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सूरत: महात्‍मा गांधी की पौत्रवधू शुरू करना चाहती थीं ट्रस्ट, चैरिटी कमिश्‍नर ने किया अपमान

अपने पैसे और जायदाद को भारत के गरीब बच्चों के लिए शिवा लक्ष्मी गांधी 'शिवा एंड कनु रामदास मोहनदास गांधी' नाम से ट्रस्ट शुरू करना चाहती थीं. 

सूरत: महात्‍मा गांधी की पौत्रवधू शुरू करना चाहती थीं ट्रस्ट, चैरिटी कमिश्‍नर ने किया अपमान
गांधीजी की पौत्रवधू डॉ. शिवा लक्ष्मी गांधी.

सूरत : कई बार सरकारी अधिकारियों द्वारा लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने की बात हर किसी ने सुनी होगी या कई की आपबीती भी होगी. ऐसी ही एक घटना सूरत से सामने आई है. जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और उनकी पौत्रवधू का सरेआम अपमान होने की बात सामने आई है. अपनी संपत्ति गरीब बच्चों के लिए दान करने की इच्‍छा के साथ महात्‍मा गांधी की पौत्रवधू शिवा लक्ष्मी एक ट्रस्ट शुरू करना चाहती थीं. इसके लिए उन्होंने कई बार चैरिटी कमिश्नर को अर्जी दी थी. लेकिन चैरिटी कमिश्नर ऑफिस द्वारा कोई भी कार्रवाई नहीं की गई.

साथ ही चैरिटी कमिश्नर ऑफिस द्वारा इस तरह की टिप्पणी की गई कि गांधी परिवार महात्‍मा गांधी के नाम का उपयोग करना चाहता है. इस बात को लेकर सोमवार को 92 वर्षीय शिवा लक्ष्मी खुद चैरिटी कमिश्नर के ऑफिस पहुंचीं और ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करवाया. देश को आजादी दिलाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सादा और सरल जीवन व्यतीत किया. उनके परिवार के लोग भी आजतक सादा जीवन जीते आए हैं और जी रहे हैं. 

गांधीजी के परिवार ने कभी भी बापू के नाम का उपयोग कभी भी अपने निजी फायदे के लिए नहीं किया. बल्कि हमेशा लोगों की सेवा करने का प्रयास किया है. लेकिन जिस बापू की तस्वीर सरकारी अधिकारी अपने दफ्तर में लगाते हैं. उन्हीं सरकारी अधिकारियों द्वारा गांधीजी की पौत्रवधू को 92 साल की उम्र में दो माले चढ़ने को मजबूर किया. क्योंकि अधिकारी की जिद थी कि डॉ. शिवा लक्ष्मी गांधी खुस ऑफिस में आए. बात यह है कि शिवा लक्ष्मी गांधी जो महात्मा गांधी के पौत्र डॉ. कनुभाई गांधी की पत्नी है. 

कुछ साल पहले भारत आकर कनुभाई गांधी के साथ सूरत में बस गए. कुछ समय के लिए वो दिल्ली भी रहने गए थे. कुछ बाद कनुभाई गांधी का देहावसान हो गया तब अकेली रह रही डॉ. शिवा लक्ष्मी गांधी को सूरत के भीमराड़ इलाके में रहने वाले बलवंत पटेल अपने घर ले आए. कनुभाई अमेरिका की नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन नासा में वैज्ञानिक थे. इस्तीफा देने के बाद नासा द्वारा डॉ. कनुभाई के योगदान को लेकर उनको पेंशन दी जा रही थी. जो कनुभाई की मौत के बाद उनकी पत्नी को दिया जा रहा है. अपने पैसे और जायदाद को भारत के गरीब बच्चों के लिए उपयोग में लाने के लिए शिवा लक्ष्मी गांधी द्वारा "शिवा एंड कनु रामदास मोहनदास गांधी नाम से ट्रस्ट शुरू करना चाहती थी. 

उसके लिए उन्होंने सूरत चैरिटी कमिश्नर ऑफिस में अर्जी दी थी. लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी उनकी एप्लिकेशन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी. तब शिवालक्ष्मी ने कहा था की कैसा सिस्टम है, सेवा के लिए दान देना है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.

ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी ने कहा कि दो महीने तक अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई तब वे खुद चैरिटी कमिश्नर के ऑफिस गए और अधिकारियों से मिले तब अधिकारियों ने कहा कि ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करना हो तो मुख्य ट्रस्टी और दान देते देने वाले को चेरेटी कमिश्नर के ऑफिस आना होगा. 

इस पर परिमल देसाई द्वारा अधिकारियों को कहा गया कि ट्रस्ट की तरफ से आपको मैनेजिंग ट्रस्टी बनाया गया है, उनके पास सभी जरुरी ओरिजनल डॉक्युमेंट्स भी है, साथ ही मुख्य ट्रस्टी और दानदाता की उम्र 92 वर्ष है इस परिस्थिति में वो चैरिटी ऑफिस तक आने में सक्षम नहीं है. शिवा लक्ष्मी गांधी पौत्रवधू हैं यह बात परिमल देसाई ने अधिकारियों को बताई. तब चैरिटी कमिश्नर ऑफिस के अधिकारी ने कहा कि जो भी हो पर ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए शिवा लक्ष्मी को ऑफिस आना ही पड़ेगा, परिमल देसाई को उस वक्त काफी बुरा और अपमान जनक लगा जब चैरिटी ऑफिस के अधिकारी में यहां टिप्पणी की और कहा कि सरदार पटेल के वंशज कभी भी सरदार के नाम को भुनाने की कोशिश नहीं करते हैं तो गांधी जी के वंशज गांधीजी के नाम को क्यों भुना रहे हैं. उसके बाद 11 मार्च की तारीख चैरिटी कमिश्नर की तरफ से ट्रस्ट को दी गई और 92 वर्षीय शिवा लक्ष्मी चैरिटी कमिश्नर के ऑफिस व्हील चेयर पर बैठकर पहुंचीं और ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी की.