भारतीय किशोरों की लंबाई क्यों रह जाती है कम, स्टडी में वजह आई सामने

भारत में कुपोषण की वजह से किशोर बालक और बालिकाओं का शरीर औसत से कम विकसित रह जाता है और वो वैश्विक स्तर पर पिछड़े रह जाते हैं. ताजे अध्ययन के मुताबिक भारत बॉडी मास इंडेक्स (Body Mass Index) के मामले में दुनिया के 200 देशों में 196वें नंबर पर है़.

भारतीय किशोरों की लंबाई क्यों रह जाती है कम, स्टडी में वजह आई सामने
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: भारत में कुपोषण की वजह से किशोर बालक और बालिकाओं का शरीर औसत से कम विकसित रह जाता है और वो वैश्विक स्तर पर पिछड़े रह जाते हैं. ताजे अध्ययन के मुताबिक भारत बॉडी मास इंडेक्स (Body Mass Index) के मामले में दुनिया के 200 देशों में 196वें नंबर पर है़. इस अंतर की वजह से भारत (India) से किशोर और किशोरियों की औसत लंबाई दुनिया के विकसित देशों के किशोर किशोरियों की तुलना में 20 सेमी तक कम होती है.

इंपीरियल कॉलेज, लंदन का शोध
दुनिया भर में किशोरों (19 वर्ष तक की उम्र) की औसत ऊंचाई और घटते वजन के बीच सीधा संबंध होता है. इम्पीरियल कॉलेज, लंदन के अध्ययन में पता चला है कि स्कूली बच्चों की ऊंचाई और वजन दुनिया भर में अलग-अलग हैं. सबसे ऊंचे और सबसे छोटे देशों के बीच लगभग 20 सेमी (7.9 इंच) का अंतर बच्चों के खराब आहार का परिणाम था. लड़कियों की बीएमआई में भारत नीचे से तीसरे नंबर पर है और लड़कों के मामले में नीचे से पांचवें नंबर पर भारत है.

लंबाई और बॉडी मास इंडेक्स में अंतर
शोधकर्ताओं ने पाया कि अधिक जनसंख्या और कम जनसंख्या वाले देशों के बीच इस अवधि में युवाओं की लंबाई और बॉडी मास इंडेक्स में काफी अंतर आया. इस अध्ययन में बॉडी मास इंडेक्स पर भी विस्तृत विश्लेषण किया और विभिन्न देशों के बीच इसमें अंतर की जांच की. 1985 से 2019 तक के आंकड़ों की जांच के बाद सामने आया कि भारत उन देशों में क्रमशः नीचे से तीसरे और पांचवें स्थान पर काबिज है, जहां 19 वर्षीय युवाओं का बॉडी मास इंडेक्स सबसे कम है. भारत के साथ इस सूची में बांग्लादेश, इथोपिया, जापान, रोम समेत अन्य देश शामिल हैं. अधिक बीएमआई के मामले में कुवैत, बहरीन, बहामस, चिली, अमेरिका और न्यूजीलैंड शामिल हैं. इसका मतलब है कि अमेरिका और न्यूजीलैंड के लोग भारतीयों की अपेक्षा अधिक मोटे और लंबे होते हैं

200 देशों के युवाओं को किया गया शामिल
इस अध्ययन में 6.5 करोड़ प्रतिभागियों को शामिल किया गया. इस दौरान उनकी लंबाई, वजन और बॉडी मास्क इंडेक्स की निगरानी की गई. शोधकर्ताओं ने पाया कि अधिक साल 2019 तक अधिक जनसंख्या वाले देशों और कम जनसंख्या वाले देशों के बीच में औसतन 19 वर्ष के आयु समूह में लंबाई में अधिक का अंतर आया. अधिक जनसंख्या वाले देशों नीदरलैंड, मोंटेंग्रो, एस्टोनिआ, बोस्निया, डेनमार्क और आइसलैंड में लड़के और लड़कियों की औसत लंबाई कम जनसंख्या वाले सोलोमन आइसलैंड, लाओस, पपुआ न्यू गिनी, ग्वाटेमाला, बांग्लादेश, नेपाल की तुलना में अधिक थी. इन देशों में लंबाई में अंतर 20 सेंटीमीटर या उससे अधिक पाया गया.

क्या है बीएमआई?
बीएमआई से पता लगाया जाता है कि आप फिट हैं या नहीं. आपका वजन कम है या फिर तय मानक से ज्यादा है. सेहत के लिए जरूरी है कि लंबाई के हिसाब से आपका वजन भी उतना ही हो. कोई भी व्यक्ति तभी स्वस्थ होता है जब उसके शरीर का वजन और लंबाई संतुलित होती है.

बीएमआई का सही अनुपात जरूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक बीएमआई स्तर 18.5 से 24.9 के बीच में होना एक आदर्श स्थिति मानी जाती है. इसका मतलब होता है कि आपका वजन आपकी लंबाई के हिसाब से बिल्कुल ठीक है. वहीं बीएमआई के 18.5 से कम होने का मतलब है कि आपका वजन सामन्य से कम है.

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