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दिल्ली की सभी 16 जेलों के कानूनी मामलों की जिम्‍मेदारी सिर्फ एक लॉ ऑफि‍सर पर, HC ने मांगा जवाब

मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति अनुप जयराम भंभानी की पीठ ने दिल्ली सरकार और जेल महानिदेशकों से जवाब दाखिल करने के लिए कहा और मामले की सुनवाई 29 अगस्त को तय कर दी.

दिल्ली की सभी 16 जेलों के कानूनी मामलों की जिम्‍मेदारी सिर्फ एक लॉ ऑफि‍सर पर, HC ने मांगा जवाब

नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली सरकार से राष्ट्रीय राजधानी की जेलों में विधि अधिकारियों की नियुक्ति की मांग को लेकर एक याचिका पर जवाब मांगा है. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति अनुप जयराम भंभानी की पीठ ने दिल्ली सरकार और जेल महानिदेशकों से जवाब दाखिल करने के लिए कहा और मामले की सुनवाई 29 अगस्त को तय कर दी.

अदालत अधिवक्‍ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी. साहनी ने अपनी याचिका में दिल्ली जेल अधिनियम, 2000 की धारा 6 का पालन सुनिश्चित करते हुए दिल्ली की सभी जेलों में एक विधि अधिकारी की नियुक्ति करने के लिए दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की.

अधिनियम के तहत सभी जेलों में एक विधि अधिकारी, एक अधीक्षक, एक उपाधीक्षक, एक चिकित्सा अधिकारी और एक कल्याण अधिकारी होना अनिवार्य है. साहनी ने कहा कि कानून अधिकारियों को छोड़कर, सभी नियुक्तियों का पालन किया जा रहा है.

तीन कारागारा परिसरों -तिहाड़, रोहिणी और मंडोली- के अंतर्गत 16 जेल हैं. तिहाड़ में नौ जेल हैं. रोहिणी में एक और मंडोली कारागार परिसर में छह जेल हैं.

अमित साहनी की याचिका में कहा गया है कि जेल मुख्यालयों में अगस्त 2016 से फरवरी 2019 तक कोई विधि अधिकारी नहीं रहा है और कानूनी मामलों को उपाधीक्षक रैंक के एक अधिकारी देखते थे.

मौजूदा समय में, एक विधि अधिकारी दिल्ली की सभी 16 जेलों के कानूनी मामलों को देख रहा है.