close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

ZEE जानकारी : कहीं आप भी मिलावटी खाना तो नहीं खा रहे हैं?

 FSSAI यानी Food Safety and Standards Authority of India... बहुत से लोगों ने इसके बारे नहीं सुना होगा. उन्हें नहीं पता होगा कि ये संस्था क्या है? 

ZEE जानकारी : कहीं आप भी मिलावटी खाना तो नहीं खा रहे हैं?

आज हम देश के स्वास्थ्य से जुड़ी एक बहुत बड़ी ख़बर का DNA टेस्ट करेंगे. इस ख़बर का केन्द्र बिंदु है FSSAI यानी Food Safety and Standards Authority of India... बहुत से लोगों ने इसके बारे नहीं सुना होगा. उन्हें नहीं पता होगा कि ये संस्था क्या है? और जो लोग इसके बारे में जानते भी होंगे, वो खाने-पीने के किसी भी सामान पर FSSAI लिखा हुआ देखते होंगे और उसे खरीद लेते होंगे. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बाज़ार से जो खाने-पीने का सामान आप खरीदते हैं, उसकी कोई गारंटी नहीं है. 

CAG ने अपनी एक नई रिपोर्ट में देश में खाने पीने के सामान की जांच करने वाली इस राष्ट्रीय एजेंसी पर बहुत से गंभीर सवाल उठाए हैं. इस रिपोर्ट का सार ये है कि देश के आम लोगों की सेहत से समझौता हो रहा है. सिर्फ स्वदेशी सामान ही नहीं.. यहां तक कि विदेशों से आने वाला खाने-पीने का सामान भी आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. ये आम लोगों से जुड़ी हुई एक चिंताजनक ख़बर है. और आज हम आपको इस पूरी ख़बर को बहुत ही सरल भाषा में समझाएंगे. लेकिन उससे पहले आपको ये समझना होगा कि FSSAI क्या है?   इसे समझने के लिए आपको थोड़ा पीछे जाना होगा. और ये समझना होगा कि हमारे देश में खाने-पीने के सामान की जांच और उसे बनाने वाली कंपनियों को लाइसेंस देने का क्या तरीका था? 

आज़ादी के बाद हमारे देश में Prevention of Food Adulteration Act 1954 था. इसके अलावा और भी कई Agencies थीं, जो अलग अलग मंत्रालयों और राज्य सरकारों के अधीन काम कर रही थीं. लेकिन देश में इस काम के लिए कोई एक अथॉरिटी नहीं थी. जिसकी वजह से बहुत ज़्यादा Confusion होता था. ऐसे हालात में.. एक ऐसी एजेंसी की ज़रूरत थी, जो पूरे देश के लिए काम करे. इसलिए 2006 में Food Safety and Standards Act बना और इसके तहत Food Safety and Standards Authority बनी. 

ये Authority इस उद्देश्य से बनी थी कि बाज़ार में बिकने वाले खाने के सामान की जांच.. वैज्ञानिक तरीकों से की जाएगी. और देश में खाने-पीने का जो भी सामान बिकेगा, वो इस Authority के approval के बाद ही बेचा जाएगा. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या ये अथॉरिटी सही तरीके से काम कर रही है. इसकी जांच करने के लिए CAG ने इसका ऑडिट किया .

अब ये देखिए कि CAG के इस ऑडिट में क्या क्या पता चला? इस रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि देश में अभी भी.. खाने का असुरक्षित सामान बेचा जा रहा है. और ये संस्था इस पर लगाम नहीं लगा पाई है. यानी जिन कंपनियों का लाइसेंस... अथॉरिटी ने Cancel कर दिया, वो अभी भी खाने का सामान बना रही हैं और बेच रही हैं. सिर्फ यही नहीं इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ये संस्था ये भी सुनिश्चित नहीं कर पाई, कि विदेशों से आने वाला खाने का असुरक्षित सामान देश में प्रवेश न कर पाए. यानी विदेशों से असुरक्षित खाना आ रहा है. 

Audit में ये पता चला कि बहुत से मामलों में इस संस्था के Scientific Panel ने खाने के सामान को बेकार बताया था, लेकिन 3 से 4 साल बीत जाने के बावजूद इस अथॉरिटी ने इनकी NOC कैंसिल नहीं की. ऑडिट के दौरान जिन मामलों की जांच की गई, उसमें 50% से ज्यादा मामले ऐसे थे, जिनमें आधे अधूरे दस्तावेज़ों के बावजूद लाइसेंस दे दिया गया था. 

CAG की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इस संस्था के पास देशभर में चल रहे Food Businesses का Database नहीं है. इस अथॉरिटी की 16 में से 15 Test Labs में Qualified Food Analysts नहीं हैं.  इस संस्था और राज्यों के खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण देशभर में कुल 72 Labs में खाने के Samples भेजते हैं. लेकिन इन 72 में से 65 Labs के पास  National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories यानी NABL का Accreditation ((प्रमाणन)) नहीं है. इसलिए इन Labs की गुणवत्ता पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

इसके अलावा इस रिपोर्ट में बहुत सी और भी बातों का पता चला है. CAG की रिपोर्ट में लिखा है कि इस अथॉरिटी के पास 2008 से लाइसेंस देने, Sample Testing और Lab फीस के नाम पर 100 करोड़ 73 लाख रुपये जमा हुए . लेकिन ये एजेंसी इस पूरे पैसे का इस्तेमाल नहीं कर पाई. जबकि Central Advisory Committee यानी CAC की ये सलाह है कि लाइसेंस फीस के तौर पर लिए गए पैसे का 75% लोगों को जागरूक करने पर खर्च किया जाए. जिन ज़िलों में जाकर ये Audit किया गया, उनमें से 15 ज़िले ऐसे थे, जहां पिछले 5 वर्षों में इस एजेंसी द्वारा कोई निरीक्षण नहीं किया गया. 

ये भी पता चला कि 1303 Imported खाद्य पदार्थों में से 303 ऐसे मामलों में NOC दी गई, जिनमें मापदंड के मुताबिक टेस्ट नहीं किए गए थे. FSSAI की 20 से ज्यादा Testing Labs के पास ना तो Food Test करने के उपकरण हैं और ना ही Technicians...  

अब ये समझिए कि असुरक्षित खाने का सामान खाने से क्या क्या नुकसान हो सकते हैं. CAG रिपोर्ट में लिखा है कि असुरक्षित खाने में नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टिरिया, वायरस और parasites होते हैं. जिनकी वजह से 200 से ज्यादा बीमारियां हो सकती हैं. इनमें diarrhoea से लेकर cancers जैसी बीमारी भी शामिल है. 

एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में हर 10 में 1 व्यक्ति ज़हरीला भोजन खाने की वजह से बीमार पड़ता है. और हर साल ऐसा खाना खाने से पूरी दुनिया में 4 लाख 20 हज़ार लोंगों की मौत होती है. यही नहीं... पूरी दुनिया में 5 साल से कम उम्र के 40% बच्चे... खाने की वजह से ही बीमार पड़ते हैं.  (( 4) Children under five years of age carry 40 per cent of the food borne disease burden, with 1.25 lakh deaths every year. )) इन आंकड़ों से आपको अंदाज़ा लग गया होगा कि इस ख़बर का दायरा कितना बड़ा है.

अब सवाल ये है कि अगर आप किसी खाने के सामान के खिलाफ शिकायत करना चाहते हैं, तो कहां करें? हम आपको बताते हैं कि अगर आपके किसी खाने के सामान में कभी कोई खराबी निकलती है तो आपको क्या करना चाहिए.

आप सबसे पहले खराब खाने के सामान की शिकायत उस दुकानदार से कर सकते हैं, जिससे आपने वो सामान खरीदा. इसके अलावा आप अपने ज़िले के स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों से भी इसकी शिकायत कर सकते हैं. 

हर राज्य में एक Food Safety विभाग होता है, उसके कमिशनर से भी आप खराब खाने की शिकायत कर सकते हैं. और अगर आपकी शिकायतों की सुनवाई इन विभागों में नहीं होती.. तो आप National Consumer Forum में भी शिकायत कर सकते हैं. 

ये शिकायत आप एक Toll Free नंबर पर कर सकते हैं. ये नंबर है - 1800-11-4000

इसके अलावा आप National Consumer Forum पर SMS के ज़रिये अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. ये मोबाइल नंबर भी आप नोट कर लीजिए. - 
813-000-9809

इसके अलावा आप National Consumer Forum की Website पर जाकर भी शिकायत कर सकते हैं. इस Website का Address इस वक्त आप अपनी Screen पर देख सकते हैं. 

अगर कोई कंपनी खराब गुणवत्ता वाला खाना बेचती है, तो FSSAI उस पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगा सकती है.  जबकि खाने पीने के भ्रामक विज्ञापन दिखाने पर कंपनी पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. लेकिन जो कंपनी हज़ारों करोड़ रुपये का बिज़नेस करती हो.. उस पर 5 या 10 लाख रुपये क्या फर्क पड़ने वाला है. भारत में ये नियम ज़मीनी स्तर पर लागू नहीं होते.. और दोषी लोग अक्सर बचकर निकल जाते हैं. लेकिन विदेशों में ऐसे मामलों को बहुत गंभीरता से लिया जाता है.

अमेरिका में मिलावट या ख़ाने की खराब Quality के लिए अगर कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है... तो उसे 1 लाख US Dollars यानी 64 लाख रुपये से ज़्यादा का जुर्माना और 1 साल की सज़ा मिल सकती है. मिलावट की वजह से मौत होने पर 2 लाख 50 हज़ार US Dollars यानी 1 करोड़ 60 लाख रुपये से ज़्यादा का जुर्माना भरना पड़ता है. अमेरिका में इसी तरह कोई कम्पनी अगर जानबूझकर मिलावट करे तो उसे 5 लाख US Dollars यानी 3 करोड़ रुपये से ज़्यादा का जुर्माना भरना पड़ सकता है. जबकि ब्रिटेन में खराब खाने की शिकायत होने पर.. दोषी व्यक्ति को 2 साल की सज़ा हो सकती है. और 20 हज़ार Pounds यानी करीब 17 लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है. 

तमाम संस्थाएं तो खाने की गुणवत्ता को बनाए रखने में फेल हुई हैं.. लेकिन आपको  फेल नहीं होना चाहिए.. आपको जागरूक बनना होगा. यहां आपको ये भी याद रखना होगा कि अगर आपकी शिकायत के बावजूद कोई अधिकारी कार्रवाई नहीं करता तो इसका मतलब ये है कि वो रिश्वत की नशीली गोलियां खाकर गहरी नींद में सोया हुआ है.