VHP के कार्यकारी अध्यक्ष बोले- कयामत तक राम मंदिर निर्माण के लिए इंतजार नहीं
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VHP के कार्यकारी अध्यक्ष बोले- कयामत तक राम मंदिर निर्माण के लिए इंतजार नहीं

राम मंदिर को लेकर 5 अक्टूबर को दिल्ली में संतों की बड़ी बैठक होने वाली है. यह बैठक वीएचपी के संत उच्चाधिकार समिति की होगी. देश भर के 40 से 50 बड़े संत इस बैठक में हिस्सा लेंगे.

राम मंदिर निर्माण पर VHP के कार्यकारी अध्यक्ष ने दिया बड़ा बयान

रवीन्द्र कुमार, नई दिल्ली: विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने जी मीडिया से हुई बातचीत के दौरान राम मंदिर को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है कि वे कयामत तक राम मंदिर निर्माण के लिए इंतजार नहीं कर सकते. उन्होंने यह भी कहा कि 2018 के सूर्यास्त तक राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो. राम मंदिर निर्माण को लेकर उन्होंने मौजूदा केन्द्र सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा, "मोदी सरकार नहीं बनाएगी तो और कौन सरकार बनाएगी."

  1. राम मंदिर को लेकर 5 अक्टूबर को दिल्ली में संतों की बड़ी बैठक होने वाली है
  2. VHP के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने मंदिर को लेकर दिया बड़ा बयान
  3. आलोक कुमार ने कहा- ये सरकार नहीं बनाएगी, तो कौन सी सरकार बनाएगी

आपको बता दें कि राम मंदिर को लेकर 5 अक्टूबर को दिल्ली में संतों की बड़ी बैठक होने वाली है. यह बैठक वीएचपी के संत उच्चाधिकार समिति की होगी. देश भर के 40 से 50 बड़े संत इस बैठक में हिस्सा लेंगे. माना जा रहा है कि इस बैठक में राम मंदिर निर्माण को लेकर भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी और इस दौरान संत राम मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा का एलान कर सकते हैं. आगे पढ़िए VHP के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार के साथ हुई खास बातचीत के प्रमुख अंश...

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सवाल: संतों की उच्चाधिकार समिति की बैठक में राम मंदिर को लेकर कोई फैसला हो पाएगा?
आलोक कुमार: राम जन्मभूमि मंदिर बनाने के लिए सारी बाधाएं दूर होकर, मंदिर बनाने का रास्ता प्रशस्त हो रहा है. हम लोग कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रहे थे. दीपक मिश्रा के कोर्ट ने संकेत दिया था कि वे स्पष्ट निर्णय करेंगे. 2 Oct को रिटायर हो रहे थे. इसलिए हम लोग चाह रहे थे कि Sep तक निर्णय आ जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्णय को टालकर अपने कर्तव्य की अवहेलना की है. इसलिए संतों को बुलाकर आगे का मार्ग ढूंढ़ने की जरूरत पड़ी है.

सवाल: कौन सा मार्ग होगा. सरकार से आग्रह करेंगे की अध्यादेश लाए?
आलोक कुमार: मैं नहीं जानता कि कौन सा मार्ग होगा. रास्ते तो दो ही हैं. या तो कोर्ट फैसला करे या कानून बने. 

सवाल: क्या मोदी सरकार कानून बनाएगी? 4 साल से ऊपर हो गए.
आलोक कुमार: ये सरकार नहीं बनाएगी, तो कौन सी सरकार बनाएगी. 1989 में पालमपुर में प्रस्ताव पारित किया था (BJP ने) कि मंदिर बनना चाहिए. इस लड़ाई में वे हमारे सहयात्री रहे हैं. देश की जनता आग्रह करेगी तो हमें लगता है कि ये सरकार मंदिर बनाने का रास्ता साफ करेगी.

सवाल: अब तो राहुल गांधी भी जनेऊधारी हो गए हैं. शिवसेना भी कह रही है कि मंदिर हम बनाएंगे. और भी लोग कह रहे हैं. यानि राम मंदिर एक ऐसा सियासी मुद्दा हो गया है जिसे सब भुनाना चाह रहे हैं?
आलोक कुमार: कितना अच्छा होगा कि ऐसा हो. वे (राहुल गांधी) जनेऊ भी पहनते हैं, वे कैलाश मानसरोवर की यात्रा भी करते हैं. वे राजनैतिक होर्डिंग में राम भक्त भी लिखते हैं. अब अगर सब ऐसा चाहेंगे तो राम मंदिर वोट का मुद्दा नहीं रहेगा, राजनैतिक मुद्दा भी नहीं रहेगा. ममता जी भी पंडालों को अनुदान दे रही हैं. रक्षा बंधन भी मनाया. अब सब लोग मान रहे हैं कि हिंदुत्व इस देश की आत्मा है. तो सब मिलकर बनाएं. मुस्लिम संगठन भी कह रहे हैं कि मंदिर बनना चाहिए.

सवाल: यानि 2019 मई से पहले राम मंदिर की पहली ईंट रखी जाएगी?
आलोक कुमार: मैं इसे चुनाव से नहीं जोड़ता. इसलिए मई 2019 मेरे लिए रेफरेंस प्वाइंट नहीं है. उम्मीद करूंगा कि 2018 के सूर्यास्त से पहले मंदिर निर्माण के मार्ग की सारी बाधाएं दूर हो जाएं.

सवाल: क्या भूमि अधिग्रहण एक रास्ता है. सरकार land acquisition करे और आपको सुपुर्द करे?
आलोक कुमार: सरकार तय करे कि कौन सा कानून बने. 1989 में बीजेपी ने कहा था कि कोर्ट के निर्णय से नहीं, बल्कि कानून से बने मंदिर. वे अब तय करें कि कौन सा कानून बने, कैसा कानून होना है. कानून बनाएं. हम तो वहां मंदिर देखना चाहते हैं.

सवाल: कानून की बात जो बीजेपी ने कही है वो पूरा करेगी?
आलोक कुमार: 68 साल से कोर्ट में है. लगभग 400 साल से लड़ाई चल रही है. कभी तो खत्म होना है न. कयामत तक तो इंतजार नहीं करना. उस ढंग का प्रेम नहीं है ये. इसलिए अब और देर नहीं तुरंत बनना चाहिए.

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