जामिया हिंसा के 4 वीडियो वायरल, पथराव के बाद लाइब्रेरी में जाते दिखे नकाबपोश; आखिर सच क्या है?

जामिया यूनिवर्सिटी में पिछले 15 दिसंबर को हुई हिंसा और फिर पुलिस के एक्शन का पूरा सच दिखाएंगे. हम ना पुलिस के साथ हैं ना प्रदर्शनकारियों के. जो चार वीडियो सामने आएं है.

जामिया हिंसा के 4 वीडियो वायरल, पथराव के बाद लाइब्रेरी में जाते दिखे नकाबपोश; आखिर सच क्या है?

नई दिल्ली: जामिया यूनिवर्सिटी में पिछले 15 दिसंबर को हुई हिंसा और फिर पुलिस के एक्शन का पूरा सच दिखाएंगे. हम ना पुलिस के साथ हैं ना प्रदर्शनकारियों के. जो चार वीडियो सामने आएं है, हम बस उनके जरिए पूरी घटना का विश्लेषण करेंगे. आप तस्वीर में चार वीडियो देख रहे हैं. पहले वीडियो में साफ दिख रहा है कि लाइब्रेरी में पुलिस ने लाठीचार्ज किया. दूसरे वीडियो में लाइब्रेरी में बैठे लोगों के चेहरों पर नकाब साफ दिख रहा है जबकि कुछ लोगों के हाथों में पत्थर भी है. तीसरे वीडियो में आप देख सकते हैं कि किसतरह लाइब्रेरी में नकाबपोश घुसे जबकि चौथा वीडियो करीब दस मिनट का है जिसमें लाइब्रेरी में 15 दिसंबर 2019 को क्या हुआ. पूरी वारदात सीसीटीवी में रिकॉर्ड है..आपको एक-एक कर चारों वीडियो में क्या कुछ दिख रहा है, आपको इसकी जानकारी देंगे. हम यहां ये साफ कर दें कि इनमें से एक वीडियो जामिया कोआर्डीनेशन कमेटी ने जारी किया है, बाकी तीन दिल्ली पुलिस के सूत्रों से ZEE NEWS को मिले हैं.

पुलिस ताबड़तोड़ डंडे बरसा रही है. कुछ पुलिसवालों के चेहरों पर नकाब है. पुलिस से बचने के लिए लोग इधर-उधर भाग रहे हैं. सोशल मीडिया पर जारी इस वीडियो से एक नई बहस छिड़ गई है. दावा किया जा रहा है कि ये वीडियो दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी का है. वीडियो की तारीख 15 दिसंबर, 2019 बताई जा रही है. 45 सेकेंड का ये वीडियो जामिया को-ऑर्डिनेशन कमेटी के ट्विटर हैंडल से जारी किया गया है. सबसे पहले आप वीडियो रिकॉर्ड होने का वक्त पढ़ें. शाम के 6 बजकर 8 मिनट. यानी वो वक्त जब जामिया कैंपस में पत्थरबाज छात्र पुलिस की कार्रवाई से डरकर छिपते फिर रहे थे. 

- इसी दौरान लाइब्रेरी में हलचल होती है और एक छात्र सामने के दरवाज़े से दौड़ता हुआ आता है.
- अब एक बार फिर स्क्रीन की दाईं ओर बैठे छात्र को देखें. लाइब्रेरी में हलचल होते ही इसने अपने चेहरे को कपड़े से ढक लिया. 
- इसके बाद पुलिस लाइब्रेरी में दाखिल होती है. छात्रों को पहले कुछ समझ में नहीं आता है. फिर पुलिस के सवाल पूछने पर एक छात्र तुरंत चेहरे से कपड़ा हटाकर माफी मांगने लगता है. हालांकि, पुलिस का जवान कुछ नहीं सुनता और बतौर एक्शन लाठी बरसा देता है. 

इसके बाद हेलमेट लगाए पुलिसवाले जिसमें कुछ के चेहरों पर नकाब भी था. लाइब्रेरी में मौजूद छात्रों को जमकर पीटने लगते हैं. वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने अपनी सफाई दी है. पुलिस का कहना है कि इस वीडियो की जांच की जाएगी. जामिया को-ऑर्डिनेशन कमेटी का ये वीडियो 45 सेकेंड का है. बीच में कुछ सेकेंड की क्लिप गायब है. 45 सेकेंड का ये वीडियो शाम 6 बजकर 8 मिनट 13 सेकेंड पर शुरू होता है और खत्म शाम 6 बजकर 9 मिनट 8 सेकेंड पर खत्म होता है. यानी 55 सेकेंड का ये वीडियो होना चाहिए था लेकिन 9 सेकेंड का हिस्सा वीडियो से गायब है. हिंसा के 63 दिन बाद अब जामिया को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने ये वीडियो जारी कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं लेकिन उससे पहले आपको फ्लैशबैक में 63 दिन पुरानी 15 दिसंबर 2019 की कुछ और तस्वीरें दिखाना जरूरी हैं.

देखें वीडियो:

15 दिसंबर 2019 ही वो दिन था जब CAA और NRC के खिलाफ दिल्ली की जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी का प्रदर्शन हिंसक हो गया था. तस्वीरें गवाह हैं कि कैसे खुद को सभ्य समाज का छात्र बताने वाले ये लोग बिल्कुल दंगाई की तरह बर्ताव कर रहे थे. विरोध प्रदर्शन के नाम पर पहले इन दंगाइयों ने पुलिस पर पथराव किया और फिर 4-4 सार्वजनिक बसों, निजी वाहनों के अलावा 2 पुलिस वैन को भी आग लगा दी थी. हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसूगैस के गोलों का इस्तेमाल किया लेकिन गोलीबारी नहीं की. 

पुलिस का कहना था कि जवाबी कार्रवाई से प्रदर्शनकारी बौखला गए और इनमें से कई यूनिवर्सिटी कैंपस में छिप गए. इसके बाद छात्रों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने जामिया यूनिवर्सिटी कैंपस में घुसकर उनके साथ बर्बरता की थी. जामिया यूनिवर्सिटी प्रशासन पहले ही दिल्ली पुलिस पर बिना इजाजत कैंपस में घुसने की शिकायत दर्ज करा चुका है. जामिया प्रशासन ने कहा कि उसने ये वीडियो जारी नहीं किया है लेकिन पुलिस की बेरहमी के मामले में वो छात्रों के साथ है. जामिया हिंसा की जांच पुलिस भी कर रही है और ये मामला कोर्ट में भी है. सच के लिए जांच के नतीजों का इंतजार है.