'दंगा फैक्ट्री' का सरदार है AAP पार्षद ताहिर हुसैन, यहां पढ़ें उसके 4 झूठ

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा भले ही अब थम चुकी हो. लेकिन हिंसा के पीड़ित लोगों के जख्म अब तक हरे हैं. लेकिन गुनहगारों के नकाब उतरने लगे हैं. घर को बम फैक्ट्री बनाने वाले AAP पार्षद ताहिर हुसैन का सच सामने आ तो उन्होंने अपनी सफाई में खुद झूठे किस्सों की लंबी कतार लगा दी.

'दंगा फैक्ट्री' का सरदार है AAP पार्षद ताहिर हुसैन, यहां पढ़ें उसके 4 झूठ

नई दिल्ली: वो कहावत तो हर किसी ने सुनी होगी कि 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली. घर में दंगे की फैक्ट्री लगाने वालों की कहानी कुछ ऐसी ही है. हम आम आदमी पार्टी (AAP) के निगम पार्षद ताहिर हुसैन की बात कर रहे हैं. दिल्ली के नेहरू विहार इलाके से AAP निगम पार्षद ताहिर हुसैन के लिये आज इस कहावत को बखूबी इस्तेमाल किया जा सकता है.

AAP के "घर" में दिल्ली की 'दंगा फैक्ट्री'

चांदबाग इलाके में हुई हिंसा के दौरान जलने वाली आग और भड़कने वाले दंगे इस बात की चीख-चीखकर गवाही दे रही हैं कि जिस वक्त चांदबाग में हिंसा हुई. उस दौरान आम आदमी पार्टी के नेता दिल्ली को जलाने की साजिश रच रहे थे. ताहिर हुसैन अपने ही घर पर दंगा भड़का रहे दंगाइयों के साथ थे. ऐसे सबूत सामने आए हैं कि हर कोई ये समझ लेगा कि जनता का प्रतिनिधि दिल्ली में हुए दंगा का नेतृत्व करने लगा.

ताहिर हुसैन के घर की छत से सैकड़ों दंगाइयों की भीड़ बड़े-ब़ड़े पत्थर और पेट्रोल बम फेंक रही थी. लेकिन आज जब ताहिर हुसैन के खिलाफ हर कोई दंगा भड़काने का आरोप लगा रहा है, तो ताहिर हुसैन ने अपनी सफाई में खुद के खिलाफ राजनीति होने के आरोप लगा दिये.

गिड़गि़ड़ाने लगा "दंगाई ब्रिगेड" का सरदार

AAP पार्षद ताहिर हुसैन ने इसे खुद को बदनाम करने की साजिश करार दिया है. वो गिड़गिड़ा रहे हैं, लेकिन क्या उन सबूत को नजरअंदाज कर दिया जाए जो फैक्ट्री उन्होंने अपने घर में लगा रखी थी. ऐसे अनगिनत सवाल हैं जो ताहिर और आम आदमी पार्टी के झूठ को बेनकाब करने में मददगार साबित हो सकता है. लेकिन सबसे पहले आपको ताहिर हुसैन के घड़ियाली आंसू से रूबरू करवाते हैं.

पहला झूठ-
ताहिर हुसैन ने कहा कि "मैं AAP पार्षद ताहिर हुसैन आप सबको बताना चाहता हूं जो भी खबर मेरे बारे में चलाई जा रही है, दिखाई जा रही है वो सरासर गलत है. गंदी राजनीति के चलते मुझे बदनाम किया जा रहा है, घसीटा जा रहा है."

ताहिर का कहना है कि जो खबरें चलाई जा रही हैं वो सरासर गलत है. उन्हें गंदी राजनीति के तहत बदनाम किया जा रहा है. लेकिन उन्हें भला कौन बदनाम कर रहा है और क्यों बदनाम कर रहा है. उनके घर से मिले दंगे के सामान से तो उनका असली चेहरा सामने आएगा ही. वो सामने आकर ये क्यों नहीं बता रहे हैं कि उनके घर में इन सामानों को रखकर उन्हें कौन बदनाम कर रहा है?

दूसरा झूठ-
AAP पार्षद ताहिर हुसैन ने कहा कि "जब से कपिल मिश्रा ने भड़काऊ भाषण दिया है तभी से दिल्ली के हालात खराब हैं. जगह-जगह पत्थरबाज़ी और तमाम चीज़ों की घटनाएं सुनने को मिल रही हैं. वैसा ही परसों हमारे यहां भी हुआ, जिसे देखते हुए हमने तुरंत पुलिस से संपर्क किया." 

पत्थरबाजी कर दिल्ली को चोट पहुंचाया

कपिल मिश्रा ने जब भड़काऊ भाषण दिया तो क्या "आप" भड़क जाएंगे और अपने घर की छत से पत्थरबाजी करवाएंगे? झूठ बोलने की भी एक सीमा होती है. अपनी सफाई में ताहिर हुसैन ने कहा कि सैकड़ों लोगों की भीड़ जबरन दरवाज़ा तोड़कर उनके घर में घुस आई थी. वो पुलिस से मदद मांगते रहे. कई घंटों बाद पुलिस पहुंची और फिर हालात काबू में आए. उन्होंने पुलिस से तुरंत संपर्क किया था तो उन दंगाईयों के साथ छत पर लाठी लेकर क्या पुलिस का इंतजार कर रहे थे?

तीसरा झूठ-
ताहिर हुसैन ने कहा, "बहुत सारी भीड़ मेरे ऑफिस का गेट तोड़कर जबरदस्ती छत पर चढ़ गई थी. जिसके लिए लगातार मैंने पुलिस से मदद मांगी. कई घंटों के बाद यहां पुलिस फोर्स पहुंची और सब काबू हुआ. उस वक्त जो यहां पर पुलिस अधिकारी मौजूद थे, उनकी निगरानी में पूरे मकान, बिल्डिंग, ऑफिस की तलाशी ली गई. उसे अच्छे से चेक किया गया, पुलिस ने ही मेरे परिवार के साथ हमें यहां से सुरक्षित बाहर भेजा था. हमें कहा गया था कि कहीं सुरक्षित जगह पर चले जाइए, क्योंकि बिल्डिंग पर फिर खतरा या बवाल हो सकता है. आप अपनी जान सेफ कीजिए."

आग बरसा कर दिल्ली जलाया

जनाब का कहना है कि भीड़ इनके घर में जबरन घुस आई. लेकिन दंगाईयों के साथ हाथों में लाठी थामें वो क्या कर रहे थे? तस्वीर में आपको हाथों में लाठी थामे ताहिर हुसैन दंगाइयों के साथ नज़र आएंगे. ये तस्वीरें ताहिर हुसैन के घर की छत से बरसाये जा रहे पेट्रोल बम और पत्थरों की भी गवाही दे रही हैं. इन तस्वीरों को देखकर कोई बच्चा भी समझ जाएगा कि ताहिर हुसैन को इलाके में मची चीख-पुकार और आगज़नी से कोई सरोकार नहीं था. वो तो दंगाइयों के साथ खड़े होकर तमाशा देख रहे थे. मानो बता सकें कि अगर कोई कसर रह जाए तो पूरी कैसे करनी है.

चौथा झूठ-
ताहिर हुसैन ने ये भी कहा कि मैंने (पुलिस) उनसे गुहार लगाई थी कि सर यहां से फोर्स ना हटाएं. फोर्स अगर यहां से हटी तो मेरी बिल्डिंग का फिर से कोई नाजायज़ फायदा उठा लेगा, जो मैं किसी भी कीमत पर नहीं चाहता. बड़ी मुश्किल से कोशिश की थी कि दरवाज़ा ना टूटे. दरवाज़े पर हमारे वर्कर ने पूरी ताकत लगाई थी लेकिन फिर भी दरवाज़ा तोड़ दिया गया था. उसके बाद लगातार पुलिस फोर्स की निगरानी में वो बिल्डिंग और जगह पूरी रात रही, पूरा दिन रहा. लेकिन पता नहीं ऐसा क्यों हुआ कि पुलिस फोर्स वहां से हट गई और दोबारा से दंगाइयों ने वही काम किया, जिसका मुझे डर था. ये जो भी हुआ है बहुत गलत हुआ है, मैं इससे बहुत दुखी हूं."

पेट्रोल बम फेंक कर दिल्ली का भरोसा उड़ाया

ताहिक हुसैन बहुत दुखी हैं, चलिए एक बार मान भी लिया जाए कि वो सच बोल रहे होंगे, लेकिन वीडियो में उनको साफ देखा जा सकता है. वो खुद बम फेंकने वाले दंगाईयों के साथ दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने ये बात क्यों नहीं बताई? दंगे के 5 दिन बाद वो भी जब वो पकड़े गए तो उन्होंने झूठी गाथा लिख दी. उनके इस झूठ के साथ उनकी पार्टी कदम से कदम मिलाकर उनका समर्थन कर रही है.

चांदबाद में हुई हिंसा के ज़ख्म सैकड़ों परिवारों को मिले IB कर्मचारी अंकित शर्मा का परिवार भी ऐसा ही पीड़ित परिवार है. अंकित शर्मा के भाई की मानी जाए तो उसके भाई को मौत के घाट उतारने वाली भीड़ ताहिर हुसैन के घर से ही आई थी. अंकित समेत 4-4 लड़कों को जबरन उठाकर हिंसा की शाम ताहिर हुसैन के घर ही ले जाया गया था.

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ताहिर हुसैन निगम पार्षद हैं, उन्हें इलाके की जनता ने चुना था अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लेकिन चांदबाग में हुए दंगों को लेकर अब ताहिर हुसैन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. कहते हैं अगर कहीं चिंगारी है, तो धुआं भी जरूर होगा. सवाल ये है कि दिल्ली हिंसा में जब ताहिर हुसैन का नाम हर कोई ले रहा है. जब मिल रहे सबूत चांदबाग में हुई साज़िश की पोल खोल रहे हैं. तो आम आदमी पार्टी अपने नेता के बचाव में क्यों लगी है?

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