DNA ANALYSIS: भारत की रफ्तार से बौखलाया चीन, लद्दाख में रच रहा साजिश

मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक की. 

DNA ANALYSIS: भारत की रफ्तार से बौखलाया चीन, लद्दाख में रच रहा साजिश

नई दिल्ली: चीन ने पहले पूरी दुनिया में जानलेवा वायरस फैलाया और अब चीन धमकी भरे लहजे में भारत जैसे शक्तिशाली देश को सीमा पर शांति बरतने की नसीहत दे रहा है. लद्दाख के कुछ ऐसे इलाके जहां भारत और चीन की सीमा मिलती है वहां दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है और इसे 1962 के युद्ध के बाद से दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा टकराव कहा जा रहा है. इसलिए सबसे पहले ये जान लीजिए कि लद्दाख के हालात को लेकर मंगलवार को भारत में क्या क्या हुआ?

मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक की. इसमें Chief of Defence Staff जनरल बिपिन रावत भी शामिल थे. इसके अलावा इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री कार्यालय में भी एक बैठक हुई.

लेकिन इस बीच चीन इस मुद्दे पर कोई बातचीत करने के मूड में नहीं लग रहा. बल्कि चीन ने इस विवाद के लिए भारत को ही जिम्मेदार ठहराया है. हालांकि इन सबके बीच भारत और चीन के उच्च सेना अधिकारी इस मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ये कोशिश कितनी सफल होगी इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता. क्योंकि दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए चीन इस विवाद को आसानी से सुलझाना नहीं चाहता. 

लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा के किस हिस्से को लेकर विवाद है और चीन कैसे पूरी दुनिया में महामारी फैलाने के बाद, अब दुनिया के देशों को युद्ध की धमकी दे रहा है, इसे जानने से पहले आप भारत में कोरोना वायरस की वर्तमान स्थिति को समझ लीजिए, क्योंकि भारत पर आया ये संकट भी चीन की ही देन है. 

भारत में अब तक कोरोना वायरस के एक लाख 45 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और करीब 4 हजार से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो चुकी है. मरीजों की संख्या के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़ चुका है और जल्द ही मृत्यु के मामले में भी ऐसा ही होने वाला है.

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या करीब 56 लाख है और करीब साढ़े तीन लाख लोगों की इससे मृत्यु हो चुकी है. ये सब चीन की वजह से हुआ, क्योंकि पहले उसकी लापरवाही की वजह से वायरस फैला और फिर उसने सही समय पर दुनिया को इसकी जानकारी भी नहीं दी. इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं कमजोर हो गईं, करोड़ों लोगों की नौकरियां चली गईं, उद्योग धंधे बंद हो गए, अस्पतालों में मरीजों के लिए जगह नहीं बची और पूरी दुनिया आर्थिक मंदी में चली गई. 

लेकिन ऐसा लगता है कि चीन को इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता इसीलिए वो अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करने की बजाय पूरी दुनिया को धमकाने में लगा है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में भारत और चीन के सीमा विवाद को लेकर एक लेख प्रकाशित हुआ है. 

इस आर्टिकल की जो हेडलाइन है उसका अर्थ है कि भारत को सीमा पर शांति के लिए चीन के बारे में पश्चिमी देशों के नजरिए से सोचना बंद करना चाहिए. 

यानी चीन भारत को एक तरह से धमकी देते हुए कह रहा है कि कोविड-19 की वजह से पूरी दुनिया चीन के बारे में जो सोच रही है, भारत को उससे अलग सोच रखनी चाहिए. 

इस आर्टिकल में ये भी कहा गया है कि भारत ने चीन की सीमा के अंदर सैन्य निर्माण किया है और इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के आसार हैं. 

चीन भारत के साथ इस सीमा विवाद में क्यों उलझ रहा है इसका जवाब भी इसी आर्टिकल में छिपा है. इसमें लिखा है कि भारत के कुछ लोग सोचते हैं कि सुस्त अर्थव्यस्था और पश्चिमी देशों के आरोप भारत के लिए एक सुनहरा अवसर हैं, और भारत सीमा पर चीन के साथ उलझता है तो इस मामले में पूरी दुनिया भारत का साथ देगी. 

आर्टिकल में ये भी लिखा है कि अगर भारत अंतर्राष्ट्रीय और चीन की अंदरूनी परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा सोच रहा है तो ये आंकलन गलत है और भारत के लिए हानिकारक है. 

इस आर्टिकल में भारत में कोविड-19 की स्थिति को लेकर भी तंज कसा गया है. कहा गया है कि भारत में संक्रमण के मामले चीन से भी ज्यादा हो चुके हैं. जबकि चीन में सब सामान्य हो चुका है. इसलिए भारत की प्राथमिकता सीमा विवाद नहीं कोरोना वायरस होना चाहिए.

अब आप सोचिए ये वही चीन है जिसने पूरी दुनिया को ये खतरनाक वायरस दिया. इस वायरस से लाखों लोगों की जान चली गई. लाखों लोग बीमार हैं और दुनिया को इस संकट से उबरने में कितना समय लगेगा ये कहा नहीं जा सकता. लेकिन चीन अपनी गलतियां मानने की बजाय और इस नुकसान की भरपाई करने की बजाय भारत जैसे देशों को बिन मांगी सलाह दे रहा है. 

देखें DNA- 

इस आर्टिकल में ये भी लिखा है कि चीन की स्थिति अब 1962 जैसी नहीं है. उस दौर में भारत और चीन लगभग बराबर थे लेकिन आज चीन भारत से बहुत ताकतवर है और चीन की अर्थव्यस्था भी भारत से 5 गुना ज्यादा है.

आर्टिकल के आखिर में लिखा है कि भारत की सभ्यता बहुत पुरानी है और भारत इतना समझदार है कि वो चीन को अमेरिका के चश्मे से नहीं देखेगा. और चीन को उम्मीद है कि भारत की सरकार, सेना मीडिया और बुद्धिजीवी चीन पर अपनी समझ और रिसर्च को और बेहतर करेंगे. 

लेकिन आज हमने चीन की नीयत और उसके इतिहास पर पुख्ता रिसर्च की है. इस रिसर्च के तथ्य इतने सटीक और सच्चे हैं कि चीन भी इन्हें मानने से इनकार नहीं कर सकता.

इसलिए सबसे पहले ये समझिए कि लद्दाख में चीन आखिर करना क्या चाहता है. दरअसल इस समय चीन पर अमेरिका समेत तमाम देशों का दबाव है. दुनिया के देश अब चीन से हर्जाना मांग रहे हैं और चीन का बहिष्कार कर रहे हैं. चीन इस समय सबसे बुरी स्थिति में है और इसीलिए चीन पूरी दुनिया का ध्यान भटकाना चाहता है. 

इसके लिए चीन ने कई दिशाओं में मोर्चा खोल दिया है. चीन ताइवान को सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहा है, नए सुरक्षा कानून के जरिए हॉन्ग कॉन्ग की आजादी छीन रहा है और उन लोगों को जेल में डालना चाहता है जो चीन की सरकार का विरोध करते हैं. 

South China Sea में अमेरिका समेत कई देशों को चीन चुनौती दे रहा है, ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार युद्ध शुरू कर चुका है जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं और अब चीन भारत को भी उकसा रहा है. 

इसी के तहत चीन ने लद्दाख में अनिश्चिता के हालात उतपन्न कर दिए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक लद्दाख सीमा पर चीन ने अपने सैनिकों की मौजूदगी बढ़ा दी है. 

अलग अलग रिपोर्ट्स का दावा है कि यहां पर चीन ने अपने सैनिकों की संख्या में वृद्धि कर दी है. इनमें दो इलाके प्रमुख हैं. एक है गलवान वैली और दूसरा है पंगोंग लेक (PANGONG LAKE)

दावा किया जा रहा है कि गलवान वैली में चीन की सेना ने करीब 100 टेंट्स लगा लिए हैं. ये सब पिछले 2 हफ्तों के दौरान हुआ है. कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि इस सीमा के आस पास 5 प्वाइंट्स पर चीन के करीब 5 हजार सैनिक मौजूद हैं. 

दावा है कि गलवान नदी के पास 4 प्वाइंट्स के जरिए चीन ने घुसपैठ की कोशिश की है, जबकि घुसपैठ की पांचवीं घटना PANGONG झील के पास हुई है.

यानी चीन ने लद्दाख सीमा के पास कई इलाकों में आक्रमक रवैया अपनाया है. लेकिन कहा जा रहा है कि भारत ने भी इस इलाके में अपने सैनिक तैनात कर दिए हैं ताकि चीन की किसी भी हरकत का जवाब दिया जा सके. 

हालही में चीन और भारत की सेना के बीच लद्दाख और सिक्किम में झड़प की दो घटनाएं हो चुकी हैं. 5 मई को लद्दाख की PANGONG झील के पास भारत और चीन के सैनिकों के बीच टकराव हुआ. जिसमें दोनों तरफ के कुछ सैनिक घायल हुए. 

इसके बाद 9 मई को उत्तरी सिक्किम में भी दोनों देशों के सैनिक आपस में टकरा गए. भारतीय सेना ने टकराव की बात तो मानी है लेकिन ये भी कहा है कि हालात सामान्य हैं. तनाव के बीच भारत के सेना प्रमुख जनरल MM Narvane भी लद्दाख का दौरा कर चुके हैं. अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि एक महामारी के बीच चीन आखिर ऐसा कर क्यों रहा है, इसके दो कारण हैं. 

पहला ये कि लद्दाख के पास LAC यानी Line Of Actual Control पर भारत बड़े पैमाने पर Infrastructure का निर्माण कार्य कर रहा है. जनवरी 2019 में भारत ने 21 हजार करोड़ रुपए की लागत से LAC पर 44 ऐसी सड़कें बनाने की घोषणा की थी जो भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है. ये सड़क लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगने वाली सीमा पर बनाई जा रही है.

ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि इन इलाकों में तैनात भारतीय सेना तक साजो सामान आसानी से पहुंचाया जा सके. पिछले साल अप्रैल में दुरबुक- श्योक और दौलत बेग ओल्डी को जोड़ने वाली 255 किलोमीटर लंबी सड़क भी यातायात के लिए खोल दी गई थी. इस सड़क के रास्ते डेपसांग मैदान, रूकी नाला होते हुए कराकोरम तक आसानी से पहुंचा जा सकता है. अभी लद्दाख की जिस गलवान घाटी में भारत और चीन की सेना के बीच तनाव है उस तक पहुंचने के लिए भी ये सड़क बहुत महत्वपूर्ण है.

इसके अलावा भारत उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में नेपाल और चीन सीमा के पास भी एक महत्वपूर्ण सड़क बना चुका है. इस सड़क के रास्ते मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को बहुत सुविधा होगी, ये एक ट्राइजंक्शन है जहां भारत, नेपाल और चीन की सीमा मिलती है. इस सड़क का विरोध चीन ने तो नहीं किया है लेकिन माना जा रहा है कि नेपाल को उकसा कर चीन यहां भी भारत को सीमा विवाद में उलझाना चाहता है. 

जाहिर है LAC पर तेजी से हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को लेकर चीन परेशान है, क्योंकि चीन अपनी सीमा के पास पहले ही ऐसी सड़कें बना चुका है और अब उसे भारत की तैयारी पसंद नहीं आ रही. 

दूसरी वजह ये है कि कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया में चीन के खिलाफ माहौल बना है और चीन इससे ध्यान भटकाने के लिए भारत के साथ सीमा विवाद को भड़का रहा है ताकि दुनिया का ध्यान भटकाया जा सके. 

भारत और चीन की सीमा करीब 3500 किलोमीटर लंबी है और इसमें से एक लंबा हिस्सा ऐसा है, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच आज भी कोई सहमति नहीं है. 

भारत ने चीन सीमा के पास जितना भी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है वो सब अपने नियंत्रण वाली सीमा के अंदर ही है. इन्हीं मुख्य सड़कों के साथ भारत ने कुछ सहायक सड़कों का निर्माण किया है और इसी बात से चीन सबसे ज्यादा परेशान है. 

अगर गलवान घाटी का ही उदाहरण लें तो कम से कम तीन बार चीन ने इस इलाके को लेकर अपना दावा बदला है. पहले चीन इस जगह के छोटे से इलाके पर दावा करता था लेकिन अब चीन ने पूरी गलवान घाटी ही अपना बता दिया है, और यहां हजारों सैनिक तैनात कर दिए और सीमा के करीब सेना को लंबे समय तक रोकने की योजना भी बना ली है. 

लेकिन भारत भी पूरी मजबूती के साथ चीन के सामने खड़ा है. इस इलाके में चीन ने सैनिकों की संख्या बढ़ाई है तो भारत भी अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाएगा. भारत ने सीमा पर सड़क निर्माण का जो काम शुरू किया है, वो भी पूरी तरह से जारी रहेगा. 

ये बात भी सच है कि भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर भले ही कितने विवाद हुए हों, लेकिन पिछले कई दशकों से दोनों देशों के बीच एक भी गोली नहीं चली है. लेकिन क्या इस बार भी ऐसा ही होगा, ये सवाल इसलिए क्योंकि ऐसा लग रहा है कि चीन की नीयत ठीक नहीं है.  हमारे पास सैटेलाइट से मिली कुछ तस्वीरें हैं, जिन्हें आपको देखना चाहिए. 

ये सैटेलाइट इमेज तिब्बत में मौजूद एक चाइनीज एयर बेस की हैं. ये चाइनीज एयर बेस लद्दाख की उस पेंगांग लेक से सिर्फ 200 किलोमीटर ही दूर है, जहां पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच टकराव है. इस एयर बेस पर चीन की वायुसेना के चार लड़ाकू विमान खड़े दिख रहे हैं. आपको इसी चाइनीज एयर बेस की दूसरी तस्वीर दिखाते हैं. इसमें आप देख सकते हैं कि इसी वर्ष 6 अप्रैल को ये चाइनीज एयर बेस कैसा था और 21 मई तक इसमें क्या बदलाव आया है. करीब डेढ़ महीने के अंदर चीन ने इस एयरबेस में तेजी से निर्माण कार्य किया है और वहां पर लड़ाकू विमानों के लिए हवाई पट्टी तैयार कर दी. 

लेकिन चीन ये सब कर क्यों रहा है ये आपको समझना चाहिए. पहले सिक्किम से लेकर लद्दाख तक बॉर्डर पर भारत के सैनिकों के साथ झगड़ा करना, फिर घुसपैठ करके बैठ जाना, इसी बीच नेपाल को आगे करके भारत को नए सीमा विवाद में उलझाना,, ये सब अचानक नहीं हो रहा है. इसके पीछे चीन की कोई ना कोई सोची समझी रणनीति है. क्योंकि जिस वक्त दुनिया कोरोना वायरस के संकट से लड़ रही है तो उस वक्त भला कौन सा देश अपने पड़ोसी देश से सीमा विवाद में उलझना चाहेगा? आप सोचिए इस वक्त कौन सा देश दूसरे देशों को अपनी सैनिक ताकत दिखाना चाहेगा? लेकिन चीन ऐसा कर रहा है. दक्षिण चीन सागर हो, ताइवान का मामला हो, या फिर हॉन्ग कॉन्ग का मामला हो, चीन लगातार आक्रामक रवैया दिखा रहा है. 

ताइवान के मामले पर चीन सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. चीन के लड़ाकू विमान और वॉर शिप ताइवान के आसपास लगातार युद्ध का अभ्यास कर रहे हैं. ताइवान को चीन अपना हिस्सा मानता है और वो वहां पर हॉन्गकॉन्ग की तरह ही एक देश-दो सिस्टम लागू करके कब्जा करना चाहता है. लेकिन ताइवान ने साफ कह दिया है कि चीन को हकीकत समझनी होगी और वो एक देश-दो सिस्टम के बहाने चीन का राज स्वीकार नहीं करेगा. 

इसी तरह से हॉन्गकॉन्ग में चीन अपने खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए नया सुरक्षा कानून लाने जा रहा है.  जब ब्रिटेन ने 1997 में चीन को हॉन्ग-कॉन्ग सौंपा था, तब हॉन्ग-कॉन्ग को कुछ ऐसे अधिकार मिले थे, जो अधिकार चीन के लोगों के पास भी नहीं हैं, इसी में विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार भी शामिल है. लेकिन नए कानून के तहत चीन हॉन्ग कॉन्ग में विरोध करने का अधिकार छीन लेना चाहता है. 

यानी जब दुनिया का ध्यान कोरोना वायरस पर है, तो चीन का ध्यान अपने दबदबे को बढ़ाने पर है. ऐसा चीन क्यों कर रहा है. इसे समझने के लिए चीन के अंदरूनी हालात और घरेलू राजनीति को भी समझना होगा. 

कोरोना वायरस की वजह से दुनिया के दूसरे देशों की तरह ही चीन भी बहुत बड़े आर्थिक संकट में है. ये चीन में राज करने वाली Communist Party और खुद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए बहुत बड़े संकट का वक्त है. क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ है कि चीन ने इस वर्ष आर्थिक विकास का कोई लक्ष्य तय नहीं किया है. कई विदेशी कंपनियां अब चीन से बाहर जाना चाहती हैं और भारत जैसे देशों में अपनी फैक्टरी लगाना चाहती है. कोरोना वायरस की वजह से दुनिया का चीन पर भरोसा कम हो गया है.100 से ज़्यादा देश जांच का दबाव बना रहे हैं कि ये पता लगाया जाए कि कोरोना वायरस कैसे चीन में आया और कैसे ये फैला? ये भी लगातार कहा जा रहा है कि चीन ने कोरोना वायरस के मामले और मौत का आंकड़ा भी कम बताया. इन सब बातों से चीन के लोगों में भी अपनी सरकार के प्रति भरोसा कम हुआ होगा. ऐसा लगता है कि इन सब मुद्दों से ही ध्यान भटकाने के लिए चीन अपनी आक्रामक सैन्य नीति का सहारा ले रहा है.