China दुनिया की अर्थव्यवस्था को करेगा चौपट! पहले महामारी अब लाएगा महामंदी?

Global Economy Recession: चीन की Evergrande कंपनी ने चीन में लाखों घरों के निर्माण के लिए भारी भरकम कर्ज लिया था. एक आंकड़े के मुताबिक चीन की इस कंपनी पर जो कर्ज है वो पिछले एक दशक में 56 गुना बढ़ गया है.

China दुनिया की अर्थव्यवस्था को करेगा चौपट! पहले महामारी अब लाएगा महामंदी?
चीन का कर्ज वाला वायरस.
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नई दिल्ली: अब चीन (China) के प्रॉपर्टी मार्केट की वजह से दुनिया की अर्थव्यवस्था दम तोड़ सकती है. आज से 2 वर्ष पहले चीन ने दुनिया को कोरोना वायरस दिया था और आज से ठीक दो दिनों के बाद चीन दुनिया को आर्थिक महामंदी दे सकता है. अगर ऐसा हुआ तो इससे आपकी आमदनी भी मंदी हो जाएगी और जैसे कोरोना वायरस ने आपको जीवन को प्रभावित किया था वैसा ही इस आर्थिक मंदी की वजह से भी हो सकता है.

चीन की कंपनी पर 22 लाख करोड़ का कर्ज

चीन की सबसे बड़ी प्राइवेट Real Estate कंपनी Evergrande है. ये कंपनी दुनिया की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है जिन्हें Fortune 500 कहा जाता है. लेकिन Evergrande पर 300 बिलियन डॉलर्स यानी 22 लाख 50 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. ये कर्ज वर्ष 2021 और 2022 के लिए भारत सरकार की अनुमानित 20 लाख करोड़ रुपये की आय से भी ज्यादा है. Evergrande को दो दिन बाद यानी गुरुवार तक कर्ज पर लगने वाले ब्याज की एक किश्त चुकानी है.

महिला ने कंपनी के दफ्तर के बाहर की आत्महत्या की कोशिश

Evergrande ये इशारा कर चुकी है कि उसके पास अब कर्ज चुकाने की क्षमता नहीं है यानी ये कंपनी कभी भी दिवालिया हो सकती है. एक महिला ने चीन के Shenzhen शहर में Evergrande के दफ्तर के बाहर आत्महत्या करने की कोशिश की. ये महिला चीन के उन 15 लाख लोगों में से एक है जिन्होंने इस कंपनी से वो घर खरीदें हैं जिनका निर्माण अभी चल रहा है. अपना पैसा डूबने के डर से इन लोगों ने Evergrande के दफ्तर में ही धरना भी दिया.

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अब चीन के अलग-अलग शहरों में चीन की इस कंपनी के खिलाफ ऐसे ही विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. लेकिन दुनिया की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में से एक Evergrande अब दिवालिया हो सकती है. और अगर ऐसा हुआ तो ये तस्वीरें आपको दुनिया में अलग-अलग जगहों पर दिखाई देंगी क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा. अगर ये कंपनी अपना कर्ज नहीं चुका पाई तो वर्ष 2008 में आई आर्थिक मंदी के बाद दुनिया एक बार फिर से इसका शिकार हो सकती है.

2008 में इसी तरह आई थी महामंदी

ये विडंबना है कि आज दुनिया अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मना रही है लेकिन चीन की वजह से दुनिया अब जल्द ही आर्थिक रूप से अशांत हो सकती है. वर्ष 2008 में अमेरिका का एक बहुत बड़ा वित्तीय संस्थान और बैंक इसी तरह डूब गया था जिसका नाम Lehman Brothers था. जब अमेरिका का ये बैंक डूबा था तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में 6 प्रतिशत तक सिकुड़ गई थी, पूरी दुनिया में साढ़े 6 करोड़ लोगों की नौकरियां चली गई थीं, भारत में भी 5 लाख लोग बेरोजगार हो गए थे.

भारत ने इससे बचने के लिए जो आर्थिक उपाय किए थे उसका खामियाजा आज भी भारत की अर्थव्यवस्था राजस्व घाटे के रूप में उठा रही है. यानी तब भारत सरकार की आमदनी घट गई थी और खर्चा बढ़ गया था और आज तक आमदनी और खर्च के इस अंतर को ज्यादा कम नहीं किया जा सका है. जब सरकार खर्च और आमदनी के अंतर को कम करती है तो लोगों पर ज्यादा टैक्स लगाया जाता है और इसका असर भी आम आदमी की जेब पर पड़ता है.

चीन की इस कंपनी को गुरुवार तक अपने कुल कर्ज में से 5 हजार करोड़ रुपये की किश्त चुकानी है. लेकिन दुनिया की बड़ी-बड़ी Rating एजेंसियों का अनुमान है कि Evergrande ऐसा नहीं कर पाएगी इसलिए अब इस कंपनी की Rating को भी घटा दिया गया है. अब आप सोच रहे होंगे कि कंपनी तो चीन की डूब रही है फिर भारत के लोगों को चिंता क्यों होनी चाहिए तो इसकी वजह ये है अब दुनिया के हर देश की अर्थव्यवस्था आपस में जुड़ी हुई है.

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दो दिन पहले जब ये खबर आई कि Evergrande कर्ज नहीं चुका पाएगी इसके बाद सोमवार को भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुले. दुनिया भर के शेयर बाजारों से निवेशकों ने 165 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए ये भारत की मौजूदा अर्थव्यवस्था से भी ज्यादा है. जो इस समय 135 लाख करोड़ रुपये के आसपास है. इतना ही नहीं इस खबर के बाद दुनिया के 10 सबसे अमीर उद्योगपतियों की संपत्ति को 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

Evergrande चीन की सबसे बड़ी Real Estate कंपनियों में से एक है. जिसने चीन में 280 से ज्यादा शहरों में लाखों घरों का निर्माण किया है. पिछले एक दशक में चीन में जो Property Boom आया उसमें भी इस कंपनी का बड़ा रोल रहा है. लेकिन अब स्थिति ये है कि चीन के कई Housing Projects में इस कंपनी के 75 लाख करोड़ रुपये फंस गए हैं, ये वो Projects हैं जो अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं.

भारत में स्टील का निर्माण करने वाली कंपनियां अपना 90 प्रतिशत माल चीन को ही बेचती हैं जबकि Metal और Iron Ore का निर्माण करने वाली कंपनियां 90 प्रतिशत माल चीन को बेचती है और इसमें भी Evergrande सबसे बड़े खरीददारों में से एक है. जो घरों के निर्माण में इनका इस्तेमाल करती है. अब अगर ये कंपनी डूबी तो चीन को भारत का निर्यात भी प्रभावित होगा.

भारत के 25 लाख लोग इसी Steel और Iron उद्योग के लिए काम करते हैं यानी चीन की एक कंपनी का डूब जाना भारत के 25 लाख परिवारों को सीधे प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा चीन की जिन कंपनियों ने भारत में निवेश किया है वो भी Evergrande के डूबने से प्रभावित होंगी.

चीन की कंपनियों ने भारत में 60 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया हुआ है और भारत में इस समय जितने बड़े Startups हैं उनमें भी चीन की कंपनियों के 42 हजार करोड़ रुपये लगे हैं. ये भी इससे प्रभावित होंगे और इनमें काम करने वाले लाखों लोगों के जीवन पर भी इसका असर पड़ेगा.

ये सारी आशंकाएं आपको वर्ष 2008 की आर्थिक मंदी की याद दिला रही होंगी, जब अमेरिका के सबसे बड़े बैंकों में से एक Lehman Brothers दिवालिया हो गया था. Lehman Brothers पर करीब 44 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था. Lehman Brothers ने अमेरिका में लाखों लोगों को घर खरीदने के लिए बहुत सस्ते Loan दिए थे, जिन पर ब्याज ना के बराबर था. इस बैंक को लगता था अमेरिका का प्रॉपर्टी मार्केट कभी नहीं गिरेगा लेकिन अचानक इस मार्केट में गिरावट आ गई, घरों की कीमत नीचे गिरने लगी और नतीजा ये हुआ कि लोगों ने घर खरीदने के लिए जो लोन लिए थे.

उसके मुकाबले घरों की मार्केट वैल्यू आधी रह गई यानी अगर किसी ने घर खरीदने के लिए 50 लाख का लोन लिया था तो उसकी कीमत 25 लाख ही रह गई थी लेकिन लोन तो 50 लाख का ही चुकाना था इसलिए लोग लोन चुकाने में असफल होने लगे और इसी वजह से ये बैंक डूब गया.

चीन की Evergrande ने भी चीन में लाखों घरों के निर्माण के लिए भारी भरकम कर्ज लिया था. एक आंकड़े के मुताबिक चीन की इस कंपनी पर जो कर्ज है वो पिछले एक दशक में 56 गुना बढ़ गया है. लेकिन जैसे चीन ने ये मानने से इनकार किया था कि चीन में कोरोना वायरस बेकाबू हो गया है वैसे ही चीन इस कंपनी के दिवालिया होने की आशंका से भी इनकार कर रहा है.

लेकिन आज पूरी दुनिया इस कंपनी के डूबने की आशंका से परेशान है क्योंकि इस कंपनी को कर्ज लेने का वायरस लग चुका था. बावजूद इसके Evergrande ने एक Football Acadmey बनाई और चीन में ही दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल स्टेडियम का निर्माण किया जिसमें 1 लाख दर्शक बैठ सकते हैं.

इसी कंपनी ने एक Miniral Water Brand भी लॉन्च किया था. इतना ही नहीं ये कंपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के कारोबार में भी उतरी. इस साल अप्रैल तक इलेक्ट्रिक गाडियां बनाने वाली इस कंपनी का बाजार मूल्य साढ़े 6 लाख करोड़ रुपये था जबकि सच ये है कि इस कंपनी ने अब तक अपनी एक भी गाड़ी नहीं बेची है.

असल में बाजार में कंपनियों का जो मूल्य लगाया जाता है, वो कई बार एक तरह का घोटाला ही होता है क्योंकि किसी को पता नहीं होता कि अंदर से कंपनी की हालत क्या है और वो कितनी खोखली हो चुकी है.

अब जिस कंपनी को किसी कारोबार से कोई खास आमदनी ही नहीं हो रही वो भला अपने कर्ज कैसे चुकाएगी. नतीजा ये हुआ कि इस साल की शुरुआत से अब तक Evergrande के शेयर 81 प्रतिशत तक गिर चुके हैं.

अब Evergrande के पास सिर्फ यही विकल्प है कि चीन की सरकार इस कंपनी को Bail Out कर दे. जैसे वर्ष 2008 में अमेरिका की सरकार ने Lehman Brothers के साथ किया था . चीन की GDP में 16 से 28 प्रतिशत हिस्सेदारी Housing Sector की है.

Evergrande की कहानी असल में चीन की कहानी है. चीन की सारी तरक्की कर्ज पर आधारित है और इस कर्ज के बोझ के नीचे सिर्फ चीन का Real Estate Market ही नहीं दबा है बल्कि चीन की अलग-अलग कंपनियों को अगले 12 महीनों में 97 लाख करोड़ रुपये का कर्ज चुकाना है. कर्ज ना चुका पाने की वजह से ही वर्ष 2020 की शुरुआत में चीन की 2 लाख कंपनियों ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था और ये संख्या अभी और बढ़ सकती है.

लेकिन कर्ज की इस समस्या का हल चीन और कर्ज लेकर तलाश रहा है. वर्ष 2020 में चीन के बैकों ने चीन की कंपनियों को 225 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बांटा था. ये भारत की अर्थव्यवस्था से भी काफी ज्यादा है. कुल मिलाकर एक दिन कर्ज के इसी बोझ में चीन के बैंक भी डूब जाएंगे और चीन की आर्थिक तरक्की का बुलबुला फूट जाएगा.

अगर Evergrande को लेकर आशंकाएं सच साबित हुईं तो इसका असर चीन में नहीं बल्कि भारत जैसे देशों में दिखाई देगा जैसा 2008 की आर्थिक मंदी के दौरान हुआ था. वर्ष 2007 और 2008 में भारत के GDP की विकास दर 9 प्रतिशत थी जो वर्ष 2012-13 तक 5 प्रतिशत पर आ गई थी.

इससे बचने के लिए तत्कालीन सरकारों ने कुछ आर्थिक उपाय किए थे लेकिन इसके बाद 5 वर्षों के दौरान सरकार का वित्तिय घाटा सवा लाख करोड़ रुपये से बढ़कर सवा पांच लाख करोड़ रुपये हो गया था. इस दौरान महंगाई दर भी बढ़कर 9 से 10 प्रतिशत हो गई थी और जैसा कि हमने आपको बताया 5 लाख लोगों की नौकरियां भी चली गईं थी. साफ है कि इस बार अगर चीन से आर्थिक मंदी की शुरुआत होती है तो इससे आपकी नौकरियां भी जाएंगी और आपकी आमदनी भी मंदी हो जाएगी.

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