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नीतिगत बदलाव, निजी कंपनियों के लिए खुला फायरिंग रेंज

सुरक्षा सेवाओं के लिए हथियार बनाना विगत वर्षो के दौरान सरकार का विशेषाधिकार रहा है. मगर इसमें अब नीतिगत बदलाव हुआ है. देशभर में रक्षा बलों के पास 60 फायरिंग रेंज हैं.

नीतिगत बदलाव, निजी कंपनियों के लिए खुला फायरिंग रेंज
(प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली: दो सरकारी हथियार विनिर्माआओं ने अपने फायरिंग रेंज जिनी कंपनियों के लिए खोल दिया है जहां वे कंपनियां 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के अंतर्गत अपनी तरह की पहली पहल के तहत उपकरणों का परीक्षण करेंगी।  तमिलनाडु के त्रिची स्थित आयुध कारखाना और पश्चिम बंगाल के ईशानपुर राइफल फैक्टरी के फाइरिंग रेंज निजी क्षेत्रों के लिए खोले गए हैं। 

सुरक्षा सेवाओं के लिए हथियार बनाना विगत वर्षो के दौरान सरकार का विशेषाधिकार रहा है। मगर इसमें अब नीतिगत बदलाव हुआ है। देशभर में रक्षा बलों के पास 60 फायरिंग रेंज हैं। 

2018 में रक्षा मंत्रालय ने 17 नए फायरिंग रेंज को दी मंजूरी
इसके अलावा, 2018 में रक्षा मंत्रालय ने 17 नए फायरिंग रेंज को मंजूरी प्रदान की जो आकार में छोटे हैं और गोलियों से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए कवर्ड क्षेत्र में हैं। ईशानपुर राइफल फैक्टरी के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि उन्हें अभी तक निजी कंपनियों से कोई आवेदन नहीं मिला है।  हथियारों के परीक्षण के लिए फैक्टरी के पास तीन फायरिंग रेंज हैं जहां 50 मीटर से लेकर 550 मीटर रेंज के हथियारों का परीक्षण किया जाता है। 

अधिकारी ने बताया,'विभिन्न प्रकार के छोटे हथियार, आंसू गैस वाली बंदूक, पंप-एक्शन गन, राइफल और पिस्तौल का हमारे फायरिंग रेंज में परीक्षण किया जाता है। कोई निजी कंपनी अपने हथियार का यहां परीक्षण करने के लिए हमारे पास नहीं आई है।' त्रिची ऑर्डनेंस फैक्टरी (ओएफटी) के फायरिंग रेंज में ग्रेनेड और एसॉल्ट राइफल व सेना की बंदुकों जैसे छोटे हथियारों के परीक्षण की सुविधाएं हैं। 

ओएफटी के एक अधिकारी ने बताया, 'हमारे पास 30 एमएम के गन जैसे मध्यम दूरी के हथियार का परीक्षण करने की भी सुविधा है। हमारे रेंज में हथियारों का परीक्षण उनके सही उपयोग और कार्य की जांच के लिए किया जाता है। ग्रेनेड के लिए अधिकतम रेंज एक किलोमीटर और 750 मीटर के बीच उपलब्ध है।'

त्रिची में छोटे हथियार बनाने का देश में सबसे बड़ा कारखाना है जहां विभिन्न प्रकार के हथियार बनाए जाते हैं। इसकी स्थापना 1966 में हुई थी और उसके एक साल बाद इस कारखाने में उत्पादन शुरू हुआ।  ईशानपुर या इच्चापुर फैक्टरी 1787 से है और इसकी आधुनिक इकाई की स्थापना 1904 में की गई थी।