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MP: सालभर पहले मिल गई थी नकली दूध माफिया की रिपोर्ट, नहीं की गई कार्रवाई

सालभर पहले मध्य प्रदेश सरकार को FSSI ने ये चेतावनी दी थी कि मध्य प्रदेश में सप्लाई होने वाले नकली दूध में से 68 फीसदी दूध नकली है.

MP: सालभर पहले मिल गई थी नकली दूध माफिया की रिपोर्ट, नहीं की गई कार्रवाई
आखिर इस चेतावनी के बाद नकली दूध माफिया पर कोई कार्रवाई आखिर क्यों नहीं हुई?

भोपाल: फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की एक रिपोर्ट ने सियासी खलबली मचा दी है. यह रिपोर्ट सालभर पहले मध्य प्रदेश सरकार को FSSAI ने ये चेतावनी दी थी कि मध्य प्रदेश में सप्लाई होने वाले नकली दूध में से 68 फीसदी दूध नकली है. यह मध्य प्रदेश के लोगों की जान के साथ खिलवाड़ है. अब सवाल खड़े होने लगे हैं कि आखिर इस चेतावनी के बाद नकली दूध माफिया पर कोई कार्रवाई आखिर क्यों नहीं हुई? 

मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने ज़ी मीडिया से खास बातचीत में बताया, 'सालभर पहले सौंपी गई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि 68 फीसदी दूध नकली है तो कार्यवाही होना चाहिए थी. मुझे दुख है कि ऐसा नहीं किया गया. मैं इस बात का पता लगाऊंगा लेकिन इससे तत्कालीन बीजेपी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं.' 

सिलावट ने ये भी कहा कि उस वक्त भले ही नकली दूध माफिया को कार्यवाही से बचा लिया गया हो, लेकिन कमल नाथ सरकार उन्हें नहीं छोड़ेगी. प्रदेश भर में छापेमारी शुरू कर दी गई है और नकली दूध की फैक्ट्रियों तक पहुंचकर बंद की जा रही हैं. इसमें जो भी रैकेट है वो खत्म किया जाएगा साथ ही रासुका जैसी धाराओं का इस्तेमाल करके सख्त सजा दिलवाई जाएगी. 

इस मामले में, कांग्रेस ने तत्कालीन बीजेपी सरकार पर आरोप भी लगाया कि तत्कालीन सरकार ने नकली दूध माफिया को संरक्षण दिया. कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने कहा कि बीजेपी के ही लोग नकली दूध की फैक्टरी चलाकर उसकी सप्लाई करते थे. उनके लोग नहीं थे तो उन्हें बचाया क्यों गया. चौधरी ने कहा कि 15 साल के दरमियान मध्य प्रदेश के लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया गया. 

बीजेपी विधायक मोहन यादव ने ऐसे आरोपों को हवा-हवाई आरोप बताया है. यादव ने कहा कि सरकार में आने के बाद कांग्रेस केवल बीजेपी पर ही आरोप लगाने का काम कर रही है. पिछले सात महीने के दौरान लगाए गए सारे आरोपों में से अब तक एक भी आरोप को सिद्ध नहीं कर पाए हैं. यादव ने कहा कि फिजूल बयानबाजी की बजाय सरकार नकली दूध माफिया के खिलाफ कार्यवाही करे. 

क्या है FSSI की रिपोर्ट में
उत्पादन और खपत के बीच है 50 फीसदी का अंतर
खपत को नकली दूध के जरिए पूरा करता है माफिया
एमपी में सक्रिय हैं नकली दूध की फैक्ट्रियां 
अंतरराज्यीय रैकेट के जरिये सप्लाई होता है नकली दूध
नकली दूध के साथ दूध उत्पाद भी पहुंच रहे लोगों के घर
प्रदेश में बिक रहे 68 फीसदी दूध में है मिलावट
यूरिया, डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, अमोनियम सल्फेट, फार्मलिन से बनाया जाता है नकली दूध
असली दूध में मिलाकर बाजार और डेयरियों में किया जाता है सप्लाई
ब्रांडेड दूध में भी नकली दूध की मिलावट की आशंका

सीएम कमलनाथ के निर्देश के बाद शुरू हुई छापेमारी
ग्वालियर अंचल में छापेमारी में नकली दूध मिलने का मामला सामने आने के बाद कमल नाथ ने ऐसे अवैध कारोबार पर गहरी आपत्ति जाहिर की थी. उन्होंने ट्वीट करके कहा था कि जनता के स्वास्थ्य के साथ धोखा व खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा. सिन्थेटिक दूध व मावा के अवैध व्यापार से जुड़े लोगों पर कड़ी कार्यवाही की जाए, किसी को भी बख़्शा नहीं जाये. समाज व मानवता के दुश्मनों को इन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा मिलना चाहिए. सीएम के इस निर्देश के बाद प्रदेश भर में छापेमारी शुरू कर दी गई है.