बासमती GI TAGGING को लेकर उलझे MP और पंजाब, अमरिंदर ने PM मोदी, शिवराज ने सोनिया से की शिकायत

जीआई टैगिंग यानी भौगोलिक संकेत का मतलब किसी विशेष क्षेत्र/राज्य/देश में पैदा होने वाले/उपजने वाले उत्पाद से होता है. 

बासमती GI TAGGING को लेकर उलझे MP और पंजाब, अमरिंदर ने PM मोदी, शिवराज ने सोनिया से की शिकायत
शिवराज चौहान (L), कैप्टन अमरिंदर सिंह (R).

भोपाल: बासमती चावल की जीआई टैगिंग (Geographical Indication/भौगोलिक संकेत) को लेकर मध्य प्रदेश और पंजाब के बीच का विवाद अब दिल्ली पहुंच गया है. एक दिन पहले पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने जीआई टैगिंग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा था. शुक्रवार को मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अमरिंदर सिंह को जबाव दिया.

शिवराज ने जीआई टैगिंग विवाद को लेकर सोनिया गांधी को लिखा पत्र
शिवराज चौहान ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में राहुल गांधी से लेकर कमलनाथ और अमरिंदर सिंह पर निशाना साधा है, कांग्रेस पार्टी को किसानों का दुश्मन बताया है. सोनिया गांधी को लिखे दो पेज के पत्र में शिवराज चौहान ने तंज कसते हुए सवाल किया, ''राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के 10 दिन के अंदर किसानों के कर्ज माफी की बात कही थी. इसे कमलनाथ ने मजाक बना दिया. उन्होंने किसानों की फसल बीमा की राशि भी नहीं भरी. इससे किसानों को बीमा का फायदा नहीं मिल पाया.''

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सोनिया गांधी ने नाम अपने पत्र में लिखा, ''अमरिंदर जी मध्य प्रदेश के किसानों के खिलाफ खड़े हो गए हैं. आखिर कांग्रेस की मध्य प्रदेश के किसानों से दुश्मनी क्या है? अमरिंदर ने बासमती को जीआई टैग दिए जाने के मामले में पाकिस्तान को जोड़कर खराब राजनीति की है. क्या कांग्रेस मध्य प्रदेश के किसानों को बढ़ता हुआ देखना नहीं चाहती है? मैं ही नहीं बल्कि मेरे राज्य का हर किसान आपसे यह प्रश्न कर रहा है. आप से शीघ्र उत्तर की आशा है.''

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मध्य प्रदेश ने दिए हैं ये तर्क
बासमती चावल की जीआई टैगिंग को लेकर मध्य प्रदेश ने तर्क दिया है कि केंद्र सरकार 1999 से राज्य को बासमती के ''ब्रीडर बीज'' की आपूर्ति कर रही है. ''सिंधिया स्टेट'' के रिकॉर्ड में अंकित है कि 1944 में मध्य प्रदेश के किसानों को बीज मिले थे. हैदराबाद के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ राइस रिसर्च ने अपनी ''उत्पादन उन्मुख सर्वेक्षण रिपोर्ट'' में दर्ज किया है कि मध्य प्रदेश में पिछले 25 वर्षों से बासमती चावल का उत्पादन किया जा रहा है. पंजाब-हरियाणा के बासमती निर्यातक मध्य प्रदेश से बासमती चावल खरीद रहे हैं.

कमलनाथ ने सोनिया गांधी को पत्र लिखने पर शिवराज को दिया जवाब
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोनिया गांधी को लिखे शिवराज के पत्र पर सिलसिलेवार ट्वीट के जरिए पलटवार किया है. उन्होंने लिखा, ''बड़ा ही आश्चर्यजनक है कि मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग मिले, इसको लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री के प्रधानमंत्री को लिखे पत्र का जवाबी पत्र हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री को लिखने की बजाय सोनिया गांधी जी को पत्र लिख दे रहे हैं? इसी से समझा जा सकता है कि उनको इस मामले में कितनी समझ है.''

कमलनाथ ने ट्वीट में लिखा, ''उन्हें सिर्फ़ राजनीति करनी है. किसान हित व प्रदेश हित से उनका कोई लेना-देना नहीं है. यदि वह अपने पिछले 15 वर्षों के कार्यकाल में इसके लिए ठोस प्रयास कर लेते, तो शायद आज प्रदेश के किसानों को अपना हक मिल चुका होता. लेकिन उस समय भी कुछ नहीं किया और अब भी सिर्फ राजनीति. बेहतर हो कि वह सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश के किसानों के हित में इस मामले में सारे तथ्य रखकर इस लड़ाई को ठोस ढंग से लड़ें. पंजाब के मुख्यमंत्री के प्रधानमंत्री को लिखे पत्र के जवाब में प्रदेश के बासमती चावल से जुड़े सारे तथ्य प्रधानमंत्री को पत्र लिख भेजें.''

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यह कांग्रेस और भाजपा का मामला नहीं है, यह केन्द्र सरकार का विषय है. वहां के मुख्यमंत्री अपने प्रदेश के किसानों का हक देख रहे हैं, हमें अपने प्रदेश के किसानों का हक देखना है. मद्रास हाईकोर्ट से 27 फरवरी 2020 को याचिका खारिज होने के बाद हमने 3 मार्च 2020 को ही इस मामले में बैठक बुलायी और प्रधानमंत्री व देश के कृषि मंत्री को पत्र लिखा लेकिन शिवराज जी तो उस समय सरकार गिराने में लगे थे. 23 मार्च से आज तक शिवराज सरकार ने इस मामले में क्या किया, यह भी सामने लाए? शिवराज जी, आप इस मामले में झूठे आरोपों व सस्ती राजनीति की बजाय ठोस कदम उठाएं, जिससे प्रदेश के किसानों का भला हो व प्रदेश को उसका हक मिले.

क्या होता है जीआई टैगिंग
जीआई टैगिंग यानी भौगोलिक संकेत का मतलब किसी विशेष क्षेत्र/राज्य/देश में पैदा होने वाले/उपजने वाले उत्पाद से होता है. किसी विशेष स्थान विशेष पर पैदा होने वाले या उपजने वाले उत्पाद होता है. भारतीय संसद ने 1999 में रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन एक्ट के तहत 'जियोग्राफिकल इंडिकेशंस ऑफ गुड्स' लागू किया था, इस आधार पर भारत के किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाली विशिष्ट वस्तु का कानूनी अधिकार उस राज्य को दे दिया जाता है. बनारसी साड़ी, मैसूर सिल्क, कोल्हापुरी चप्पल, दार्जिलिंग चाय इसी कानून के तहत संरक्षित हैं. जैसा कि नाम से स्पष्ट है, जियोग्राफिकल इंडिकेशंस टैग्स का काम उस खास भौगोलिक परिस्थिति में पाई जाने वाली वस्तुओं के दूसरे स्थानों पर गैर-कानूनी प्रयोग को रोकना है.

कैसे मिलती है जीआई टैगिंग
किसी भी वस्तु को GI टैग देने से पहले उसकी गुणवत्ता, क्वालिटी और पैदावार की अच्छे से जांच की जाती है. यह तय किया जाता है कि उस खास वस्तु की सबसे अधिक और ओरिजनल पैदावार निर्धारित राज्य की ही है. इसके साथ ही यह भी तय किया जाना जरूरी होता है कि भौगोलिक स्थिति का उस वस्तु की पैदावार में कितनी भूमिका रही है. कई बार किसी खास वस्तु की पैदावार एक विशेष स्थान पर ही संभव होती है. इसके लिए वहां की जलवायु से लेकर उसे आखिरी स्वरूप देने वाले कारीगरों तक का हाथ होता है.

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