close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

कल सुबह 11 बजे पहला बजट पेश करेंगी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, ये हैं चुनौतियां

बजट से ठीक एक दिन पहले वित्तमंत्री ने संसद में इकोनॉमिक सर्वे 2018-19 पेश किया. उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में विकास की दर 7 प्रतिशत होगी.

कल सुबह 11 बजे पहला बजट पेश करेंगी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, ये हैं चुनौतियां
फाइल फोटो.

नई दिल्ली: कल सुबह 11 बजे वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी. आज सदन में आर्थिक सर्वे 2018-19 पेश किया गया, जिसमें सरकार की तरफ से एक साल के दौरान किए गए कामों की जानकारी दी गई. साथ ही, अगले वित्त वर्ष की कार्ययोजना के बारे में भी बताया गया. इस बजट से हर सेक्टर को काफी उम्मीदें हैं. बता दें, निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला वित्तमंत्री हैं. हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाल चुकी हैं. निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला रक्षा मंत्री भी थीं.

सदन में आर्थिक सर्वे पेश करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में देश की विकास दर 7 फीसदी के आसपास होगी. इस रफ्तार को बढ़ा कर 8 फीसदी तक ले जाना है, क्योंकि 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर (5 लाख करोड़ डॉलर) की इकोनॉमी बनाने के लिए इतनी रफ्तार जरूरी है. आर्थिक सर्वे के कवर पेज पर निवेश और रोजगार को जगह दी गई है. इससे सरकार की मंशा साफ है कि इन दो बिंदुओं पर विशेष फोकस होगा.

#EconomicSurvey: इस कवर पेज से झलकता है मोदी सरकार का प्लान, जानें क्या है खास

आर्थिक चुनौतियों की बात करें तो, विकास की रफ्तार घटकर 6.8 फीसदी पर आ गई है. वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में तो यह विकास दर घटकर 5.8 फीसदी पर पहुंच गई थी जो पिछले पांच सालों में सबसे कम है. रोजगार को लेकर पिछले दिनों भयावह रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके मुताबिक बेरोजागारी दर 45 सालों में उच्चतम स्तर पर है.

सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली कंपनियां मोदी सरकार से मांग रही हैं टैक्स में छूट

आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, मांग में जबतक बढ़ोतरी नहीं होगी, विकास रफ्तार नहीं पकड़ सकती है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ाने की जरूरत है. साथ ही कृषि क्षेत्र में विकास की भी जरूरत है. इसके लिए जरूरी है कि किसानों और कृषि में सुधार के लिए अहम फैसले लिए जाएं. अनिश्चित मॉनसून की वजह से सिंचाई योजनाओं में तेजी लाने की जरूरत है. दूसरी तरफ, लिक्विडिटी की कमी को दूर करने के लिए रिजर्व बैंक लगातार कोशिश कर रहा है. इस साल अब तक रेपो रेट में 75 प्वाइंट्स की कटौती की जा चुकी है.