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आजादी के बाद अब इस गांव को मिल रही सड़क, इसे बनाने में 8 जवानों ने दी अपनी शहादत

काफी लंबे समय बाद कांकेर में सड़क निर्माण हो रहा है. जिससे ग्रामीणों में खुशी की लहर है. हालांकि इस सड़क के निर्माण के दौरान आठ जवानों की भी शहादत हो चुकी हैं.

आजादी के बाद अब इस गांव को मिल रही सड़क, इसे बनाने में 8 जवानों ने दी अपनी शहादत

कांकेर: सड़क विकास का आइना होती है, सड़क ही होती है जिसके जरिए विकास गांव-गांव तक पहुंचता है. नक्सल प्रभावित कांकेर में बड़े लंबे अरसे के बाद कोयलीबेड़ा और परतापुर मार्ग का निर्माण किया जा रहा है. इस सड़क के बनने के बाद कोयलीबेड़ा वासियों को पखांजूर इलाके तक जाने में काफी आसानी हो जायेगी. यानी इस सड़क को उम्मीद की सड़क कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.

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दरअसल यह सड़क कोयलीबेड़ा वासियों की लाइफ लाइन बनेगी. इसके बनने से इसकी दूरी लगभग 40 किलोमीटर कम हो जायेगी. वहीं इसका फायदा नारायणपुर वासियों को भी मिलेगा क्योंकि अभी भानुप्रतापपुर से होकर पखांजूर जाया जाता है.

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75 पुलिया भी बनेंगे
कोयलीबेड़ा और प्रतापपुर मार्ग की दूरी 31 किलोमीटर है. जिसमे तीन बड़े पुल बनाए जा रहे हैं, साथ ही 75 पुलिया भी बनेंगे. जिसमे 75% पुलिया का निर्माण हो चुका हैं. इस सड़क का निर्माण कार्य दिसंबर तक पूरा हो जाएगा.

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ग्रामीण हुए खुश
इस सड़क के बनने से स्थानीय ग्रामीण काफी खुश हैं क्योंकि देश की आजादी के बाद से उनकी सबसे बड़ी मांग पूरी होने जा रही है. हालांकि इस सड़क के निर्माण के दौरान आठ जवानों की भी शहादत हो चुकी है. क्योंकि यह सड़क घोर नक्सली क्षेत्र से गुजरती है. लिहाजा इस सड़क के निर्माण का जिम्मा बीएसएफ के जवानों के कंधों पर है.

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