3 तरह के होते हैं Provident Fund, जानें तीनों के बीच अंतर और कितना मिलता है लाभ

EPF, PPF और GPF तीन अलग-अलग तरह के सेविंग्स हैं. तीनों पर ब्याज की दर भी अलग-अलग है

3 तरह के होते हैं Provident Fund, जानें तीनों के बीच अंतर और कितना मिलता है लाभ
EPF पर 8.65 फीसदी ब्याज दर मिलती है. (फाइल)

नई दिल्ली: प्रोविडेंट फंड के बारे में हम सभी जानते हैं. यह राशि कर्मचारियों के भविष्य के लिए सुरक्षित रखी जाती है. हाल ही में PF पर ब्याज दर बढ़ा कर 8.65 फीसदी कर दी गई है. लेकिन, क्या आपको मालूम है कि प्रोविडेंट फंड (PF) तीन तरह के होते हैं. पहला एम्प्लॉय प्रोविडेंट फंड (EPF), दूसरा जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) और तीसरा पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) होता है. तीनों में बहुत अंतर होता है जिसके बारे में आपको बताने जा रहे हैं. सरकार की तरफ से समय-समय पर तीनों पर मिलने वाली ब्याज दर में बदलाव किया जाता है.

क्या होता है EPF?
EPF की राशि हर कर्मचारी की सैलरी से काटी जाती है. बेसिक सैलरी का 12 फीसदी कर्मचारी के वेतन से EPF में जमा होता है. 12 फीसदी कंपनी भी देती है, जिसमें 8.33 फीसदी आपके पेंशन स्कीम (EPS) अकाउंट में और बाकी 3.67 फीसदी EPF में जमा होता है. 

अगर किसी कंपनी में 20 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं तो उसे EPF लागू करना होगा. वित्त वर्ष 2018-19 में EPF पर ब्याज दर बढ़ा कर 8.65 फीसदी कर दी गई है. जब नौकरी बदलते हैं तो पुराने PF अकाउंट को बंद करवा सकते हैं या फिर इसे ट्रांसफर भी करवाया जा सकता है. इस राशि का कुछ हिस्सा निकाला भी जा सकता है.

क्या होता है GPF?
जनरल प्रोविडेंट फंड केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए होता है. प्राइवेट कर्मचारियों के लिए EPF होता है. GPF पर 8 फीसदी ब्याज दर मिलती है. अगर कोई सरकारी कर्मचारी सस्पेंड हो जाता है तो वह GPF में जमा नहीं कर सकता है. जब कोई सरकारी कर्मचारी रिटायर होने वाला होता है तो, रिटायरमेंट से तीन महीने पहले GPF अकाउंट बंद हो जाता है. इस पर वर्तमान में 8 फीसदी ब्याज दर मिलती है. सरकारी कर्मचारी इसके एवज में एडवांस लोन भी उठा सकता है, जिसके बदले उसे ब्याज नहीं चुकाना होता है. लोन की राशि EMI के रूप में चुकानी होगी.

क्या होता है PPF?
पब्लिक प्रोविडेंट फंड बैंकों और डाक की तरफ से ऑफर किया जाता है. यह निवेश का साधन है जिसका इस्तेमाल कोई भी कर  सकता है. इसके तहत जितना निवेश किया जाता है वह 80C के तहत आता है और इनकम टैक्स में राहत मिलती है. वर्तमान में इस पर 8 फीसदी ब्याज दर मिलती है.