दिल्ली में 9 नवंबर से शुरु होगा संस्कृत विश्व सम्मेलन, जुटेंगे 18 देशों के विद्वान

संस्कृत भारती के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्रीश देवपुजारी ने बताया कि विश्व सम्मेलन में भारत के अलावा कनाडा, इंग्लैंड, मारीशस, केन्या, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, सिंगापुर, इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया, रूस, नेपाल और न्यूजीलैंड आदि देशों के विद्वान भाग लेंगे. 

दिल्ली में 9 नवंबर से शुरु होगा संस्कृत विश्व सम्मेलन, जुटेंगे 18 देशों के विद्वान

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन संस्कृत भारती की ओर से नौ से 11 नवंबर तक पहली बार संस्कृत विश्व सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. यहां छतरपुर मंदिर परिसर में होने वाले इस बड़े आयोजन में भारत सहित 18 देशों के संस्कृत विद्वान जुटकर भाषा के उत्थान पर चर्चा करेंगे.केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने शनिवार को अपने आवास पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि संस्कृत पूरी तरह वैज्ञानिक और प्रभावशाली भाषा है. उन्होंने बताया कि भारत में एक करोड़ लोग संस्कृत के पठन-पाठन, कामकाज और व्यवहार में दक्ष हैं.

संस्कृत विश्व की सबसे सनातन और पुरातन भाषा है जिसके पास विज्ञान, अंतरिक्ष ज्ञान और ग्रहों की चाल और गणना का व्यापक भंडार है. इसे कम्प्यूटर के लिए समुचित एवं सबसे उपयुक्त भाषा माना जा रहा है.

डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि यह संगठन पहली बार नई दिल्ली में 9 नवंबर से 11 नवम्बर के बीच तीन दिवसीय संस्कृत भारती विश्व सम्मेलन का आयोजन कर रहा है. सही मायनों में यह संस्कृत सम्मलेन का एक महाकुम्भ होगा जहां से दुनिया को संस्कृत की उपयोगिता का संदेश जाएगा.

डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि सम्मेलन में संस्कृत में विज्ञान, अर्थशास्त्र पर प्रदर्शनी, संस्कृत डाक्यूमेंट्री, पांडुलिपियों का प्रदर्शन, संस्कृत नामों के साथ वस्तु प्रदर्शनी, संस्कृत शिला लेखों का प्रदर्शन, श्रेष्ठ कवि कालिदास के जीवन पर प्रदर्शनी और खुला सत्र आयोजित किया जायेगा. 9 नवंबर को 11 बजे विदेश राज्य मंत्री मुरलीधरन सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे.

संस्कृत भारती के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्रीश देवपुजारी ने बताया कि विश्व सम्मेलन में भारत के अलावा कनाडा, इंग्लैंड, मारीशस, केन्या, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, सिंगापुर, इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया, रूस, नेपाल और न्यूजीलैंड आदि देशों के विद्वान भाग लेंगे. हमारा लक्ष्य विश्व के कोने-कोने तक संस्कृत भाषा की पताका को शिखर तक पहुंचाना है.