हार के 'चक्रव्यूह' में उलझी धोनी की कप्तानी

बांग्लादेश से वनडे सीरीज में बुरी तरह हुई टीम इंडिया की हार ने कई सवाल खड़े किए है। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि यह वहीं टीम है जिसने इसी साल वर्ल्डकप में धमाकेदार प्रदर्शन कर सबका दिल जीत लिया था। भले ही टीम इंडिया सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार गई लेकिन टूर्नामेंट में वह बेहतर खेली इसमें कोई संदेह नहीं था। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की पिचों पर गेंद टप्पा खाने के बाद ज्यादा बाउंस होती है। इन पिचों पर हवा में गेंद स्विंग करती है, जिसे खेलना एशियाई बल्लेबाजों के लिए मुश्किल होता है। और ऐसी पिचों पर भारतीय टीम शानदार प्रदर्शन कर रही थी। लेकिन एशियाई पिच यानी बांग्लादेश की पिच पर भारतीय क्रिकेट के धुरंधरों की ऐसी गति होगी यह तो किसी ने सोचा भी नहीं था।

हार के बाद सबसे ज्यादा किसी की सिर-फुटव्वल होती है तो वह टीम का कप्तान होता है। जाहिर सी बात है कि इस बार भी हार को लेकर धोनी की छिछालेदार हो रही है। मीडिया उनपर सवाल खड़े कर रहा है कि क्या वह कप्तानी के लायक रह गये है या बीसीसीआई उन्हें सिर्फ ढोने का काम कर रही है। आलोचकों के निशाने पर धोनी लंबे समय से रहे हैं लेकिन इस बार बांग्लादेश के हाथों हुई हार के बाद मानो उन्हें तगड़ा मौका मिल गया हो। दूसरी तरफ धोनी ने कप्तानी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। धोनी ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा है कि अगर भारतीय क्रिकेट में जो भी बुरा हो रहा है उसके लिए वह जिम्मेदार हैं तो वह कप्तानी छोड़ने को तैयार हैं और एक खिलाड़ी के रूप में योगदान देंगे। धोनी यह कहना चाहते है कि वह खिलाड़ी पहले है और कप्तान बाद में। धोनी के भावुक बयान इशारा करते है कि क्रिकेट जीवन की उनकी प्राथमिकता कप्तानी नहीं बतौर खिलाड़ी खेलना है।

रविवार रात मीरपुर में दूसरा वनडे खत्‍म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में धोनी ने कहा कि मैं कभी भी कप्तान बनने की रेस में नहीं था, लेकिन यह मुझे यह जिम्मेदारी दे दी गई। अगर आप इसे (कप्तानी) मुझसे वापस लेते हैं तो भी मैं खुश रहूंगा, क्योंकि मेरे लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है देश के लिए खेलना और टीम की जीत में हिस्सा बनना।

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया के एक ऐसे कप्तान हैं जिनके खाते में बेशुमार कामयाबियां दर्ज है। वह एकमात्र ऐसे कप्तान है जिन्होंने आईसीसी के सभी फॉर्मेट के टूर्नामेंट जीते हैं। बतौर विकेटकीपर सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी धोनी के नाम पर ही है। धोनी ने अपनी कप्तानी में भारत को 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 में आईसीसी वर्ल्ड कप दिलाया। धोनी की कप्तानी में भारत टेस्ट और वनडे दोनों में नंबर-1 रह चुका है। इसके साथ ही वे खुद भी वनडे में नंबर-1 रह चुके हैं।

धोनी टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके है। जब वर्ल्ड कप में भारत बाहर हो गया तो लगने लगा कि धोनी वनडे से भी संन्यास ले लेंगे लेकिन धोनी ने यह कहकर सभी अटकलों पर विराम लगा दिया कि वह अपनी अगुवाई में टी-20 टूर्नामेंट खेलना चाहते है। गौर हो कि धोनी ने साल 2014 में ऑस्‍ट्रेलिया टेस्‍ट सीरीज के बीच अचानक से टेस्‍ट क्रिकेट से संन्‍यास ले लिया था। धोनी ने कुल 90 टेस्‍ट मैच खेले। धोनी के इस फैसले से पूरा क्रिकेट जगत अचंभित रह गया था।

धोनी ने अबतक 264 वनडे मैच खेले हैं जिसमें वह 66 बार नाटआउट रहे हैं और 52.14 रन की औसत से 8551 रन रन बनाए है जिसमें 9 सेंचुरी और 58 हाफ सेंचुरी शामिल है। दूसरी तरफ टी-20 टूर्नामेंट की बात करे तो 50 मैच में वह 20 बार नाटआउट रहे है, 33.96 की औसत से उन्होंने 849 रन बनाए है।

धोनी की कप्तानी के रिकार्ड भी शानदार है। हालांकि एक खिलाड़ी के रूप में अब उनका खेल पहले जैसा नहीं रह गया है इसमें कोई दो राय नहीं है। अब वह अपनी धारदार बैटिंग के जरिए रनों का आग उगलने की क्षमता खो चुके है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या धोनी का विकल्प टीम इंडिया को मिल गया है? क्या विराट कोहली वनडे में उनके बेहतर विकल्प साबित हो सकते है? क्योंकि एक खिलाड़ी के रूप में विराट का बल्ला हर बार आज की तारीख में तेजी से लड़खड़ताता जा रहा है। ऐसी में कप्तानी की बागडोर को वह किस तरह से संभाल पाएंगे। यह सोचने वाली बात है।

जिस वक्त धोनी ने कप्तानी की बागडोर संभाली थी तब वह अपने बल्ले से रनों की बरसात बखूबी करते थे। कप्तान के रूप में जिम्मेदारियां बड़ी होती है लिहाजा उस अमुक खिलाड़ी के पास ऐसा कुछ जरूर होना चाहिए जिसे वह बतौर खिलाड़ी खुद को जस्टिफाई कर सके और टीम के दूसरे खिलाड़ी उससे प्रेरित हो सके। धोनी एक बेहतर कप्तान हैं जिसका कोई तगड़ा विकल्प टीम इंडिया के पास फिलहाल मिलता नहीं दिखता । लेकिन क्या बिना धोनी टीम इंडिया उस लय में लौट पाएगी जिसकी राह क्रिकेट प्रेमी देख रहे है। धोनी अगर किसी कारणवश कप्तानी छोड़ते है या हटाए जाते है तो फिर बतौर खिलाड़ी किस प्रकार का खेल पाएंगे? यह कहना मुश्किल है। लेकिन धोनी की कप्तानी का मसला बीसीसीआई के लिए एक गंभीर चिंतन और मंथन का सबब है जिसपर उसे सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए।