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स्कूली तालीम में होने जा रहे ये बड़े बदलाव, NCF ने तैयार रहने को कहा

एजुकेशन मिनिस्ट्री ने नेशनल करिकुलम में कई बदलाव किए हैं. इसके तहत बच्चों को पढ़ाने का और सिखाने का तरीका काफी बदल जाएगा. इसके तहत बच्चों के ड्रेस भी बदलेंगे.

 

स्कूली तालीम में होने जा रहे ये बड़े बदलाव, NCF ने तैयार रहने को कहा

स्कूलों के बोर्ड इम्तेहान साल में दो बार होंगे. स्कूली तालीम में ऐसे कई और बदलाव होने हैं. इसके लिए 'नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क' तैयार किया गया है. यह बताएगा कि क्लास 1 से 12वीं तक स्टूडेंट्स क्या पढ़ेंगे, कैसे पढ़ेंगे, स्टूडेंट्स को स्कूलों में पढ़ाने सिखाने का तरीका क्या होगा. बारीकी से तैयार किए गए इस दस्तावेज में यह तक बताया गया है कि स्कूलों की असेंबली कैसे होंगी, स्कूल बैग का भार कैसे कम होगा, किताबें कैसी होंगी और दीगर क्लासेज में पढ़ने वाले बच्चों का लेखाजोखा कैसा होगा.

ड्रेस में होगी तबदीली

नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क की बात करें तो देशभर के स्कूलों की यूनिफार्म में काफी बदलाव देखने को मिल सकता है. मसलन देश के साथ इलाकों में यूनिफार्म अलग तरह की हो सकती हैं. गर्म इलाकों के लिए अलग यूनिफॉर्म डिजाइन किए जाने की बात कही गई है. फ्रेमवर्क में कहा गया है कि इलाके के मौसम के हिसाब से स्कूलों की यूनिफार्म तैयार की जाए. स्टूडेट्स को जेंडर एक्वालिटी की बुनियाद पर यूनिफार्म का इंतेखाब करने का ऑप्शन भी दिया जा सकता है.

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बैठने की सहूलत का जिक्र

अभी तक कुछ खास स्कूलों की यूनिफार्म की बुनियाद पर ज्यादातर स्कूल वैसी ही यूनिफॉर्म को कॉपी करते दिखाई पड़ते हैं. एजूकेशन मिनिस्ट्री का मानना है कि नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) को एजुकेशन मिनिस्ट्री ने पिछले हफ्ते ही जारी किया है. यह फ्रेमवर्क बीते 36 सालों से जारी तालीम सिस्टम को बदलेगा. करिकुलम फ्रेमवर्क में क्लास के साइज, डिजाइन और स्टूडेंट्स के बैठने की सहूलत का भी जिक्र है.

गोलाकार में बैठेंगे बच्चे

फ्रेमवर्क में कहा गया है कि क्लास में स्टूडेंट्स गोलाकार या आधा गोलाकार में बैठ सकते हैं. इसके साथ ही स्कूलों की असेंबली को केवल एक रस्म अदायगी के बजाए सिखाने वाले प्रोसेस में तब्दीली करने की सिफारिश की गई है. नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क सेकेंडरी सतह को चार अलग-अलग हिस्सों 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं में बांटा गया है. इसमें स्टूडेंट्स को कुल 16 ऑपशन पर मुंहसिर करिकुलम को पूरा करना होगा. सेकेंडरी सतह पर स्टूडेंट्स को हर सतह के लिए 16 टेस्ट देने होंगे. 11वीं-12वीं में स्टूडेंड को 8 सब्जेक्ट्स में से हर ग्रुप के दो-दो सब्जेक्ट यानी कुल 16 सब्जेक्ट दो साल के दौरान पढ़ने होंगे.

बच्चे पसंद से चुनेंगे सब्जेक्ट

वहीं छात्रों को साल में दो बार होने वाले बोर्ड इम्तेहान में से अपने सबसे अच्छे स्कोर बनाए रखने की इजाजत होगी. एजुकेशन मिनिस्ट्री के मुताबिक अब बोर्ड इम्तेहान का मकसद स्टूडेंट्स में सब्जेक्ट की समझ की जांच करनी होगी. एक्सपर्ट का मानना है कि इस नए तरीके से कोचिंग और याद रखने की जरूरत में कमी आएगी. एजुकेशन मिनिस्ट्री ने बताया कि इसके अलावा, 11वीं और 12वीं क्लास में पढ़ाई के दौरान सब्जेक्ट को समिति नहीं चुनेगी. बच्चों को 11वीं और 12वीं क्लास में अपनी पसंद के सबजेक्ट चुनने की आजादी मिलेगी.

दो भाषा पढ़नी होंगी

एजुकेशन मिनिस्ट्री के मुताबिक क्लास 11 और 12 के बच्चों को कम से कम दो जबान पढ़नी होंगी. मिनिस्ट्री का कहना है कि 11वीं और 12वीं क्लास में पढ़ाई जाने वाली इन जबानों में से एक भारतीय जबान होनी चाहिए. यह करिकुलम ISRO के पूर्व सदर के कस्तूरीरंगन की कयादत में बनी एक एक टीम ने तैयार किया है. सिफारिशों को अपनाने के बाद एक बड़ा बदलाव होगा. 

चार स्टेज का है करिकुलम

गौरतलब है कि एजुकेशन मिनिस्ट्री की तरफ से बनाया गया नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के चार स्टेज हैं. इनमें फाउंडेशन, प्रीप्रेट्री, मिडिल और सेकेंड्री स्टेज शामिल हैं. NCF के मुताबिक करिकुलम तैयार करने में बोर्डों का कोई किरदार नहीं होना चाहिए. NCF में वोकेशनल, आर्ट्स, फिजिकल एजुकेशन को करिकुलम का एक हिस्सा माना गया है. इसके लिए बोर्डों को इन एरिया के लिए हाई क्वालिटी टेस्ट सिस्टम को तैयार करने की हिदायत दी गई है.

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Siraj Mahi

सिराज माही युवा पत्रकार हैं. देश, दुनिया और मनोरंजन की खबरों पर इनकी अच्छी पकड़ है. ज़ी मीडिया से पहले वह 'ईटीवी भारत' और 'दि संडे पोस्ट' जैसे मीडिया हाउस में काम कर चुके हैं. लिखने-पढ़ने के अलावा ...और पढ़ें

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