मध्य प्रदेश: ग्वालियर के चिड़ियाघर में लाए गए त्रिपुरा के सैफई से हिमालयन भालू

 कुछ महीने पहले इस हिमालयन भालू की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई थी. जिसके बाद से प्रबंधन लगातार सैफई झाला प्रबंधन से संपर्क में था ताकि एक जोड़ा हिमालयन भालू मिल सके.

मध्य प्रदेश: ग्वालियर के चिड़ियाघर में लाए गए त्रिपुरा के सैफई से हिमालयन भालू
प्लांट में तैनात अफसरों के मुताबिक बारिश के मौसम में ही टर्बिडिटी की समस्या ज्यादा होती है.(फाइल फोटो)

ग्वालियरः त्रिपुरा के सैफई झाला से तीन हजार किलोमीटर का सफर तय करके हिमालयन भालू ग्वालियर चिड़िया घर पहुंच गए हैं. अनुपम और अनीता नाम के भालू का यह जोड़ा फिलहाल चिड़ियाघर में हैं, जहां इनका मेडिकल परीक्षण कराने के बाद 1 सप्ताह के बाद इन्हें सैलानियों के लिए पिंजरे से बाहर निकाला जाएगा. पिछले सप्ताह गांधी प्राणी उद्यान के डॉ उपेंद्र यादव और उनकी टीम सैफई झाला इन भालुओं को लेने के लिए रवाना हुए थे जिसके बाद उन्हें लेकर पहुंचे हैं. हिमालयन भालू पहले भी ग्वालियर के चिड़ियाघर में था, जिसे यहां आने वाले सैलानी खासा पसंद करते थे, लेकिन कुछ महीने पहले इस हिमालयन भालू की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई थी. जिसके बाद से चिड़ियाघर प्रबंधन लगातार सैफई झाला प्रबंधन से संपर्क में था ताकि एक जोड़ा हिमालयन भालू मिल सके.

पुलवामा हमला: जांबाज जवान जो मौत को मात देकर आंतकियों से किया मुकाबला

जो भालू अभी ग्वालियर लाए गए हैं उनकी उम्र महज डेढ़ साल है. भालू के बदले 8 जोड़ी बर्ड्स दिए हैं, जिनमें 2 जोड़ा देशी तोता, 2 जोडा लव वर्ड्स, दो जोड़ा बजरीगर,2 जोड़ा फिंच बर्ड दिए हैं. चिड़ियाघर प्रबंधन को उम्मीद है कि एक बार फिर हिमालयन भालू के चिड़ियाघर में आ जाने से सैलानियों की संख्या बढ़ेगी और शहरवासी इनको देखकर मनोरंजन कर सकेंगे. बता दें भालुओं को लेकर एक दल एक सप्ताह पहले त्रिपुरा के सेफई झाला से रवाना हुआ था, जो अब जाकर वापस आ सका है. दरअसल, पहाड़ी इलाका होने के कारण आने-जाने में एक सप्ताह से ज्यादा का समय लग गया.

पुलवामा हमले से आक्रोशित किसानों ने लिया फैसला- चाहे सड़ जाए, फिर भी पाक को नहीं बेचेंगे टमाटर

बता दें चिड़ियाघर प्रबंधन इससे पहले पिछली दीवाली में बिलासपुर के चिड़ियाघर से एक भालू का जोड़ा लाया था. वहीं ग्वालियर के चिड़ियाघर में इन भालुओं को रखने के लिए चिड़ियाघर प्रबंधन पूरी साफ-सफाई में लगा है, ताकि ये किसी तरह की बीमारी का शिकार न हो जाएं. प्लांट में तैनात अफसरों के मुताबिक बारिश के मौसम में ही टर्बिडिटी की समस्या ज्यादा होती है क्योंकि पहाड़ी और मैदानों से बहकर आने वाले पानी के चलते तिघरा जलाशय का पानी काफी मटमैला हो जाता है. ऐसे में टर्बिडिटी की जांच के बाद पानी में घुली मिट्टी और गंदगी को कम करने के उपाय किए जाते हैं.