रोज सिर्फ 10 सेकेंड फूंके शंख, ये बड़ी बीमारी रहेगी आपसे दूर

शंख फूंक कर आप रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) को काबू में रख सकते हैं. ये दावा मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (मेडिकल यूनिवर्सिटी), जबलपुर के पूर्व कुलपति व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस शर्मा ने किया है. इसका आधार उन्होंने दस साल पहले किए गए खुद के शोध को बताया है. पढ़िए पूरी खबर...

 रोज सिर्फ 10 सेकेंड फूंके शंख, ये बड़ी बीमारी रहेगी आपसे दूर
सांकेतिक तस्वीर

जबलपुर: रोज शंख फूंकने से आप रक्तचाप को नियंत्रित कर सकते हैं. ये शोध करीब दस साल पहले हुआ था. शोध करने वाले मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (मेडिकल यूनिवर्सिटी), जबलपुर के पूर्व कुलपति व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस शर्मा हैं. उन्होंने दस साल पहले शंख फूंककर उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) व बढ़ी हुई हृदय गति को नियंत्रित करने पर शोध किया था, जो कोरोना काल में फायदा दे रहा है. 

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रोज 10 सेंकड शंख फूंकर रहिए स्वस्थ्य
डॉक्टर आरएस शर्मा शोध के आधार पर मरीजों को यदि उच्च रक्तचाप है व हृदय गति तेज चल रही है तो नियमित 10 सेकंड शंख फूंकने की सलाह देते हैं. उन्होंने बताया कि दस साल पहले उनके द्वारा किए गए इस शोध का प्रयोग जिन लोगों पर किया था वे स्वस्थ्य रहे और उन्हें  रक्तचाप से संबंधित कोई समस्या नहीं हुई. डॉक्टर आरएस शर्मा ने अपना शोध पत्र एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया में भी प्रस्तुत किया था. 

कैसे काम करता शंख फूंकना
डॉ. आरएस शर्मा के मुताबिक शरीर के तंत्रिका तंत्र में दो प्रकार के सिस्टम होते हैं. पहला वालेंट्री और दूसरा आटोनोमस नर्वस सिस्टम. आटोनोमस सिस्टम के भी दो भाग होते हैं- सिंपेथेटिक व पैरासिंपेथेटिक नर्वस सिस्टम. जब पैरासिंपेथेटिक सिस्टम उत्तेजित होता है, तब रक्तचाप व हृदय के धड़कने की गति कम होती है. जब सिंपेथेटिक नर्वस सिस्टम उत्तेजित होता है तो उच्च रक्तचाप होता है और हृदय गति बढ़ती है.आटोनोमस नर्वस सिस्टम का हृदय की गति व रक्तचाप पर प्रभाव पड़ता है. गहरी सांस लेकर शंख में फूंकने से छाती के अंदर दबाव बढ़ता है. इससे नर्वस सिस्टम के पैरासिंपेथेटिक हिस्से पर प्रभाव पड़ता है, जिससे वो अपने काम की गति बढ़ा देता है. यानी उत्तेजित होता है, वहीं सिंपेथेटिक हिस्सा अपना काम कम कर देता है.  

कैसे कम कंट्रोल होता है रक्तचाप
डॉ. आरएस शर्मा बताते हैं कि हृदय से निकलने वाली बड़ी धमनी के पास वेगस नर्व रहती है. जब शंख में हवा फूंकी जाती है, तब प्रतिरोध आता है. छाती पर उच्च दबाव से वेगस नर्व उत्तेजित (स्टिमुलेट) होती है. छाती में दबाव बढ़ने से रक्तदाब का परिवर्तन बड़ी धमनी की नसों पर असर डालता है, जो आटोनोमस नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है. इससे उच्च रक्तचाप कम होता है.

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