राफेल, सबरीमाला पर फैसला आज, इसी हफ्ते कुछ और फैसले

सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं और 18 नवंबर को जस्टिस बोबडे उनकी जगह लेंगे.  इससे पहले अयोध्या मामले में फैसला आ चुका है. देश में कुछ और मामले हैं जो राजनीतिक महत्व रखते हैं. राफेल और सबरीमाला पर तो आज ही फैसला आना है.

राफेल, सबरीमाला पर फैसला आज, इसी हफ्ते कुछ और फैसले

नई दिल्लीः मंदिर मामले में फैसला आने के बाद अब एक बार फिर देश की निगाहें भारत की सर्वोच्च अदालत की ओर टिकी हैं. दरअसल अभी ऐसे कई मामले हैं, जिनमें सुप्रीम कोर्ट अपना निर्णय सुनाने वाला है और देश की ताजा राजनीतिक परिस्थितियों में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है. दरअसल मौजूदा चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं और इस तारीख से पहले इन मामलों में फैसला लिया जाना है. इन सभी मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है. नजर डालते हैं उन सभी मामलों पर, जिनके फैसले अब आने वाले हैं.

राफेल मामला
सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई गोगोई की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच राफेल सौदा मामले पर फैसला सुनाने वाली है. बेंच में जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ हैं. राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर, 2018 को अपना फैसला सुनाया था और केंद्र सरकार को क्लीन चिट दे दी थी. हालांकि इस फैसले की समीक्षा के लिए अदालत में कई याचिकाएं दायर की गईं और 10 मई, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने राफेल खरीद की जांच एसआईटी से कराने की मांग को पहले ही खारिज कर दिया था. बाद में सर्वोच्च अदालत ने कुछ नए तथ्यों के सामने आने के तर्क पर रिव्यू पिटिशन स्वीकार की थी. इस मामले पर कोर्ट कल अपना फैसला सुनाने जा रही है.

राहुल गांधी अवमानना मामला 
सुप्रीम कोर्ट में राफेल डील पर हो रही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वह उन दस्तवेजों पर भी सुनवाई करेगी, जिन्हें जिन्हें केंद्र ने गोपनीय होने का हवाला दिया था. इसे केंद्र को लगा बड़ा झटका माना जा रहा था. इसी मौके का फायदा उठाते हुए राहुल गांधी ने राजनीति की कोशिश की. उन्होंने बयान दे डाला कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है.

वह कहना चाह रहे थे सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे स्वीकार किया है कि राफेल डील में नरेंद्र मोदी (चौकीदार) ने भ्रष्टाचार किया है. इसके बाद मीनाक्षी लेखी ने राहुल गांधी के खिलाफ कोर्ट में शिकायत करते हुआ कहा था राहुल गांधी ने कोर्ट की अवमानना की है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, इस मामले में भी गुरुवार को फैसला सुनाया जाना है. 

सबरीमाला मंदिर मामला
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी आयु की महिलाओं के प्रवेश को अनुमति दी थी. इस फैसले का कई धार्मिक संगठन विरोध कर रहे थे और इसे परंपरा का उल्लंघन बताया गया था. सुप्रीम कोर्ट में फैसले पर पुरर्विचार के लिए कुल कई याचिकाएं  दाखिल की गईं, इस पर भी गुरुवार को फैसला आना है. 

6 फरवरी, 2019 को इन सभी याचिकाओं पर कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. पांच जजों वाली बेंच की अगुवाई भी जस्टिस रंजन गोगोई ने ही की थी. 6 फरवरी, 2019 को इन सभी याचिकाओं पर कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. पांच जजों वाली बेंच की अगुवाई भी जस्टिस रंजन गोगोई ने ही की थी.

RTI और सीजेआई ऑफिस
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के कार्यकाल के इस आखिरी हफ्ते में RTI को लेकर भी फैसला आना है. सुप्रीम कोर्ट की एक संवैधानिक बेंच को यह फैसला सुनाना है कि क्या चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का कार्यालय सूचना के अधिकार के तहत लाया जाना चाहिए.  सूचना अधिकार कार्यकर्ता कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल ने सीजेआई ऑफ़िस को आरटीआई के दायरे में लाने के लिए याचिका दायर की थी. अग्रवाल का पक्ष रखने वाले वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि अदालत में सही लोगों की नियुक्ति के लिए जानकारियां सार्वजनिक करना सबसे अच्छा तरीका है. प्रशांत भूषण ने कहा, सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति और ट्रांसफ़र की प्रक्रिया रहस्यमय होती है. इसके बारे सिर्फ़ मुट्ठी भर लोगों को ही पता होता है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में पारदर्शिता की जरूरत पर ज़ोर दिया है लेकिन जब अपने यहां पारदर्शिता की बात आती है तो अदालत का रवैया बहुत सकारात्मक नहीं रहता है. 

फाइनेंस एक्ट 2017 की वैधता को चुनौती
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने फाइनेंस एक्ट 2017 में भी अपना फैसला सुरक्षित रखा है. फाइनेंस एक्ट 2017 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालते हुए इसकी वैधता को चुनौती दी गई थी. आरोप लगाया गया था कि संसद में फाइनेंस एक्ट 2017 को एक मनी बिल की तरह पारित कर दिया गया. 17 नवंबर से पहले-पहले इस मामले पर भी सुप्रीम कोर्ट से अंतिम फैसला आना है.

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