भाकपा ने अदाणी को SBI ऋण मामले में RBI से हस्तक्षेप की मांग की

कांग्रेस के बाद भाकपा ने भी भारतीय स्टेट बैंक द्वारा अदाणी ग्रुप को एक अरब डालर का ऋण देने के तर्क पर सवाल खड़ा करते हुए आज भारतीय रिजर्व बैंक से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की।

चेन्नई: कांग्रेस के बाद भाकपा ने भी भारतीय स्टेट बैंक द्वारा अदाणी ग्रुप को एक अरब डालर का ऋण देने के तर्क पर सवाल खड़ा करते हुए आज भारतीय रिजर्व बैंक से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की।

उल्लेखनीय है कि स्टेट बैंक ने अदाणी ग्रुप को एक अरब डालर का कर्ज मंजूर किया है। कांग्रेस ने इसकी आलोचना करते हुए कहा है कि यह कर्ज ऐसे समय मंजूर किया गया जबकि कंपनी के मालिक तथा एसबीआई के प्रमुख प्रधानमंत्री के कारोबारी प्रतिनिधि मंडल में शामिल थे। भाकपा ने एसबीआई के इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया है कि उसने तो अदाणी ग्रुप के साथ केवल ‘सहमति पत्र’ पर हस्ताक्षर किए हैं और रिण तो ‘पूरी जांच परख’ के बाद ही दिया जाएगा।

भाकपा के महासचिव एस सुधाकर रेड्डी ने संवाददाताओं से कहा, ‘यह तो सिर्फ शब्दावली है। उसने (सीबीआई ने) इनकार नहीं किया है और न ही यह कहा है कि हमने फैसला नहीं किया है। उन्होंने केवल यह कहा है कि अंतिम फैसला बोर्ड करेगा।’ उन्होंने कहा, ‘फैसला कर लिया गया है और इस फैसले को केवल शाब्दिक (टेक्नीक्ल) मंजूरी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अदाणी ग्रुप को इस ऋण की मंजूरी ‘कुल मिलाकर भाजपा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों द्वारा किसी ग्रुप विशेष को समर्थन है।’

क्या भाकपा इस मामले में रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप चाहती है, यह पूछे जाने पर राज्यसभा सदस्य डी राजा ने कहा, ‘निश्चित रूप से, भारतीय रिजर्व बैंक के पास इस तरह के संदिग्ध रिण की समीक्षा का अधिकार है।’ वहीं भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि भारतीय स्टेट बैंक द्वारा अदाणी ग्रुप को रिण दिया जाना बैंक व उद्योग के बीच का सौदा है और इस मामले में सरकार की कोई भूमिका नहीं है। इसके साथ ही भाजपा ने इस मामले में प्रधानमंत्री का नाम घसीटने के लिए कांग्रेस की आलोचना की है।