क्या कहता है कुरान: हश्र के दिन रोज़े-नमाज़ पर भारी पड़ सकते हैं आपके ये बुरे आमाल

ये पैग़ाम है क़ुरान का, यानी आप को अपने समाज के लिए, अपने मुआशरे के लिए, अपने रिश्तेदारों के लिए, ग़रीबों और मोहताजों के लिए, बहुत हक़ अदा करने हैं.

क्या कहता है कुरान: हश्र के दिन रोज़े-नमाज़ पर भारी पड़ सकते हैं आपके ये बुरे आमाल
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