिल किया हुआ है. ऐसे में हेमंत सोरेन के लिए उनको शिकस्त देना आसान न होगा. 

पहले भी हरा चुके हैं मरांडी 

भाजपा प्रत्याशी लुइस मरांडी आत्मविश्वास से भरे हुए हैं कारण है कि 2014 में वे हेमंत सोरेन को पहले ही पराजित कर चुके हैं जबकि उस समय सोरेन की विजय की संभावना उनसे कहीं बहुत अधिक थी. ठीक ऐसा ही इस बार भी हो सकता है. वैसे हेमंत सोरेन इस बार पूरी तैयारी से हैं जीत के लिए भी और हार के लिए भी. 

बरहेट में जीत की संभावना अधिक 

बरहेट को हेमंत सोरेन की सुरक्षित सीट माना जा सकता है. हालांकि यहां भी बीजेपी उनको आसान जीत हासिल नहीं होने देगी. पर पिछले चुनावों में हेमंत सोरेन ने यहीं से जीत हासिल की थी और इस क्षेत्र के विकास के लिए उन्होंने लगातार काम भी किया है. इसलिए बीजेपी का विकल्प यहां की जनता चुनेगी या नहीं, आने वाले दिनों में ही पता चलेगा.