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लौह-इस्पात आयात शुल्क पर जापान ने भारत को घसीटा

जापान ने लौह एवं इस्पात उत्पादों के आयात पर कुछ कदमों को लेकर भारत को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में घसीटा है।

जिनेवा : जापान ने लौह एवं इस्पात उत्पादों के आयात पर कुछ कदमों को लेकर भारत को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में घसीटा है।

डब्ल्यूटीओ ने कहा, ‘20 दिसंबर को जापान ने डब्ल्यूटीओ सचिवालय को अधिसूचित किया है कि उसने लौह एवं इस्पात उत्पादों के आयात पर कुछ उपायों के लिए भारत के साथ विवाद सुलझाने का आग्रह किया है। भारत ने कुछ लौह एवं इस्पात उत्पादों के आयात पर न्यूनतम आयात शुल्क (मिप) लगाया है।

इस साल फरवरी में भारत ने 173 उत्पादों पर छह महीने के लिए न्यूनतम आयात शुल्क लगाया था। बाद में इसे दो बार दो महीने का विस्तार दिया गया। इससे पहले इसी महीने सरकार ने 19 उत्पादों पर न्यूनतम आयात शुल्क की अवधि बढ़ाकर 4 फरवरी, 2017 कर दी।

वाणिज्य मंत्रालय सू़त्रों के अनुसार डब्ल्यूटीओ के अनुपालन उपायों मसलन डंपिंग रोधी शुल्क का इस्तेमाल इस्पात जैसे जिंसों के सस्ते आयात का मुकाबला करने के लिए किया जाता है, क्योंकि न्यूनतम आयात शुल्क लगाना वैश्विक व्यापार नियमों के अनुरूप नहीं है।

भारत ने इस्पात पर न्यूनतम आयात शुल्क इसलिए लगाया है क्योंकि चीन, जापान और कोरिया जैसे इस्पात अधिशेष वाले देशों से बाजार बिगाड़ने वाले मूल्य पर इस्पात का आयात सितंबर 2014 से घरेलू उद्योग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

भारत ने घरेलू कंपनियों को सस्ते आयात से संरक्षण के लिए कुछ इस्पात उत्पादों पर डंपिंग रोधी शुल्क भी लगाया है। जापान ने अब जो मामला दायर किया है तो इस मुद्दे पर द्विपक्षीय विचार विमर्श होगा। डब्ल्यूटीओ की विवाद निपटान प्रक्रिया के तहत विवाद निपटाने को विचार विमर्श पहला कदम होता है।