...तो इसलिए राजद को उत्तराधिकारी चुनने के लिए उकसा रहे हैं रामविलास पासवान

गुरुवार को पटना पहुंचे केंद्रीयमंत्री रामविलास पासवान ने  राजद सुप्रीमो लालू यादव को एक मशवरा दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी चुन लेना चाहिए. अब लोजपा संस्थापक व केंद्रीयमंत्री रामविलास पासवान ने ऐसा क्यों कहा और इसको आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ कर क्यों देखा जाने लगा है, इसके पीछे की भी दिलचस्प कहानी है. 

...तो इसलिए राजद को उत्तराधिकारी चुनने के लिए उकसा रहे हैं रामविलास पासवान

पटना : राजनीति का परिवारवाद से गहरा नाता है. इतना गहरा कि पिता-पुत्र, चाचा-भतीजा, बुआ-भतीजा और भाई-भतीजावाद के बीच राजनीतिक विरासतों के बंटवारे से लेकर उत्तराधिकारी बनाने तक की रणनीति बड़ा बदलाव ला देती है. राजनीति के  बैटलग्राउंड बिहार में तो यह खेल दशकों से चलता आ रहा है. गुरुवार को बिहार पहुंचे केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने राजद के राजनीतिक विरासत सौंपे जाने के सवाल पर कहा कि अब यहीं समय है कि पार्टी की बागडोर को किसी जिम्मेदार कंधे पर सौंप कर लालू यादव उसका निरीक्षण करें.

रामविलास ने कहा कि पढ़ाईए, लिखाईए और उसे आगे बढ़ने दीजिए

रामविलास पासवान ने कहा कि ''हम तो दूसरे लोगों को भी कहेंगे, भईया नया जेनरेशन है, पार्टी का पद छोड़ते क्यों नहीं हो? लालू जी जेल में बंद हैं. अपने ही बच्चों में से बनाना ही है पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष तो चाहे तेजस्वी, तेजप्रताप या मीसा को बनावें. किसी को भी बना दें.'' रामविलास पासवान ने कहा कि '' यह नया जेनरेशन है.

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अपने जीते जी यह देख लूं कि हमने जिस पौधे को लगाया है वह पौधा फल-फूल रहा है कि नहीं. हमारी जो आगे आने वाली पीढी है, हर बाप को चाहत होती ही है कि हम जितनी दूर तक पहुंचे हैं, हमारी संतान चाहे बेटा हो या बेटी, उससे भी आगे बढ़े. इसलिए  जरूरी है कि पढाईए, लिखाईए और उसे अपना उत्ताधिकारी बनाकर उसे आगे बढ़ने दीजिए.'' 

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केंद्रीयमंत्री कहें भी क्यों न उनके नाम यह रिकॉर्ड रहा है. खुद 7 प्रधानमंत्रियों के अंदर केंद्रीयमंत्री रहने का सौभाग्य, जमुई से पुत्र चिराग पासवान की दूसरी जीत, भाई पारसनाथ पहली 7 बार विधायक रहने के बाद पहली बार सांसद बने और समस्तीपुर से सांसद रहे रामचंद्र पासवान की मृत्यु के बाद भतीजे प्रिंस राज को पहले प्रयास में ही मिली पहली सफलता यानी की उसी क्षेत्र से सांसद चुने जाना.

केंद्र में सत्ता वाली सरकार के साथ गठबंधन तो राज्य में भी सत्ताधारी एनडीए गठबंधन में हिस्सेदारी. कहने का मतलब कि दोनों हाथ लड्डू का सुख भोग रही लोजपा के लिए इससे अच्छे दिन क्या हो सकते हैं. ऐसे में पार्टी ने लालू यादव को घेरना शुरू किया और कहा कि राजद को भी अपनी विरासत सौंप देनी चाहिए. 

राजद की कमान तेजस्वी कि तेजप्रताप या मीसा में उलझे हैं लालू

अब अपनी इस बढ़त के साथ केंद्रीय मंत्री ने राजद की दुखती रग पर हाथ रख दिया है. राजद में सुप्रीमो लालू यादव की गैर-मौजूदगी में पार्टी की कमान संभाल रहे हैं छोटे बेटे तेजस्वी यादव. वहीं लालू परिवार के पहली चिराग मीसा भारती और बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को कई बार राजनीतिक गलियारों में उपेक्षित बताया जाता है. 2015 में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद छोटे बेटे तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने से कथित तौर पर तेजप्रताप यादव नाराज हो गए थे.

पुत्री मीसा भारती पहले से ही पार्टी में वह जगह न पाने से उखड़ी रहती हैं और कई दफा विरोध भी कर चुकी हैं. ऐसे में बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के पहले राजद सुप्रीमो किसी तरह से लोकसभा की तरह ही किसी पारिवारिक कलह में नहीं उलझना चाहते. 

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क्या फेल हो चुके हैं तेजस्वी और खो चुके हैं विश्वास ?

लोकसभा के दौरान अपनी ही पार्टी और परिवार के खिलाफ मोर्चा खोल देने वाले तेजप्रताप यादव के बागी रवैये से लालू परिवार का जो नुकसान हुआ सो अलग लेकिन देश-प्रदेश में उनकी किरकिरी भी खूब उड़ी थी. लोकसभा में इतनी करारी हार के बाद वैसे भी महागठबंधन और पार्टी के अंदर कई अनुभवी नेताओं के बगावती तेवर उभरने लगे हैं.

ऐसे में पार्टी के सामने अगर तेजस्वी यादव का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए प्रस्तावित किया जाता है तो विवाद अंदरूनी नहीं सतह पर भी आ सकता है. केंद्रीयमंत्री रामविलास पासवान राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं, उन्हें यह बात पता है कि लालू परिवार की दुखती रग है क्या. और इसलिए चुनाव से पहले माहौल गर्म करने के प्रयास में लग गए हैं. 

खैर, राजद की प्रदेश में पतली हालत का जिम्मेदार तेजस्वी यादव के अड़ियल रवैये को बताया जा रहा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या तेजस्वी यादव का विकल्प दरकिनार कर तेजप्रताप यादव या पुत्री मीसा भारती राजद को पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है?