close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

वो 10 बड़े काम जो अरुण जेटली ने भारतीय अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए किए

नेता के रूप में देश के पूर्व वित्त मंत्री, कानून मंत्री, सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री और नेता विपक्ष जैसे अहम पदों पर रह चुके थे.

वो 10 बड़े काम जो अरुण जेटली ने भारतीय अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए किए

नई दिल्ली: अरुण जेटली के निधन पर हर कोई शोक में है. अरुण जेटली महज एक नाम नहीं है. यह नाम सुनते ही उनकी कई तस्वीरें सामने आती हैं. नेता के तौर पर पहली तस्वीर में वह पीएम मोदी के पहले शासनकाल में पांच सालों तक देश के वित्त मंत्री रहे. उससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में वे सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री, कानून मंत्री, कंपनी अफेयर एंड शिपिंग मंत्री रह चुके थे. वहीं, वे देश के मशहरू वकीलों में से एक थे. वे विद्वान के साथ-साथ वाकपटुता के धनी थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर कहा मैंने एक अच्छे दोस्त को खो दिया है. उन्हें मोदी सरकार का संकटमोटक भी कहा जाता था.

जब वे पहली बार देश के वित्त मंत्री बने, तो उन्होंने अर्थव्यवस्था में सुधार को लेकर कई ऐतिहासिक फैसले लिए. साथ ही उनके कार्यकाल के दौरान कई अहम योजनाओं की शुरुआत हुई. इन योजनाओं का महत्व पांच सालों के बाद दिख रहा है. देश-दुनिया में इन योजनाओं की तारीफ की जा रही है. आइये कुछ प्रमुख योजनाओं के बारे में जानते हैं.

1. वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने GST कानून को लागू किया. 1 जुलाई 2017 को इस कानून को पूरे देश में लागू किया गया. GST की वजह से आज इंस्पेक्टर राज शब्द के बारे में कभी-कभी सुनने को मिलता है. सारी प्रक्रिया ऑनलाइन और सरल हो गई है. GST कलेक्शन हर महीने लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का है. सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि इस कलेक्शन में बढ़ावा हो और चीजें और ज्यादा आसान हो.

2. कालेधन के खिलाफ उनके शासनकाल में नोटबंदी जैसे ऐतिहासिक फैसले लिए गए. 500 और 1000 रुपये का नोट रातों रात बैन कर दिया गया. कानूनी वैधता समाप्त होने से लाखों लोग जिनके पास अकूत कैश था वह बर्बाद हो गया. साथ ही करोड़ों की संख्या में नये टैक्स पेयर्स सिस्टम में आ गए. टैक्स कलेक्शन बढ़ा है. 

3. उन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 को पहली बार लागू किया था. आर्थिक जगत के लिए यह बहुत बड़ा कदम है. इस कानून में जरूरत के हिसाब से अब तक कई अहम बदलाव किए जा चुके हैं. यही एक कानून है जिसे बिजनेस वर्ल्ड में "राइट टू एग्जिट" कहा जाता है. इसकी वजह से बैंकों पर NPA का बोझ भी कम हुआ है. बैलेंस शीट लगातार साफ होते जा रहे हैं.

4. मुद्रा योजना को मोदी शासनकाल-1 में लॉन्च किया गया था. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है. 2015 में इस योजना की शुरुआत की गई थी. इस स्कीम के तहत युवाओं को स्वरोजगार के लिए लोन दिया जाता है. महिलाओं को लोन में प्राथमिकताएं मिलती हैं. सरकार इसके जरिए स्वरोजगार को बढ़ावा देना चाहती है.

वित्त मंत्री के रूप में अरुण जेटली के 10 क्रांतिकारी फैसले, जो इतिहास में दर्ज हो गए

5. Fugitive Economic Offenders Act. इस कानून को अप्रैल 2018 में लागू किया गया था. इसके तहत लोन चुकाने के डर से देश छोड़ने वालों को आर्थिक रूप से भगोड़ा घोषित किया जाता है. आर्थिक भगोड़ा घोषित होने के बाद उसकी संपत्तियों को जांच एजेंसियां सीज कर कर सकती हैं.

6. रियल स्टेट के क्षेत्र में RERA कानून (Real Estate Act 2016) एक बहुत बड़ा सुधार माना जाता है. यह कानून होम बायर्स को सुरक्षित करता है, साथ ही निवेश की संभावनाओं को खोलता है.

7. उनके शासनकाल में प्रधानमंत्री जनधन अकाउंट योजना की शुरुआत की गई. आज वर्तमान में 40 करोड़ से ज्यादा जनधन अकाउंट हैं. इन अकाउंट में 1 लाख करोड़ से ज्यादा रुपये जमा हैं. साथ ही सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ लाभार्थी के अकाउंट में जाता है. इससे कमीशन खाने वालों पर रोक लग गई.

8. आयुष्मान भारत: आयुष्मान भारत पीएम मोदी की एक बड़ी उपलब्धि है. अपने आखिरी बजट (2018-19) में उन्होंने इस स्कीम का ऐलान किया था. इसके तहत लाभार्थियों के परिवार को 5 लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलता है.

हर मोर्चे पर अपनी काबिलियत को बखूबी साबित करते थे अरुण जेटली, पढ़ें उनके बारे में रोचक तथ्‍य

9. मेक इन इंडिया स्कीम के तहत उन्होंने FDI का रास्ता खोला. ईज ऑप डूइंग बिजनेस में भारत का रैंक ऊपर हुआ. निवेशकों को लुभाने के लिए और निवेश की रफ्तार को  बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने कार्यकाल में FDI के नियमों को आसान किया. इससे विदेशी निवेशक बड़ी संख्या में भारत में निवेश करने लगे.

10. उनका मानना था कि जब तक SME सेक्टर में विकास नहीं होगा सभी को रोजगार नहीं दिए जा सकते हैं. इसलिए, उन्होंन स्टार्टअप योजना की शुरुआत की. एंजल इंवेस्टमेंट स्कीम की शुरुआत हुई. नई कंपनियों को टैक्स में छूट दी गई. बैंक से स्पेशल और सस्ते लोन मिलने लगे. इस तरह रिजनल मार्केट को मजबूत करने की तमाम कोशिशें हुईं.