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Mulayam Singh Yadav: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या को हर साल पद्म पुरुस्कारों का ऐलान होता है. इस बार भी ठीक वैसा ही हुआ. सामने आई लिस्ट जब लोगों ने देखी तो एक नाम देखकर हर कोई हैरान रह गया. वो नाम था उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का. जो कुछ महीनों पहले ही इस दुनिया से रुख्सत हुए हैं. उनका नाम देखकर ना सिर्फ आम लोग बल्कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी हैरान रह गए होंगे. क्योंकि केंद्र नरेंद्र मोदी सरकार ने यह एक बड़ा दाव चला है और इसके पीछे उसको बड़ा मकसद दिखाई दे रहा है.
केंद्र सरकार की तरफ से लिए गए इस फैसले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के पास इस फैसले का स्वागत करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है. अखिलेश यादव पद्म अवॉर्ड में अपने पिता का नाम देखकर हैरान जरूर हुए होंगे, क्योंकि उन्हें भारतीय जनता पार्टी से इतनी जल्दी की उम्मीद नहीं होगी. खैर यह सम्मान मुलायम सिंह यादव को मिला जो इसके हकदार भी थे. लेकिन केंद्र के इस कदम के पीछे एक बड़ी 'चाल' नजर आ रही है.
दरअसल मुलायम सिंह भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ राजनीति करने वाले चंद बड़े नेताओं में से एक थे. ऐसे में भाजपा ने 2024 के चुनाव को नजर में रखते हुए यह कदम उठाया होगा. क्योंकि भाजपा के लिए अगले लोकसभा चुनाव में यादव वोट बेहद अहम होने वाला है. भारतीय जनता पार्टी मुलायम सिंह यादव की विरासत को अपने पाले में करना चाहती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया कुछ फैसले भी इस तरफ इशारा कर रहे हैं.
पहला कदम- कानपुर सबसे बड़े यादव नेता स्वर्गीय हरमोहन सिंह यादव की जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी ने शिरकत की.
दूसरा कदम- हरियाणा से सुधा यादव को भाजपा ने अपने टॉप बॉडी पार्लियामेंट बोर्ड में जगह दी.
तीसरा कदम- अब मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण से सम्मानित किया.
भारतीय जनता पार्टी यादवों की तरफ हाथ बढ़ा रही है और ठीक उसी तरह से यादवों को अपने पाले में करना चाहती है, जिस तरह अन्य जातियां सके साथ जुड़ी हुई हैं. हालांकि ये इतना आसान नहीं है. क्योंकि उत्तर प्रदेश अखिलेश यादव और बिहार में लालू यादव इन वोटों को आसानी छिटकने नहीं देंगे.
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