RBI से उर्जित पटेल के इस्तीफे के पीछे हो सकते हैं ये 3 बड़े कारण

पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आने से पहले ही उर्जित पटेल ने सोमवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया. पटेल ने अपने इस्तीफे का कारण निजी बताया है. लेकिन जानकार इसके पीछे कुछ और ही कारण बता रहे हैं.

RBI से उर्जित पटेल के इस्तीफे के पीछे हो सकते हैं ये 3 बड़े कारण

नई दिल्ली : पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आने से पहले ही उर्जित पटेल ने सोमवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया. पटेल ने अपने इस्तीफे का कारण निजी बताया है. लेकिन जानकार इसके पीछे कुछ और ही कारण बता रहे हैं. दरअसल पिछले काफी दिनों से केंद्र सरकार और आरबीआई के बीच विवाद चल रहा था. इन विवादों के सामने आने के दौरान उस समय भी बीच-बीच में पटेल की इस्तीफे की अटकलें चल रही थी. लेकिन 19 नवंबर को हुई बोर्ड बैठक से पहले इन विवादों के निपटाने की बात कही गई थी. उर्जित पटेल ने सोमवार शाम को जैसे ही इस्तीफे की घोषणा की तो सब चौंक गए. ऐसे में जानकार उनके इस्तीफे के पीछे तीन अहम कारण मान रहे हैं. आइए नजर डालते हैं उन तीन अहम कारणों पर जिसकी वजह से ऐसा कहा जा रहा है कि उन्होंने इस्तीफा दिया.

रिजर्व फंड
आरोप लग रहे हैं कि सरकार की मंशा थी कि आरबीआई अपने रिजर्व से सरकार को कुछ फंड दें. ऐसा राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाने के लिए किए जाने की बात कही जा रही थी. हालांकि इस पर पिछले दिनों वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक बयान के माध्यम से यह साफ किया था कि सरकार को अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाने के लिये रिजर्व बैंक अथवा किसी अन्य संस्था से कोई अतिरिक्त धन नहीं चाहिए.

11 बैंकों पर प्रतिबंध
रिजर्व बैंक ने बड़ा कर्ज बट्टे खाते में जाने के बाद 11 बैंकों को कर्ज देने और नई ब्रांच खोलने से रोक दिया था. जबकि सरकार की मंशा थी कि इनमें से कुछ बैंक फिर से कर्ज देना शुरू कर दें. सरकार की तरफ इस मामले पर लगातार दबाव बनाने के बाद आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा भी था कि आरबीआई की आजादी को कमजोर करने के परिणाम अच्छे नहीं होंगे. इसके बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया था.

एनबीएफसी पर तनातनी
उर्जित पटेल के इस्तीफे का अंतिम और अहम कारण नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) माना जा रहा है. सरकार चाहती थी कि नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए लोन देने की शर्तों को आसान किया जाए. लेकिन इस पर आबीआई का तर्क था कि इससे इससे डूबने वाला कर्ज बढ़ सकता है. सरकार का मानना था कि लोन की शर्तों को आसान करने से बाजार में खरीदारी में तेजी आएगी. 

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