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क्या आप जानते हैं थल, जल और नभ सेना क्यों अलग-अलग पोजिशन में करती हैं सैल्यूट

लाल किले की प्राचीर से ध्वाजारोहण के दौरान प्रधानमंत्री ने बिल्कुल उसी अंदाज में तिरंगे को सैल्यूट किया, जैसे भारतीय सेना करती है.

क्या आप जानते हैं थल, जल और नभ सेना क्यों अलग-अलग पोजिशन में करती हैं सैल्यूट
साल 2006 के मार्च माह में इंडियन एयर फोर्स ने अपने कर्मियों के लिए सैल्यूट के नए फॉर्म तय किए.

नई दिल्ली : लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया और देशवासियों को आजादी के दिन की बधाई दी. हर साल की तरह इस बार की आजादी के जश्न के दिन प्रधानमंत्री मोदी का साफा काफी चर्चित रहा. साफे के साथ प्रधानमंत्री मोदी का एक और अंदाज इस स्वतंत्रता दिवस पर देखने लायक था, जिसकी चर्चा चारों ओर हो रही है.

दरअसल, लाल किले की प्राचीर से ध्वाजारोहण के दौरान प्रधानमंत्री ने बिल्कुल उसी अंदाज में तिरंगे को सैल्यूट किया, जैसे भारतीय सेना करती है. लाल किले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री मोदी ने तिरंगे को सलामी देते वक्त जिस सैल्यूट का इस्तेमाल किया वह जल सेना यानी इंडियन नेवी का सैल्यूट था. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी स्वतंत्रता दिवस के मौकों पर अलग-अलग सेनाओं की तरह सैल्यूट करते हुए नजर आए हैं. 

उल्लेखनीय है कि भारत के पास तीन तरह की सेना है. भारतीय वायु सेना, भारतीय जल सेना और भारतीय थल सेना, जो जमीन, पानी और वायु में तैनात, ताकि देश पर किसी तरह की आंच न आए. 

1.भारतीय थल सेना
हम सभी ने आर्मी के अफसरों और जवानों को कहीं न कहीं सैल्यूट करते देखा होगा. वे खुले पंजों से और दाहिने हाथ से सैल्यूट करते हैं. सारी उंगलियां सामने की ओर खुली और अंगूठा साथ में लगा हुआ. यह अपने से सीनियर और मातहत के प्रति सम्मान प्रकट करने का जरिया है. साथ ही यह भी बताता है कि अगले के हाथ में किसी तरह का कोई हथियार नहीं है. 

2. भारतीय जल सेना
इंडियन नेवी में सैल्यूट के लिए हथेली को सिर के हिस्से से कुछ इस तरह टिका रखा जाता है कि हथेली और जमीन के बीच 90 डिग्री का कोण बने. इस सैल्यूट के पीछे एक बड़ी वजह नेवी में कार्यरत नाविकों और सैनिकों के जहाज पर काम करने की वजह से गंदी हो गई हथेलियों को छिपाना है. जहाज पर काम करने की वजह से कई बार उनके हाथ ग्रीस और तेल से गंदे हो जाते हैं.

3. भारतीय वायु सेना
साल 2006 के मार्च माह में इंडियन एयर फोर्स ने अपने कर्मियों के लिए सैल्यूट के नए फॉर्म तय किए. वे अब कुछ इस तरह सैल्यूट करते हैं कि हथेली जमीन से 45 डिग्री का कोण बनाती है. यह आर्मी और नेवी के बीच का सैल्यूट कहा जा सकता है. इससे पहले एयर फोर्स के सैल्यूट का तौर-तरीका भी आर्मी की ही तरह था.