18 मई 1974: जब भारत में 'मुस्कुराए बुद्ध' तो पसीने-पसीने हो गए थे अमेरिका-पाकिस्तान

भारत के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े और एक समय उसे पूरे दम-खम से संचालित करने वाले राजा रमन्ना की आत्म कथा है Years of Pilgrimage. यह आत्मकथा एक तरह से भारत के अति आधुनिक युग के पीछे की कहानी बताने वाला ऐतिहासिक दस्तावेज है. 

Written by - Vikas Porwal | Last Updated : May 18, 2021, 08:03 AM IST
  • आज ही के दिन हुआ था पोखरण में परमाणु परीक्षण
  • बुद्ध पूर्णमा का था दिन, नाम मिला 'मुस्कुराए बुद्ध'
18 मई 1974: जब भारत में 'मुस्कुराए बुद्ध' तो पसीने-पसीने हो गए थे अमेरिका-पाकिस्तान

नई दिल्लीः 1974 में मई के 18वें दिन की सुबह थी. राजधानी दिल्ली में सामान्य ही चहल-पहल थी. देश बुद्ध पूर्णिमा मना रहा था. परंपरा के मुताबिक एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री इंदिरागांधी देश वासियों को इस शुभ दिन की शुभकामनाएं दे चुकी थीं, लेकिन उस सुबह उनके मन में एक अलग ही बेचैनी थीं. आदत के मुताबिक, मैडम प्राइम मिनिस्टर सुबह ही उठ चुकी थीं. 

उस दिन की खास सुबह
अपने कुछ निजी और ऑफिशियल काम निपटाते हुए उनकी नजरें फोन पर पड़ जाती थीं, जैसे कि कोई खास फोन आने वाला हो. फोन आया. समय था 8 बजकर 10 मिनट के करीब. इधर से इंदिरा गांधी की हेलो हुई, उधर वाले ने कहा- बुद्ध मुस्कुराए.

मैडम प्राइम मिनिस्टर खामोश थीं, लेकिन आंखों से बेचैनी को हटाकर चमक ने जगह बना ली थी. भारत ने सुबह 8 बजकर 5 मिनट पर राजस्थान के पोखरण में परीक्षण के लिए विस्फोट किया था. वह सफल रहा था.

वैज्ञानिक राजा रमन्ना की आत्मकथा
भारत के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े और एक समय उसे पूरे दम-खम से संचालित करने वाले राजा रमन्ना की आत्म कथा है Years of Pilgrimage. यह आत्मकथा एक तरह से भारत के अति आधुनिक युग के पीछे की कहानी बताने वाला ऐतिहासिक दस्तावेज है. किताब बताती है कि 45 साल पहले जब भारत में "बुद्ध मुस्कराए" तो इससे अमेरिका के पेशानियों पर पसीने आ गए थे और पाकिस्तान की तो कंपकंपी ही छूट गई थी. 

रमन्ना लिखते हैं कि इसके बाद दुनिया में भारत पहला ऐसा देश बन गया, जिसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य न होते हुए भी परमाणु परीक्षण करने का साहस किया था. यह बड़ी बात थी और साहसी फैसला भी. 

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भारत ने साबित की अपनी शक्ति
बहुत ही गुप्त तरीके से और कई सालों की कठिन-अथक प्रयास का नतीजा था कि भारत ने यह साबित कर दिया था कि वह दुनिया की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाना जानता है तो भारत की ओर गलत नीयत से बढ़ने वाले हाथों को काटने की ताकत भी रखता है.

बुद्धि की शांति के संदेश वाला देश जरूरत पड़ने पर कितना आक्रामक हो सकता है, दुनिया यह भी देख ले. वैज्ञानिक राजा रमन्ना के मुताबिक उस रोज पोखरण में जो हो रहा था उससे ऐसा ही लग रहा था कि यह शांति स्थापना की ओर ही बढ़ता हुआ भारत का कोई कदम है. 

परीक्षण की आलोचना भी हुई
18 मई 1974 को, डॉ. रमन्ना ने भारत के पहले भूमिगत परमाणु बम विस्फोट को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इस कार्यक्रम की पहले बहुत आलोचना हुई, लेकिन इस परमाणु परीक्षण से किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ और न ही इसका ऐसा कोई इरादा था. इस परीक्षण का एकमात्र उद्देश्य दुनिया को एक मजबूत संदेश भेजना था.

इसलिए, इसे एक 'शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट' कहा गया, और इसे एक कोड नाम दिया गया- ‘स्माइलिंग बुद्धा’ यानी कि ‘मुस्कुराते बुद्ध,’ क्योंकि यह परीक्षण महात्मा बुद्ध की जयंती के दिन ही हुआ था. परीक्षण इतना गुप्त था कि कहते हैं कि देश के रक्षामंत्री रहे बाबू जगजीवन राम भी इसके हो जाने के बाद भी इसे जान पाए थे. 

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7 साल की मेहनत
इस टॉप सीक्रेट प्रोजेक्ट पर 75 वैज्ञानिक और इंजीनियरों की टीम लगातार गुप्त तरीके से काम कर रहे थे. 1967 से लेकर 1974 तक 7 साल के दौरान प्रोग्राम गुप्त भी रहा और सफलता पूर्वक पूरा भी हुआ तो इसका श्रेय रमन्ना को ही जाता है.

इस प्रोजेक्ट की कमान BARC के निदेशक डॉ. राजा रमन्ना के हाथ में थी. तब रमन्ना की टीम में एपीजे अब्दुल कलाम भी थे जिन्हें आगे चलकर देश के लिए एक और इतिहास रचना था. 1998 में उन्होंने पोखरण परमाणु परीक्षण की टीम का नेतृत्व किया था.

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