पूर्व पीएम राजीव गांधी के हत्यारे ने मांगी 'इच्छा मृत्यु', सरकार को लिखी चिट्ठी

पूर्व पीएम राजीव गांधी के हत्यारे ने मांगी 'इच्छा मृत्यु', सरकार को लिखी चिट्ठी
राजीव गांधी के हत्यारे ने की इच्छा मृत्यु की मांग (फाइल फोटो)

चेन्नईः राजीव गांधी हत्या मामले के दोषियों में शामिल एक श्रीलंकाई नागरिक रॉबर्ट पायस ने बुधवार को तमिलनाडु सरकार को चिट्ठी लिखकर इच्छा मृत्यु देने की मांग की है. मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी को लिखे भावुक पत्र में उसने कहा कि उसे दया के आधार पर मृत्यु दी जानी चाहिए और उसके शव को उसके परिवार को सौंप दिया जाना चाहिए.जेल के एक शीर्ष अधिकारी ने मीडिया से कहा, "पायस ने पुझल जेल प्रशासन के जरिए सरकार से याचिका की है." पायस ने कहा ,"हमें नहीं पता कि हमारी रिहाई पर रोक क्यों लगाई गई है."  

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पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने इन दोषियों की रिहाई की पहल की थी.पायस ने कहा, "मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि जब रिहाई की कोई संभावना ही नहीं है तो जिंदा रहने का कोई मतलब नहीं है." उसने कहा कि जेल की लंबी सजा से ना केवल उसे सजा मिली है बल्कि उसके परिवार को भी सजा मिली है. पायस का कहना है कि इस साल 11 जून को उसे जेल में कैद रहते हुए 26 साल हो गए.

पायस ने अपने लेटर में क्या लिखा

"जयललिता ने तमिलों की मांग पर राजीव हत्याकांड के दोषियों की रिहाई का फैसला किया था. ये तमिल केवल तमिलनाडु के नहीं बल्कि पूरी दुनिया के थे. लेकिन केंद्र सरकार ने फैसला लिया कि हमारी जिंदगी जेल में ही खत्म होगी.अब केंद्र और राज्य सरकार दोनों सरकारें खामोश हैं. उन्हें बताना चाहिए कि क्या हमारी जिंदगी जेल में ही खत्म हो जाएगी. मैं जानता हूं कि दोनों सरकारों की मंशा क्या है. मैं ये भी जान गया हूं कि मेरे जीने का कोई मतलब नहीं है और मेरी रिहाई भी नहीं हो सकती. लंबे वक्त तक जेल में रहना केवल मुझे ही नहीं बल्कि परिवार को भी सजा देने जैसा है. 11 जून को जेल में मेरे 26 साल पूरे हो गए. अब 27वां साल है. मैं अब मौत चाहता हूं. बीते कई सालों से परिवार का कोई भी मेंबर या रिलेटिव मुझसे जेल में मिलने नहीं आया. मुझे नहीं लगता कि मेरी जिंदगी का कोई मतलब है. पायस ने ये भी दावा किया, "1999 में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस वाधवा ने मुझे दोषी करार नहीं दिया था. लेकिन तब से मैं सजा काट रहा हूं."

राजीव गांधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में चुनावी सभा के दौरान एक सुसाइड बम हमले में मौत हो गई थी. LTTE ने इसकी साजिश रची थी. नलिनी और उसके पति मुरुगन समेत तीन को 28 जनवरी 1998 को राजीव गांधी मर्डर केस में मौत की सजा सुनाई गई थी. तमिलनाडु के गवर्नर ने 24 अप्रैल 2000 को नलिनी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था. प्रियंका गांधी ने भी नलिनी से मुलाकात की थी. 1 मई को सुप्रीम कोर्ट ने हत्याकांड के एक दोषी पेरारिवलन की पिटीशन पर सुनवाई की। पेरारिवलन को इस केस में सजा-ए-मौत सुनाई गई थी जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उम्र कैद में बदल दिया था.

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याचिका में कहा गया कि ना तो सीबीआई की स्पेशल टीम और ना ही मल्टी डिस्प्लिनरी मॉनिटरिंग एजेंसी (MDMA) ने मामले की सही जांच की. इस मामले में कई बड़े नाम शामिल थे. इनकी जांच भी होनी चाहिए. बेंच ने सीबीआई से कहा कि वो इस केस की डीटेल्ड रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करे. साथ ही ये भी बताए कि कितने वक्त (टाइम फ्रेम) में जांच पूरी होगी. कोर्ट ने जांच एजेंसी से कहा कि केस में जांच में कानूनी दिक्कतों के अलावा भी जो परेशानियां हैं, उन्हें भी बताया जाए. कोर्ट के सवालों पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने कहा- मामले की जांच जारी है, इसमें कुछ और वक्त लगेगा क्योंकि कुछ आरोपी भगोड़े हैं. सिंह ने ये भी कहा कि कुछ आरोपी देश से बाहर हैं, लिहाजा उनका एक्स्ट्राडीशन (प्रत्यर्पण) कराना होगा.