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पंजाब में पराली जलाने के मामले 30 फीसदी बढ़े, एनसीआर में सांस लेना भी दूभर

पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के कारण बढ़ने वाले प्रदूषण से दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है. 

पंजाब में पराली जलाने के मामले 30 फीसदी बढ़े, एनसीआर में सांस लेना भी दूभर
.(फाइल फोटो)

चंडीगढ़: पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के कारण बढ़ने वाले प्रदूषण से दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है. पहले से ही प्रदूषण की मार झेल रहे एनसीआर में लोगों का सांस लेना भी दूभर हो गया है. मगर पड़ोसी राज्य पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे. पंजाब में पिछले साल की अपेक्षा इस बार पराली जलाने के मामलों में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे पराली न जलाकर अन्य विकल्प अपनाएं.

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, पंजाब में 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक फसल अवशेष (पराली) जलाने के 19,860 से अधिक मामले सामने आए हैं.अधिकारियों ने कहा कि पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान सामने आए मामलों की अपेक्षाकृत यह आंकड़ा 30 फीसदी अधिक है.

पिछले साल पंजाब में धान की कटाई के मौसम में कुल 50,495 मामले देखे गए. यहां कटाई का सीजन 15 नवंबर तक रहता है.पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा आमतौर पर फसल अवशेषों को जलाने से सालाना 30 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान होता है. इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ व श्वसन संक्रमण का भी बड़ा जोखिम रहता है.

अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) व इसके सहयोगी संस्थानों का कहना है कि इस धुंए से श्वसन रोग व खासकर बच्चों में काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.पाकिस्तान की सीमा से लगे पंजाब के तरनतारन जिले में सबसे अधिक 2,520 पराली जलाने के मामले दर्ज किए गए. इसके बाद फिरोजपुर (2,269) और संगरूर जिलों में (2,157) मामले दर्ज किए गए.

पठानकोट जिले में न्यूनतम दो मामले देखे गए. पंजाब कृषि विभाग के अनुसार, किसानों ने अभी तक कुल 110 लाख टन धान की फसल काट ली है, जबकि 70 लाख टन अभी भी बची है. कृषि सचिव के. एस. पन्नू ने आईएएनएस को बताया, "इस बार हम उम्मीद कर रहे हैं कि पूरे सीजन में अवशेषों के जलने के मामलों में गिरावट आएगी."

इसके अलावा पड़ोसी राज्य हरियाणा में 30 अक्टूबर तक पराली जलाने के कुल 4200 मामले सामने आ चुके हैं. प्रदेश में पिछले वर्ष इनकी संख्या 4360 थी. करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर, फतेहाबाद, सिरसा, हिसार, जींद, पलवल और पानीपत जिलों में 13 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती होती है. ऐसे में इन जिलों में विशेषकर फसल अवशेष जलाने के मामले देखे जाते हैं.

एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि राज्य में लगभग 50 फीसदी फसल काट ली गई है.हरियाणा और पंजाब में किसानों द्वारा जलाई जाने वाली पराली से उठने वाला धुंआ दिल्ली की आबोहवा खराब करती है.