पवार, पावर और परिवार

सुबह का सूरज निकलते ही महाराष्ट्र की सियासत में जबरदस्त उठापटक देखी गई. शिवसेना समेत सभी विरोधी दलों के पैरों तले जमीन खिसक गई. लेकिन इन सबके बीच सूबे की पूरी राजनीति पवार, पावर और परिवार के इर्द गिर्द सिमट कर रह गई है.

पवार, पावर और परिवार

नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति की तस्वीर रातों रात जिन किरदारों की वजह से बदल गई. उनमें एक अजित पवार हैं, ये तो दुनिया जानती है. सवाल ये है कि क्या पर्दे के पीछे दूसरे किरदार शरद गोविंद राव पवार भी शामिल हैं? या फिर शरद पवार अपने भतीजे अजित पवार की चाल से पूरी तरह अंजान थे? या फिर स कुछ पवार की घड़ी की टाइमिंग के लिहाज से हुआ? या फिर वाकई शरद पवार इस पालाबदल की सक्रिप्ट के हर शब्द नावाकिफ थे?

50 साल का सियासी अनुभव

50 साल का सियासी अनुभव रखने वाले 78 साल के शरद पवार देश की राजनीति के वो दिग्गज हैं, जिनकी विरोधी भी दाद देते हैं. कहा जाता है कि सियासी मौसम को भांपने में उनका कोई मुकाबला नहीं. भले ही शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने यहां तक कह दिया कि अजित पवार के इस कदम से पार्टी और परिवार दोनों टूट सी गई है. भले ही शरद पवार कह रहे हों कि मैं भतीजे के फैसले के साथ नहीं. भले ही शरद पवार ने कैमरे के सामने अपने बागी विधायकों में से ज्यादातर को वापस लौटाने की तस्वीर पेश की. बावजूद इसके सवालों की बौछार जारी है.

आसान नहीं है पवार को समझना

पवार को समझना सबके बस की बात नहीं है. महाराष्ट्र में जो कुछ हुआ है, उससे पवार, पावर और परिवार के पेंच को समझना और भी मुश्किल हो गया है. शरद पवार ने इस दौरान ये तक कह दिया है कि 'बहुमत सिद्ध करने का जो मौका दिया है, उसके बाद हम सरकार बनाएंगे. सरकार बनाने में कोई दो राय नहीं. सरकार हम बनाएंगे, बना सकते हैं और नंबर हमारे पास है.'

उद्धव ठाकरे के साथ बैठकर शरद पवार ने भले ही जो भी कहा हो. लेकिन, सूत्रों की मानें तो उनको लेकर शिवसेना भी संदेह से पूरी तरह मुक्त नहीं. पवार के बारे में शिवसेना ने अभी कुछ दिन पहले ही कहा था कि उन्हें समझने में किसी को भी सौ जन्म लगेंगे. इस बीच शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया है. अजित पवार पहले ही कह चुके हैं कि उन्होंने शरद पवार को सब कुछ बता दिया था, लेकिन पवार इससे इनकार कर रहे हैं. चाचा और भतीजे के बीच आखिर कौन सी बात हुई या नहीं हुई. अब इस पर सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है.

तो क्या पवार से रूठ गई कांग्रेस?

जिस कांग्रेस के साथ बातचीत के नाम पर शरद पवार शिवसेना के साथ बातचीत में लेटलतीफी करते रहे. अब वही कांग्रेस उनसे नाराज बताई जा रही है. यही वजह रही कि मुंबई में होने के बावजूद अहमद पटेल उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने को तैयार नहीं हुए. कांग्रेस को शक है कि अपने विधायकों के मन की बात का अंदाजा लगाने में पवार वाकई नाकाम रहे. अजित पवार कह रहे हैं कि कांग्रेस की तरफ से देरी की वजह से उन्हें बीजेपी के साथ जाना जरूरी लगा. अब कांग्रेस ने इसे खारिज कर दिया है.

कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने ये तक कह दिया कि सब कुछ सुलझ चुका था, आज फाइनल स्टेज में था कि अचानक ये कांड हो गया.

शरद पवार पर भरोसा कर पाएंगे उद्धव?

भले ही शरद पवार, उद्धव ठाकरे को अब भी सरकार बनाने का भरोसा दिला रहे हों. लेकिन सच ये है कि शिवसेना के लिए पवार की बातों पर पूरी तरह भरोसा करना आसान नहीं. आपको याद होगा, 11 नवंबर का वो दिन जब शिवसेना के नेता आदित्य ठाकरे राज्यपाल के पास एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन की चिट्ठी लेकर जाने वाले थे. शिवसेना ने कहा था कि दोनों ही दलों ने समर्थन का भरोसा दे दिया है. लेकिन राज्यपाल की तरफ से तय सीमा तक एनसीपी और कांग्रेस ने राज्यपाल को समर्थन की चिट्ठी नहीं भेजी. इससे शिवसेना की कोशिश अधूरी रह गई. लेकिन इन सबके बीच भाजपा ने जो मास्टरस्ट्रोक खेला उससे हर कोई दंग रह गया.

एनसीपी की वजह से शिवसेना की तब बड़ी फजीहत हुई. शिवसेना के पास इसके बावजूद कोई चारा नहीं था. और वो शरद पवार से बातचीत करती रही. आए दिन शरद पवार के बयानों का रुख बदलता रहा और असमंजस बढ़ता  गया. इस दौरान, शरद पवार की तरफ से कई ऐसे बयान आए, जिसमें उन्होंने दो टूक कहा कि बीजेपी और शिवसेना को जनादेश मिला है सरकार वो बनाए.

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मौजूदा माहौल में शिवसेना, अंदरखाने एनसीपी से नाराज बताई जा रही है. लेकिन उद्धव के सामने शरद पवार से दोस्ती निभाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. महाराष्ट्र की राजनीति के महाड्रामे में हर पल बड़े बदलाव आ रहे हैं. सुबह की तस्वीर शाम को बदलती नजर आ रही है. लेकिन गौर से देखें तो दोनों खेमे में चर्चा पवार, पावर और परिवार की ही है.

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