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ICC World Cup में कब आए रंगीन कपड़े या 50 ओवर के मैच; 44 साल और हर वर्ल्ड कप में ऐसे बदला खेल

आईसीसी वर्ल्ड कप गुरुवार (30 मई) को तीन बजते (भारतीय समय) ही शुरू हो जाएगा. पहले मुकाबले में इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका आमने-सामने होंगे. 

ICC World Cup में कब आए रंगीन कपड़े या 50 ओवर के मैच; 44 साल और हर वर्ल्ड कप में ऐसे बदला खेल
आईसीसी वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ कपिल देव, एमएस धोनी और माइकल क्लार्क. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: आईसीसी वर्ल्ड कप का इंतजार खत्म हुआ. बस कुछ घंटे और खेल शुरू.... गुरुवार (30 मई) को तीन बजते (भारतीय समय) ही यह वर्ल्ड कप (World Cup 2019) शुरू हो जाएगा. पहले मुकाबले में मेजबान इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका (South Africa vs England) आमने-सामने होंगे. जब तक यह वर्ल्ड कप (ICC World Cup) शुरू नहीं होता है, तब तक क्रिकेटप्रेमी नए चैंपियन के बारे में कयास लगा सकते हैं या फिर पहले हो चुके वर्ल्ड कप को याद कर सकते हैं. 

आईसीसी विश्व कप का यह सफर 44 साल पहले 1975 में हुआ था. दिलचस्प बात यह है कि भले ही दुनिया में महिला क्रिकेट के मुकाबले पुरुष क्रिकेट बेहद लोकप्रिय हो. लेकिन हकीकत यह भी कि क्रिकेट का पहला वर्ल्ड कप महिलाओं का खेला गया था. 1973 में खेले गए इस वर्ल्ड कप को इंग्लैंड ने जीता था. इसके दो साल बाद पुरुषों का विश्व कप खेला गया. 

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1. पहला वर्ल्ड कप और सनी के 36 ‘स्पेशल रन’ 
पहला विश्व कप 1975 में इंग्लैंड में खेला गया. इसमें आठ टीमों ने हिस्सा लिया. इन टीमों के बीच 15 मैच खेले गए. वेस्टइंडीज फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराकर पहला विश्व चैंपियन बना. भारत ने इस विश्व कप में तीन मैच खेले. वह सिर्फ ईस्ट अफ्रीका को हरा सका. वह इंग्लैंड और न्यूजीलैंड से हार गया. भारतीय क्रिकेट के लिहाज से देखें तो लोग आज भी सुनील गावस्कर की 36 रन की पारी को यादकर हैरान होते हैं. गावस्कर ने इंग्लैंड के खिलाफ 174 गेंदों पर 36 रन बनाए थे और अंत तक आउट नहीं हुए थे. 

2. दूसरा वर्ल्ड कप, भारत एक भी मैच नहीं जीता 
दूसरा विश्व कप 1979 में इंग्लैंड में ही खेला गया. इसमें भी आठ टीमों ने हिस्सा लिया. इन टीमों के बीच 15 मैच खेले गए. वेस्टइंडीज फाइनल में इंग्लैंड को हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बना. भारत इस विश्व कप में अपने तीनों मैच हार गया. उसे वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड और नौसिखिए श्रीलंका ने मात दी. श्रीलंका को तब टेस्ट टीम का दर्जा हासिल नहीं था. उसे एसोसिएट टीम के तौर पर वर्ल्ड कप खेलने के लिए बुलाया गया था. यह कपिल देव का पहला विश्व कप था. 

3. तीसरा वर्ल्ड कप, जिसने बदल दी क्रिकेट की सूरत 
तीसरा विश्व कप 1983 में इंग्लैंड में ही खेला गया. इस बार भी आठ टीमों ने हिस्सा लिया. लेकिन मैचों की संख्या बढ़ाकर 27 कर दी गई. पिछले प्रदर्शन को देखते हुए भारत को इस बार भी कोई भी भाव नहीं दे रहा था. लेकिन कपिल देव की करिश्माई कप्तानी में भारत ने वेस्टइंडीज की ‘अजेय’ टीम को दो बार हराया और इस तरह दुनिया को नया विश्व चैंपियन मिला. कपिल देव की इस टीम की जीत ने क्रिकेट को भारत के घर-घर में पहुंचा दिया. भारत के क्रिकेट महाशक्ति बनने की शुरुआत इसी जीत से हुई. 

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4. भारत की मेजबानी और 50 ओवर के मैच
चौथा विश्व कप 1987 में भारत में खेला गया. पाकिस्तान भी सह-मेजबान था. इस बार भी आठ टीमों के बीच 27 मैच खेले गए. वर्ल्ड कप में पहली बार 60 की बजाय, अधिकतम 50 ओवरों के मैच खेले गए. इस विश्व कप और पिछले तीन विश्व कप में सबसे बड़ा अंतर यह था कि इस बार कप जीतने के तीन नहीं, पांच दावेदार थे. वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड हमेशा की तरह दावेदार थे. हालांकि, बदलाव के दौर से गुजर रह ऑस्ट्रेलिया की टीम को थोड़ा कम भाव मिल रहा था. भारत और पाकिस्तान भी दावेदार थे. सेमीफाइनल में भारत, इंग्लैंड, पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया पहुंचे. फाइनल एलन बॉर्डर की ऑस्ट्रेलियाई टीम ने जीता. 

5. ऑस्ट्रेलिया पहुंचते ही रंगीन हो गया वर्ल्ड कप 
पांचवां विश्व कप 1992 में ऑस्ट्रेलिया में खेला गया. न्यूजीलैंड भी सह-मेजबान था. यह वर्ल्ड कप राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में हुआ. नौ टीमों के बीच 39 मैच खेले गए. वर्ल्ड कप काफी बदले अंदाज में खेला गया. पहली बार क्रिकेटर सफेद कपड़ों की बजाय रंगीन कपड़ों में उतरे. पहली बार 30 गज के सर्किल वाले नियम लागू हुए. दक्षिण अफ्रीका की पहली बार वर्ल्ड कप में एंट्री हुई. मेजबान न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और पाकिस्तान सेमीफाइनल में पहुंचे. पाकिस्तान मौजूदा प्रधानमंत्री और तत्कालीन कप्तान इमरान खान की अगुवाई में चैंपियन बना. इंग्लैंड तीसरी बार फाइनल हारा. 

6. चैंपियन श्रीलंका ने बदल दी वनडे क्रिकेट की शैली 
छठा विश्व कप 1996 में भारत में खेला गया. श्रीलंका और पाकिस्तान भी सह-मेजबान था. यह वर्ल्ड कप फिर से ग्रुप एंड नॉकआउट फॉर्मेट में हुआ. 12 टीमों के बीच 37 मैच खेले गए. श्रीलंका ने भारत को हराकर फाइनल में प्रवेश किया. दूसरे सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज को मात दी. इसके बाद फाइनल में श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को हराया. यह पहला मौका था, जब कोई सहमेजबान टीम विश्व चैंपियन बनी थी. इस विश्व कप की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि श्रीलंका ने हर मैच में शुरुआती 15 ओवरों में ताबड़तोड़ बैटिंग की. यह पहला मौका था, जब शुरुआती 15 ओवर में 100 से 120 रन बनने लगे. बाद में यह शैली हर टीम ने अपनाई. 

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7. शुरू हुआ ऑस्ट्रेलियाई बादशाहत का दौर 
सातवां विश्व कप 1999 में इंग्लैंड में खेला गया. इस बार 12 टीमों के बीच 42 मैच खेले गए. ऑस्ट्रेलिया की टीम ने पाकिस्तान को हराकर यह वर्ल्ड कप जीता. वह दूसरी बार चैंपियन बना. यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के दबदबे की शुरुआत थी. भारत की टीम सेमीफाइनल में भी नहीं पहुंची. हालांकि, इसके बावजूद टूर्नामेंट में सबसे अधिक रन बनाने का श्रेय भारत के राहुल द्रविड़ (461) के नाम रहा. 

8. ऑस्ट्रेलिया ने जीता तीसरा खिताब 
आठवां विश्व कप 2003 में दक्षिण अफ्रीका में खेला गया. इस बार 14 टीमों के बीच 54 मैच खेले गए. फाइनल ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच खेला गया. भारत के पास दूसरा विश्व खिताब जीतने का मौका था. लेकिन सौरव गांगुली की टीम इंडिया यह मौका चूक गई. ऑस्ट्रेलिया की टीम ने भारत को हराकर लगातार दूसरा और कुल मिलाकर तीसरी बार वर्ल्ड कप जीता. भारत के सचिन तेंदुलकर (673) टूर्नामेंट में सबसे अधिक रन बनाने वाले क्रिकेटर रहे. 

9. ऑस्ट्रेलिया की हैट्रिक और भारत का बेदम प्रदर्शन 
नौवां विश्व कप 2007 में वेस्टइंडीज में खेला गया. इस बार 16 टीमों के बीच 51 मैच खेले गए. फाइनल ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के बीच खेला गया. ऑस्ट्रेलिया की टीम ने श्रीलंका को हराकर खिताबी हैट्रिक बनाई. वैसे यह उसकी चौथी विश्व कप ट्रॉफी थी. भारतीय टीम इस विश्व कप के दूसरे राउंड में भी नहीं पहुंच सकी. वह ग्रुप मैचों में ही श्रीलंका और बांग्लादेश दोनों से हार गई. 

10. एमएस धोनी की टीम बनी चैंपियन 
10वां विश्व कप 2011 में भारत में खेला गया. पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश भी सहमेजबान थे. इस बार 14 टीमों के बीच 49 मैच खेले गए. फाइनल मेजबान भारत और सहमेजबान श्रीलंका के बीच खेला गया. एमएस धोनी की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने श्रीलंका को हराकर दूसरी बार विश्व खिताब जीता. भारत 28 साल बाद दोबारा विश्व चैंपियन बना और सचिन तेंदुलकर को अपने छठे विश्व कप में विजेता ट्रॉफी चूमने का मौका मिला. युवराज सिंह मैन ऑफ द सीरीज चुने गए. 

11. ऑस्ट्रेलिया का कमबैक, कीवी फिर हारे 
11वां विश्व कप 2015 में ऑस्ट्रेलिया में खेला गया. इस बार 14 टीमों के बीच 49 मैच खेले गए. इस बार चैंपियन बनने की सबसे बड़ी दावेदार टीमों में भारतीय टीम भी शामिल थी. लेकिन वह सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार गई. ऑस्ट्रेलिया यहीं नहीं रुका और उसने फाइनल में पड़ोसी टीम न्यूजीलैंड को मात दी. यह ऑस्ट्रेलिया का पांचवां विश्व खिताब था. न्यूजीलैंड के मार्टन गप्टिल (547) टूर्नामेंट में सबसे अधिक रन बनाने वाले क्रिकेटर रहे. न्यूजीलैंड के ही ट्रेंट बोल्ट और ऑस्ट्रेलिया के मिचेल स्टार्क ने सबसे अधिक 22-22 विकेट झटके.