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इस नई तकनीक के आगे नहीं टिकेंगे देश के दुश्मन

सीमा पार के खतरों से निपटने के लिए तो भारत पहले से ही तैयार था, अब सीमा के पार से और देश के अंदर के खतरों की जानकारी ले कर उन्हें उपजने से पहले ही तबाह करने के लिए भारतीय सेना ने एक नया नुस्खा खोज निकाला है जो दुश्मनों के दांत खट्टे कर सकता है, क्या है वो आइए जानते हैं.   

इस नई तकनीक के आगे नहीं टिकेंगे देश के दुश्मन

नई दिल्ली: जबरदस्त जनाधार के साथ सत्ता हासिल करने वाली मोदी सरकार के हौसले कितने बुलंद हैं, वो इस सरकार के फैसलों में साफ-साफ झलकने लगा है. कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद से तो सरकार ने सैन्य गतिविधियों में काफी तेजी से नए-नए ऑपरेशन और नए-नए तकनीकी अपडेट को बहाल किया है. अब भारतीय सेना ने एक और बड़ा फैसला लिया है जिससे न सिर्फ सेना की जंगी शक्ति बढ़ेगी बल्कि सैनिक अस्त्र-शस्त्रों को नई तकनीक से लैस कर इसे स्वचालित बनाए जाने के मिशन पर काम शुरू कर दिया गया है.

हजारो फुट की ऊंचाई से दुश्मन को तबाह कर देगा भारत का ड्रोन

दरअसल, भारतीय सेना ऐसे ड्रोन खरीदने की योजना बनी रही है जो न सिर्फ सामान की ढुलाई करे बल्कि एक मिसाइल की तरह अटैक करने में भी उपयोग में लाया जा सके. दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सैन्यबल भारतीय सेना अब सबसे नवीन तकनीक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर और मारक व प्रभावी बनाने की तैयारी में है. सेना के अधिकारी इस बात पर पूरी तरह से एकमत हैं कि इस तकनीक से फायदा होगा और जंगी हथियारों की निगरानी करने में भी आसानी होगी.  इस फैसले को पाकिस्तान के लिए एक खतरे की घंटी की तरह देखा  जा रहा है. कश्मीर मामले पर और अन्य सीमा विवादों पर पाक की लगातार नापाक कोशिशों के लिए भारतीय सेना ने हालके दिनों में अपनी शक्ति में लगातार इजाफा किया है. इसके पहले  प्रोजेक्ट बी-हाइव को ला कर सेना ने भारतीय अस्त्र-शस्त्र को आर्टिफिशल इंटेलिजेंस युक्त करने का रोडमैप तैयार कर लिया है. 

सीमा पर बढ़ते खतरों से जूझने को पूरी तरह तैयार सेना 

इसके अलावा भी सीमा पर लगातार बढ़ते खतरों के निपटारे के लिए भारतीय सेना पूरी तरह प्रतिबद्ध नजर आ रही है. मंगलवार को दिल्ली में 41वें डीआरडीओ सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय थलसेना के सभी कमांडर-इन-चीफ के अलावा भारतीय थलसेना चीफ लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत भी मौजूद थे. उन्होंने इस कार्यक्रम में डीआरडीओ द्वारा निर्मित उपकरणों को जल्द ही सेना में बहाल किए जाने की योजना के बारे में इत्तेलाह किया. इसके अलावा मंगलवार को ही आर्मी डिजाइन ब्यूरो द्वारा भारतीय सेना के बेड़े में जरुरी हथियारों और उपकरणों को शामिल करने के लिए दिल्ली छावनी के मानेकशॉ सेंटर में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया. इस प्रदर्शनी में  तकरीबन 40 कंपनियों ने अपने रक्षा उपकरणों को इसमें प्रदर्शित किया, जिसमें अधिकतर आर्टिफिशल इंटेलिजेंस  से लैस ड्रोन ही थे. 

सेना में शामिल होगा UAV का जखीरा 

भारतीय सेना के सभी कमांडरों की मौजूदगी में एकमत हो कर धीमी गति से चलने वाले अनमैन्ड एरियल व्हीकल(UAV) जो पूरी तरह से एक ड्रोन ही है उसे खरीदने का मन बना लिया है. इसे मिसाइल म्यूटेशन ड्रोन का नाम दिया गया है जो सीमा पार से किसी भी खतरे से निपटने के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है. इस प्रदर्शनी मे किसी दुश्मन मनुष्य को भी टारगेट करने वाले मानव रहित हवाई यंत्र भी थे जो एग्जीबीशन में आए आगंतुकों केकेंद्र में बने हुए थे. 

भारतीय सेना में इतने बडे़ स्तर पर हथियारों और ड्रोंस की भर्ती देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहतर कदम है. सेना के जनसंख्या के हिसाब से विश्व की चौथी सबसे बड़ी भारतीय सेना बहुत तेजी से तकनीकीकरण को अपनाकर सबसे मजबूत सेना बनने की दिशा में बढ़ चुकी है.