ZEE जानकारी: मोदी सरकार ने किया भारत की सैन्य व्यवस्था का सबसे बड़ा सुधार

आज से भारत एक नए युग में प्रवेश कर रहा है. क्योंकि आज भारत ने Chief of Defence Staff यानी CDS के पद को मंजूरी दे दी है.

ZEE जानकारी: मोदी सरकार ने किया भारत की सैन्य व्यवस्था का सबसे बड़ा सुधार

आज से भारत एक नए युग में प्रवेश कर रहा है. क्योंकि आज भारत ने Chief of Defence Staff यानी CDS के पद को मंजूरी दे दी है. इसे आप आज़ाद भारत की सैन्य व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण सुधार भी कह सकते हैं. इसलिए आज हम देश के सबसे बड़े सैन्य सलाहकार की जिम्मेदारियों और चुनौतियों का एक विश्लेषण करेंगे. देश की सेना को और बेहतर बनाने...और इसके तीनों अंगों...यानी थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच मज़बूत तालमेल के लिये इसे आप एक क्रांतिकारी फ़ैसला कह सकते है. हमारे देश में तीन सेनाएं हैं. नौ सेना, थलसेना और वायु सेना और इन तीनों सेनाओं का एक-एक सेना प्रमुख होता है.

तीनों सेना प्रमुख रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करते हैं. नई व्यवस्था में रक्षा मंत्रालय में Department of Military Affairs नामक एक नया डिपार्टमेंट बनाया जाएगा. और इस Department का नेतृत्व CDS करेगा . सबसे पहला प्रश्न ये है कि CDS की जरूरत क्यों पड़ी.. आज पूरी दुनिया में Army, Air Force, Navy और Cyber Space एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

अमेरिका से लेकर चीन तक अपनी तमाम सेनाओं को शक्तिशाली बनाने के लिए एक Unified Command में ला रहे हैं. भारत को तीन तरफ से खतरा है... पहला उत्तर पश्चिम में पाकिस्तान की तरफ से, दूसरा खतरा उत्तर पूर्व में चीन से है और तीसरा 7 हजार किलोमीटर लंबी भारत की समुद्री सीमा में चीन की Navy से खतरा है. आज अगर युद्ध होता भी है और अगर Cyber ताकत का सही से इस्तेमाल कर लिया गया तो सैन्य ताकत कितनी भी बड़ी हो.

वो एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकती है. यानी कि किसी भी देश की सेना में कितने जवान हैं ये उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना पहले था . आज की आवश्यकता ये है कि Army, Air Force और Navy... में भले ही सैनिकों की संख्या कम हो.लेकिन उनका आपस में तालमेल उत्तम होना चाहिए. ये तभी संभव है.. जब रक्षा व्यवस्था के सारे अंग एक रणनीति का पालन करें.

भारत के युद्ध इतिहास को अगर हम देखें तो हमें पता चलेगा कि सेना में आपसी सामंजस्य की कमी के कारण वर्ष 1962 में चीन से हुए युद्ध में भारत की पराजय हुई थी . पर क्योंकि वर्ष 1971 में हुए पाकिस्तान से युद्ध में भारत की तीनों सेनाओं ने मिलकर मोर्चा संभाला था इसलिए मात्र 13 दिनों में पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों ने भारत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था.

पर वर्ष 1999 में हुए कारगिल युद्ध में इस तालमेल में कमी देखने को मिली थी जिसके कारण कारगिल युद्ध जीतने में भारत को 60 दिनों का समय लगा था. और इसमें भारत के 527 सैनिक शहीद हुए थे. इसी कारगिल युद्ध के बाद समीक्षा के लिए Kargil Review Committee बनाई गई थी .

- जिसकी रिपोर्ट ने भी तीनों सेनाओं के बीच तालमेल की कमी बताई थी. सरकार को पहली बार CDS बनाने की सिफारिश भी इसी कमेटी ने दी थी.

- इसके बाद वर्ष 2012 में नरेश चंद्रा कमेटी ने भारत सरकार को Chairman of Cheif of Staff Committe पद बनाने का प्रस्ताव दिया था.

- और वर्ष 2016 में Lieutenant General डीबी शेकतकर कमेटी ने सरकार को सलाह दी थी कि Army, Air Force और Navy के प्रमुखों के साथ ताल मेल के लिए एक Four Star General नियुक्त किया जाए .

इसी वर्ष 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से CDS बनाने की घोषणा की थी. इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई थी जिसने CDS की भूमिका और अधिकार तय करके कैबिनेट को प्रस्ताव भेज दिया था . और कैबिनेट ने आज उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है . अब भारत भी चीन और अमेरिका कि तरह Unified Command की दिशा में एक कदम आगे बढ़ चुका है .

- अब CDS एक Four Star General को बनाया जाएगा...जो तीनों सेनाओं में सबसे वरिष्ठ होगा .

- फिलहाल Army, Air Force और Navy के प्रमुख ही Four Star General होते हैं .

अब अगला प्रश्न ये है कि CDS की जिम्मेदारी क्या होगी ? आजादी के 70 वर्षों बाद भी भारत की सरकार ने अपनी सैनिक व्यवस्था के लिए आधिकारिक तौर पर कभी कोई रणनीति का दस्तावेज बनाकर नहीं दिया है. इस दस्तावेज को Strategic Document कहते हैं . अमेरिका और चीन जैसे देश भी अपने लिए Strategic Document बनाते रहे हैं और लगातार इसमें सुधार करते रहते हैं.

CDS की सबसे प्रमुख जिम्मेदारी सरकार के लिए सैन्य मामलों में Strategic Document बनाकर देना होगा. इससे पाकिस्तान जैसे देश में खलबली मच सकती है. क्योंकि Strategic Document बनने के बाद पाकिस्तान... Non State Actors जैसे बहाने नहीं बना पाएगा . Non State Actors पाकिस्तान के वो आतंकवादी हैं जो भारत में आतंक फैलाते हैं पर पाकिस्तान दावा करता है कि उनपर उसका कोई नियंत्रण नहीं है.

Strategic Document बनने के बाद सेना को ऐसे आतंकियों पर कार्रवाई करने के लिए सरकार से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी . और ये पाकिस्तान के लिए खतरनाक साबित हो सकता है .

- इसके अलावा CDS का काम प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को उन मुद्दों पर सलाह देना होगा...जो देश की समग्र रक्षा और सामरिक मुद्दों से जुड़े होंगे.
- किसी सैन्य अभियान में सेना के अलग-अलग अंगों को शामिल करने और संयुक्त ऑपरेशन चलाने का फैसला भी CDS ले पाएंगे.
- अब तीनों सेनाएं भी अपनी ज़रूरतों के बारे में सरकार को ज़्यादा प्रभावी तरीक़े से बता पाएंगी, चाहे वो हथियारों की ख़रीद हो...या फिर अलग-अलग कमांड की ज़रूरतें हो. यानी अब सेनाएं अपनी प्लानिंग बेहतर तरीक़े से कर पाएंगी.
- इसका फायदा ये होगा कि... Army, Air Force और Navy के चीफ पूरी तरह से अपनी फ़ोर्स पर ध्यान दे पाएंगे और CDS उनके प्रतिनिधि के तौर पर सरकार से बात करेंगे.
- तीनों सेनाओं को मिलने वाले बजट का उचित इस्तेमाल करने में मदद के लिए CDS अब Defence Acquisition Council यानि DAC के सदस्य होंगे . और सरकार को इस मामले में सलाह देंगे .
- DAC... सेनाओं की रक्षा ज़रूरतों को पूरा करती है और सभी रक्षा सौदे करती है. तीनों सेनाओं के पास मौजूद संसाधनों को अब आपस में बांटा जा सकेगा . और CDS तीनों सेनाओं के मौजूदा Infrastructure और उपकरणों के उचित इस्तेमाल के लिए भी ज़िम्मेदार होगा .

अब आप समझिए कि CDS पद के बनने से रक्षा क्षेत्र में जमीनी बदलाव क्या होंगे?
- तीनों सेनाओं की ऑपरेशनल कमान. अंडमान निकोबार कमान भी CDS के अंतर्गत आएगी.
- तीनों सेनाओं की सम्मिलित कमान यानि थियेटर कमान से जुड़े मामलों में CDS रक्षा मंत्री के प्रधान सलाहकार होंगे .
- CDS के अंतर्गत सीधे कोई भी मिलिट्री कमांड नहीं होगी, लेकिन वो थियेटर कमान के प्रमुख होंगे.
- तीनों सेनाओं के ऑफिसरों का ट्रेनिंग स्कूल यानि National Defence Academy, Armed Forces Medical Service, Engineering Service और National Defence College भी CDS की कमान में होगा.
- सैनिक संचार के लिए जिम्मेदार Signal Officer In-Charge भी CDS को रिपोर्ट करेगा.
- खास Operations के लिये इसी साल बनाई गईं तीनों सेनाओं की साझा कमान Special Operation Division, Defence Cyber Agency और Defence Space Agency भी CDS को रिपोर्ट करेंगी.

आप कह सकते हैं कि CDS भारतीय सैनिक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पद होगा. इसलिए इस पद से जुड़े कुछ खास नियम भी बनाए गए हैं.
- CDS पद से रिटायर होने के बाद उस व्यक्ति को कोई सरकारी पद नहीं मिलेगा.

- और पद छोड़ने के बाद 5 वर्षों तक सरकार की इजाजत के बिना वो किसी Private कंपनी में भी रोजगार नहीं कर पाएंगे.

भारतीय सेना की नई क्रांति की खबर को आसान भाषा में बताने के लिए आज हमने सैन्य विशेषज्ञों से बात की है. ताकि आप समझ सके कि हमारी शक्तिशाली सेना के लिए ये कितना महत्वपूर्ण है.

एक कहावत है कि एकता में बल है यानी साथ मिलकर करने से कोई भी काम आसान हो जाता है. देश की तीनों सेनाओं के लिए ये कहावत एकदम सही है. मान लीजिए अगर थल सेना कहीं युद्ध लड़ रही हो और उसे वायु सेना की मदद मिल जाए... तो दुश्मनों की हार जल्दी तय हो सकती है. देश के सामने लगातार चुनौतियां बढ़ रही हैं...और सैन्य व्यवस्था, सैन्य शक्ति और सैन्य संसाधन में सुधार लाने की ज़रूरत है.

वर्ष 1962 में जब भारत का चीन के साथ युद्ध हुआ था...तो वायु सेना का बेहतर इस्तेमाल नहीं किया गया था. और ऐसी बहुत सी कमियों की वजह से ही भारत ये जंग हार गया था.

वर्ष 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में भारतीय नौसेना का और अच्छी तरह इस्तेमाल कर सकता था. कहा जाता है कि तब नौसेना को पूरे प्लान की जानकारी नहीं थी .

वर्ष 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में तीनों सेनाओं में जबरदस्त तालमेल रहा... भारतीय वायुसेना ने युद्ध के शुरुआत में ही पूर्वी पाकिस्तान के सारे एयरबेस तबाह कर दिए थे . और पाकिस्तान की वायुसेना को करीब-करीब नष्ट कर दिया था, जिससे भारतीय सेना के लिए जमीन पर लड़ाई आसान हो गई थी. भारतीय नौसेना ने भी बंगाल की खाड़ी में घेरेबंदी करके पूर्वी पाकिस्तान तक सैन्य मदद पहुंचने पर रोक लगा दी थी.

वर्ष 1999 में कारगिल के युद्ध के बाद भारत ने CDS के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू किया था...और अब 20 वर्षों बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे मुमकिन कर दिया है.

Chief of Defence Staff का पद भारत के लिये नया है...लेकिन दुनिया में 70 से ज़्यादा देश इस सैन्य व्यवस्था को बहुत पहले अपना चुके हैं...और कामयाब भी रहे हैं. इनमें से कई देशों में Army, Air Force, Navy और Cyber Command एकजुट हैं और Unified भी हैं.

यहां Unified का मतलब है कि किसी क्षेत्र में हो रहे युद्ध में उस सेना के सभी अंग मिलकर काम करते हैं ताकि कम समय और संसाधन का इस्तेमाल करके युद्ध को जीता जा सके. अमेरिका, Russia, फ्रांस, जर्मनी, Canada और चीन की सेनाओं में CDS या इसके जैसा ही पद है. चीन और अमेरिका में CDS के तहत थियेटर कमांड सिस्टम बना हुआ है.

एक थियेटर कमांड के तहत थल सेना, वायु सेना और नौसेना की अलग-अलग टुकड़ी आती हैं, जो एक साथ, एक कमांडर के नेतृत्व में काम करती हैं. जैसे अमेरिका में अफ़ग़ानिस्तान और सीरिया जैसे युद्ध क्षेत्रों के लिये अलग कमांडर बनाए गए हैं. चीन में भी पश्चिमी मोर्चे को लेकर एक अलग कमांडर नियुक्त किया गया है.

जो भारत के साथ युद्ध के हालात में सैन्य ऑपरेशन का नेतृत्व करेगा. और उस इलाके में मौजूद सेना के सभी अंग उस कमांडर के अधीन होंगे. इसलिये अब भारत को भी ऐसी ही व्यवस्था की ज़रूरत है. हमारी सेना भी अमेरिका और चीन की सेना की तरह आधुनिक बन रही है. Technology के बढ़ते इस्तेमाल के साथ हमें पुरानी व्यवस्था को बदलना ही होगा. सवाल ये भी है कि Nuclear हमले जैसे विषयों पर कौन फैसला लेगा, साइबर युद्ध की स्थिति में आखिरी फैसला किसका होगा और अगर युद्ध अंतरिक्ष तक पहुंच गया तो फिर उसके बारे में कौन अतिम निर्णय लेगा.