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जेपी इंफ्राटेक मामले में सुनवाई आज, बायर्स के हित में सरकार को लाना है प्रस्ताव

जेपी इंफ्राटेक (Jaypee Infra) मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा. जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ मामले की सुनवाई करेगी.

जेपी इंफ्राटेक मामले में सुनवाई आज, बायर्स के हित में सरकार को लाना है प्रस्ताव

नई दिल्ली : जेपी इंफ्राटेक (Jaypee Infra) मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा. जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ मामले की सुनवाई करेगी. पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वह ऐसे घर खरीदारों की शिकायतों का समाधान करने के लिए 'एक समान प्रस्ताव' पर काम कर रहा है, जो अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई रियल एस्टेट कंपनियों को देने के बाद फंस जाते हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर जेपी इंफ्राटेक मामले में 21 हजार से अधिक घर खरीदारों की शिकायतों का समाधान नहीं किया गया, तो वह उनके हितों की रक्षा के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई तक टाल दी थी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के समक्ष निर्णय पर पहुंचने के लिए आम सहमति बनाने का प्रयास करने को कहा. केंद्र ने कोर्ट से कहा था कि एनसीएलएटी 17 जुलाई को मामले पर सुनवाई करेगी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 18 जुलाई तक टाल दी थी. केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान ने कोर्ट को बताया था कि एनसीएलएटी के समक्ष 17 जुलाई को सुनवाई होने वाली है और इसलिए इसके नतीजे का इंतजार करना बेहतर होगा.

सरकार से एक समान प्रस्ताव पेश करने को कहा
उन्होंने कहा था कि केंद्र एक समान प्रस्ताव पर काम कर रहा है ताकि पीड़ित घर खरीदारों की विभिन्न शिकायतों को दूर किया जा सके और इसे 23 जुलाई तक लंबित यूनिटेक घर खरीदारों के मामले में शीर्ष कोर्ट के निर्देशानुसार प्रस्तुत किया जाएगा. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई को केंद्र से लाखों ऐसे घर खरीदारों की समस्याओं को हल करने के लिए 'एक समान प्रस्ताव' पेश करने को कहा था, जो बिल्डरों को भारी रकम चुकाने के बावजूद अब तक अपने फ्लैटों का कब्जा हासिल नहीं कर सके हैं.

कोर्ट जेआईएल से संबंधित एक घर खरीदार के मामले पर सुनवाई कर रही थी. कोर्ट ने कहा था कि यह मुद्दा लाखों फ्लैट खरीदारों से जुड़ा हुआ है और केंद्र को इसका समाधान करने के लिए एक ठोस प्रस्ताव देना चाहिए.