फिजिकल टीचर्स की बहाली को मिली कैबिनेट की मंजूरी, खिले 8386 टीचर्स के चेहरे

प्रदेश में फिजिकल टीचर्स की बहाली का मुद्दा कई सालों से चल रहा था. बिहार के अलग-अलग हिस्सों में लगातार हो रहे प्रदर्शन और युवाओं के आंदोलन से ये संभव हो सका है.  

फिजिकल टीचर्स की बहाली को मिली कैबिनेट की मंजूरी, खिले 8386 टीचर्स के चेहरे
फिजिकल टीचर्स की बहाली को मिली कैबिनेट की मंजूरी. (फाइल फोटो)

Patna: राज्य के युवाओं के लिए बड़ी खबर है. अब जल्दी ही कई युवा फिजिकल टीचर्स (Physical Teachers) बन सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार की ओर से फिजिकल टीचर्स की बहाली कर दिया गई है. बुधवार को राज्य कैबिनेट Nitish Kumar Cabinet) ने जिन 21 एजेंडों को मंजूरी दी है उनमें फिजिकल टीचर्स की बहाली भी शामिल है.

दरअसल, प्रदेश में फिजिकल टीचर्स की बहाली का मुद्दा कई सालों से चल रहा था. बिहार के अलग-अलग हिस्सों में लगातार हो रहे प्रदर्शन और युवाओं के आंदोलन से ये संभव हो सका है. इस मामले में अभ्यर्थियों ने जी मीडिया का भी आभार जताया है. उनका कहना है कि प्रमुखता से इस मामले को लोगों के बीच रखने के कारण सरकार पर असर पड़ा और इस मुद्दे को 21 एजेंडों में खास तौर पर शामिल करना पड़ा.

सफल अभ्यर्थियों के चेहरे खिले
जानकारी के मुताबिक, राज्य में फिजिकल टीचर्स की बहाली का मुद्दा कई साल से जारी था. पटना हाईकोर्ट में भी इस मामले पर साल 2016 से सुनवाई चल रही थी. बुधवार को राज्य कैबिनेट की ओर से लिए गए इस फैसले ने 8 हजार 386 फिजिकल टीचर्स के चेहरे पर मुस्कान ला दी.

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अब सफल अभ्यर्थी जल्द ही पक्की सरकारी नौकरी की उम्मीद कर रहे हैं. बिहार शारीरिक शिक्षक (Physical Teacher's) अनुदेशक संघ के प्रवक्ता मुकेश कुमार सिंह ने कहा है कि, जल्द ही हजारों युवक फिजिकल टीचर्स बहाल हो सकेंगे. केंद्र सरकार ने साल 2015 में हर सरकारी स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य कर दी थी. इसके बाद बिहार में भी शारीरिक शिक्षकों की बहाली के लिए कवायद शुरू हुई थी.

2019 में हुई थी परीक्षा
साल 2019 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति यानि बीएसइबी ने शारीरिक शिक्षक और अनुदेशक पद के लिए परीक्षा ली और फरवरी 2020 में परिणाम की घोषणा भी हो गई, लेकिन नियोजन अब तक नहीं हुआ था.

इससे पहले साल 2016 में आरा के राजेश कुमार पांडेय ने एक जनहित याचिका कोर्ट में दायर कर शारीरिक शिक्षकों की बहाली की मांग की थी. नतीजे आने के बाद भी जब सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं हुई तो इन लोगों ने प्रदर्शन शुरू किया. इस मामले कब क्या हुआ इस पर डालते हैं एक नजर-

साल 2015 में केंद्र ने मेडिसिन की जगह मेडिटेशन की नीति पर जोर दिया जिसके तहत सभी सरकारी स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति की बात कही गई. बिहार में साल 2016 में राजेश कुमार पांडेय नाम के एक व्यक्ति ने पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) में जनहित याचिका दायर की.

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राजेश कुमार पांडेय की अर्जी पर कई बार सुनवाई ,एक सुनवाई के दौरान तत्कालीन शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन हाजिर हुए. आर के महाजन ने कोर्ट को अंडरटेकिंग देकर कहा कि, विभाग एक निश्चित समय में शारीरिक शिक्षकों का नियोजन करेगा.  

शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक के नाम से नियोजन की प्रक्रिया शुरू हुई और एक शेड्यूल के जरिए 30 अप्रैल 2020 तक नियोजन पत्र बांटने की बात कही गई. बीएसइबी ने 12 फरवरी 2020 को शारीरिक शिक्षा एवं अनुदेशक के नतीजों का ऐलान कर दिया. परिणाम में 3 हजार 508 अभ्यर्थी सफल रहे.

लॉकडाउन खत्म होने के बाद तमाम दूसरे सरकारी काम होते रहे लेकिन शारीरिक शिक्षकों की बहाली नहीं हो सकी. पिछले महीने खेल दिवस के मौके पर भी सफल अभ्यर्थियों ने राजद, बीजेपी और जदयू मुख्यालय के सामने प्रदर्शन किया था.  

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बुधवार को बिहार कैबिनेट ने 8 हजार 386 पदों पर शारीरिक शिक्षा अनुदेशक की मंजूरी दी. वेतनमान हर महीने 8 हजार रुपये तय किया गया और सालाना 200 रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी.