छतीसगढ़: नान घोटाले मामले में IPS मुकेश गुप्ता और रजनीश सिंह हुए निलंबित

जांच में गड़बड़ी और फ़ोन टेपिंग मामले में ईओडब्लू ने कई गंभीर धाराओं के तहत दोनों पर केस दर्ज है.

छतीसगढ़: नान घोटाले मामले में IPS मुकेश गुप्ता और रजनीश सिंह हुए निलंबित
अवैध तरीके से फोन टैपिंग की भी शिकायत सामने आई है. (फाइल फोटो)

रायपुर: सीनियर आईपीएस मुकेश गुप्ता और रजनीश सिंह को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है. बताया जा रहा है कि नान घोटाले की जांच में गड़बड़ी और फ़ोन टेपिंग मामले में ईओडब्लू ने कई गंभीर धाराओं के तहत दोनों पर केस दर्ज है. निलंबित मुकेश गुप्ता राज्य में डीजी स्तर के अधिकारी हैं. वहीं, रजनीश सिंह नारायणपुर के एसपी हैं.

क्या है मामला

मुकेश गुप्ता पिछली सरकार में बेहद ताकतवर अधिकारी माने जाते रहे हैं. ईओडब्ल्यू में उनकी पदस्थापना के कुछ महीनों बाद ही नागरिक आपूर्ति निगम (नान) में छापा मारा गया था. जिसमें राज्य में चर्चित रहे नान घोटाले मामले में कई प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों के नाम भी सामने आया था. इस मामले की जांच का जिम्मा मुकेश गुप्ता पर ही था. गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर जांच की दिशा बदली है. इस दौरान कई बड़े चेहरों को बचाने का काम उन्होंने किया है. 

दोनों पर FIR हुआ दर्ज

मामला सामने आने के बाद ईओडब्ल्यू ने डीजी मुकेश गुप्ता और एस.पी. रजनेश सिंह के खिलाफ धारा 166, 166 A,(B) 167, 193, 194, 196, 201, 218, 466, 467, 471, 120B और भारतीय टेलिग्राफ़ एक्ट 25, 26 सहपठित धारा 5 (2) के तहत मामला पंजीबद्ध किया है.

आरोपियों को बचाने का है आरोप 

बताया जा रहा है कि मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह ने नान घोटाले की जांच के दौरान मिले डायरी के कुछ पन्नों के इर्द-गिर्द ही जांच केंद्रीत रखी थी. जबकि डायरी के कई पन्नों में प्रभावशाली लोगों के नाम लिखे गए थे, जिन्हें जांच के दायरे में नहीं लाया गया. ऐसी स्थिति में यह संदेश पैदा करता है कि जांच को प्रभावित करने के साथ प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच गलत ढंग से कई गई होगी.

राजनीतिक गलियारों में भी चल रही है चर्चा

वहीं रमन सरकार में इंटेलिजेंस चीफ रहने के दौरान मुकेश गुप्ता और तत्कालीन एसीबी के एसपी रजनेश सिंह पर अवैध तरीके से फोन टैपिंग कराए जाने की भी शिकायत सामने आई है, जिसे एफआईआर का आधार बनाया गया है. वैसे राज्य के राजनीतिक गलियारों में इन दो अधिकारियों के निलंबन के बाद लोग सवाल घोड़े का नहीं, घुड़सवार का है. घुड़सवार ने दो आईपीएस को रौंद दिया जैसी बातों पर चर्चा कर रहे हैं.